Wednesday , October 23 2019
Home / Featured / राम रहीम के परोल पर हलचल, खट्टर का संकेत

राम रहीम के परोल पर हलचल, खट्टर का संकेत

चंडीगढ़

जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के परोल पर हरियाणा में सियासी विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि गुरमीत राम रहीम के परोल पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। गुरमीत राम रहीम सिंह ने हरियाणा के सिरसा में खेतों की देखभाल के लिए 42 दिन के परोल की मांग की है। वह बलात्कार व हत्या के मामले में दोषी करार दिया जा चुका है और जेल की सजा काट रहा है।

मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा, ‘हर कैदी को एक समय के बाद परोल का अधिकार है। कोई भी व्यक्ति परोल मांग सकता है। उसे परोल मांगने से नहीं रोका जा सकता। कैदी परोल जेल अधीक्षक से मांगता है। अधीक्षक उसे जिला उपायुक्त को भेजता है। जिला उपायुक्त एसपी को भेजते हैं। अंतिम अनुमति डिविजनल कमिश्नर द्वारा दी जाती है। अभी इन सभी का फैसला आना बाकी है।’

खट्टर ने आगे कहा, ‘राम रहीम की परोल पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। सरकार इस मामले में प्रदेश हित को देखते हुए कोई फैसला करेगी। कुछ निश्चित कानूनी प्रकियाएं होती हैं और जिस इंसान को परोल लेने का हक है, वह ले सकता है। हम किसी को रोक नहीं सकते।’

राम रहीम ने मांगा 42 दिन का परोल
सिरसा के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हरियाणा में रोहतक जिले के सुनरिया जेल में बंद राम रहीम ने जिले में अपने खेतों की देखभाल के लिए 42 दिन के परोल का अनुरोध किया है। सिरसा के उपायुक्त अशोक कुमार गर्ग का कहना है कि आवेदन पर विचार किया जा रहा है। राजस्व और पुलिस विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। गर्ग ने फोन पर कहा, ‘अभी सिर्फ इतना कह सकता हूं कि आवेदन पर विचार किया जा रहा है।’

रेप-मर्डर केस में सजा काट रहा राम रहीम
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम बलात्कार के दो मामलों और पत्रकार की हत्या में दोषी ठहराए जाने के बाद से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। गुरमीत को दो महिलाओं से दुष्कर्म के मामले में अगस्त 2017 में 20 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। पंचकूला में सीबीआई की विशेष अदालत ने इस साल जनवरी में उसे और तीन अन्य दोषियों को एक पत्रकार की हत्या के 16 साल पुराने मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मालूम हो कि राम रहीम को पत्रकार हत्याकांड और साध्वियों के यौन शोषण मामले में सजा मिली हुई है।

दूसरी ओर, पत्रकर रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कहा है कि डेरा प्रमुख को परोल नहीं दी जानी चाहिए। यदि उन्हें परोल दी गई तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और परोल को रद्द कराने की याचिका देंगे। यदि गुरमीत बाहर आता है तो उनके परिवार को भी जान का खतरा बढ़ जाएगा।

कानूनी जानकारों की राय
कानूनी जानकारों के मुताबिक परोल और कस्टडी परोल देने के लिए नियम तय हैं। कानूनी जानकार अजय दिग्पाल के मुताबिक परोल दो तरह की होती है कस्टडी परोल और रेग्युलर परोल। कस्टडी परोल तब मिलती है, जब किसी आरोपी या दोषी के परिवार में किसी की मौत हो जाए या फिर परिवार या नजदीकी रिश्तेदार की शादी हो या फिर परिवार में कोई गंभीर तौर पर बीमार हो तो फिर विशेष हालात में कस्टडी परोल दिया जाता है।

जेल सुपरिंटेंडेंट के सामने इसके लिए आवेदन दिया जाता है और वह आदेश जारी करता है। अगर वहां से आवेदन खारिज हो जाए तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। कस्टडी परोल आरोपी और दोषी दोनों को मिल सकता है और इस दौरान उसके साथ पुलिस रहती है और ज्यादा से ज्यादा छह घंटे के लिए मिलता है।

सिर्फ दोषी को मिलता रेग्युलर परोल
रेग्युलर परोल सिर्फ दोषी करार दिए गए कैदी को मिलता है। आरोपी को नहीं। ऐडवोकेट नवीन शर्मा बताते हैं कि दिल्ली हाई कोर्ट की गाइडलाइंस तय की गई है जिसके तहत कई शर्तें हैं। एक साल सजा काट चुके दोषी को ही परोल दिया जा सकता है। रेप के बाद हत्या को अंजाम देने वाले मुजरिम को परोल नहीं दिया जा सकता। आतंकवाद और देशद्रोह के दोषी को परोल नहीं दिया जा सकता। ये फैसला ऐडमिनिस्ट्रेटिव होता है।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

कमलेश मर्डर केस: ऐसे एटीएस के जाल में फंसे मुख्य आरोपी

लखनऊ लखनऊ स्थित नाका हिंडोला के खुर्शीद बाग में शुक्रवार को हिंदू समाज पार्टी के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)