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वर्ल्ड कपः 45 मिनट, वह एक थ्रो… और टूट गए करोड़ों सपने

नई दिल्ली

वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइनल रोमांच और ऐक्शन से भरपूर रहा। भारतीय गेंदबाजों ने पहले कीवी बल्लेबाजों को 239 रनों पर समेट दिया। लग रहा था कि भारत आसानी से मैच जीत जाएगा। लेकिन जब न्यू जीलैंड गेंदबाजी के लिए उतरा तो उसके तेवर ही अलग नजर आए। कीवी गेंदबाजों ने दुनिया की सर्वश्रेष्ठ बैटिंग लाइनअप को ध्वस्त कर दिया। रेकॉर्ड 5 शतक लगा चुके रोहित 1 रन पर पविलियन लौट गए। अपनी कंसिस्टेंसी के लिए जाने जाने वाले और चेस मास्टर के रूप में दुनिया में धाक जमाने वाले विराट कोहली भी महज एक रन बना सके। यही हाल के. एल. राहुल का रहा।

24 रन पर भारत के 4 बल्लेबाज पविलियन लौट चुके थे। मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान में सन्नाटा था। ऐसा लगा कि टीम इंडिया का खेल खत्म हो चुका है लेकिन पिक्चर अभी बाकी थी। पंत और पंड्या संभलकर खेलते रहे लेकिन दबाव में दोनों ही अनुभवहीन युवा बिखर गए और गलत शॉट खेल अपने विकेट कीवियों को गिफ्ट कर दिए। लेकिन यहां से खेल ने फिर करवट लिया। रविंद्र जडेजा और धोनी ने 7वें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की। जडेजा और धोनी के बल्ले से निकले एक-एक रन से भारत की उम्मीदें परवान चढ़ रही थीं। जडेजा के बल्ले से निकले 1-1 छक्कों से न्यू जीलैंड टीम और उनके समर्थकों की सांसें बैठ रही थीं। जडेजा 4 छक्के और इतने ही चौके जड़ चुके थे। 14 गेंदों में टीम इंडिया को जीत के लिए 32 रनों की दरकार थी। 48वें ओवर की 5वीं गेंद थी। बोल्ट के इस स्लोअर वन को जडेजा टाइम नहीं कर सके और विलियमसन ने कैच लपककर महज 59 गेंदों में उनकी 77 रनों की साहसिक और धुआंधार पारी का अंत कर दिया। अब टीम इंडिया की सारी उम्मीदें महेंद्र सिंह धोनी पर थीं।

12 गेंदों में भारत को जीत के लिए 31 रनों की जरूरत थी। धोनी क्रीज पर थे और टीम इंडिया की जीत की उम्मीदें भी जिंदा थीं। 49वें ओवर में फर्ग्युसन के हाथ में गेंद थी। पहली ही गेंद को धोनी ने हवाई रास्ता दिखाया और छक्का जड़ दिया। पूरा स्टेडियम झूम उठा। अब 11 गेंदों में 25 रन चाहिए थे। ओवर की दूसरी गेंद… कोई रन नहीं। तीसरी गेंद पर धोनी एक रन तेजी से दौड़े और दूसरे के लिए उसी तेजी से लौटे। लेकिन ये क्या? मार्टिन गप्टिल का सीधा थ्रो विकेट उखाड़ चुका था और धोनी उतने ही समय के अंतर से रन आउट हो गए, जितने समय में पलकें झपकती हैं। गप्टिल के इस थ्रो ने टीम इंडिया की उम्मीदों और करोड़ों भारतीय फैंस के सपनों को तोड़ दिया।

बारिश की वजह से रिजर्व डे में पहुंचे इस सेमीफाइनल के पहले दिन इंडियन बोलर्स का दबदबा दिखा। उस समय तक किसी ने नहीं सोचा होगा कि दुनिया की नंबर एक टीम इंडिया को कोई मुश्किल आने वाली है। क्रिकेट विश्व कप 2019 के लीग मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजी के टॉप ऑर्डर ने शानदार खेल दिखाया था। हालांकि, वहीं से इस बात की चर्चा शुरू हो गई थी कि अगर शुरू के तीन बल्लेबाज कभी जल्दी आउट हो गए तो क्या होगा? सेमीफाइनल मुकाबले में ठीक यही हुआ। भारत के तीन बल्लेबाज सिर्फ 5 रन के स्कोर पर आउट हो गए और धीरे-धीरे करके मैच भारत से हाथ से निकलने लगा।

इसके बावजूद पहले हार्दिक पंड्या फिर रविंद्र जडेजा और महेंद्र सिंह धोनी ने भारत को मैच में बनाए रखा। आखिर के 45 मिनट में एक-एक करके विकेट गिरे और भारत मैच हार गया। 49वें ओवर की पहली गेंद पर धोनी ने छक्का मारा तो लगा कि भारत जीत जाएगा लेकिन मार्टिन गप्टिल के एक सटीक थ्रो ने रही-सही उम्मीदें भी छीन लीं। इस हार के साथ ही भारत का विश्व कप जीतने का सपना टूट गया।

आइए भारत की हार के चार प्रमुख कारणों पर नजर डालते हैं:-
पहला कारण: टॉप ऑर्डर का फेल होना
पूरे टूर्नमेंट में भारतीय बल्लेबाजों ने जमकर रन बनाए थे। हालांकि, इस मैच में पहले पावर प्ले में ही भारत ने अपने शुरुआती बल्लेबाजों को गंवा दिया। एक समय पर भारत का स्कोर 24 रन पर 4 विकेट हो गया। आखिरी बार रोहित शर्मा और विराट कोहली ने चैंपियंस ट्रॉफी 2017 में एक-एक रन बनाए थे और वहां भी भारत को हार का मुंह देखना पड़ा था।

दूसरा कारण: न्यू जीलैंड की शानदार फील्डिंग
लीग मैचों में ओपनर रोहित शर्मा को चार बार जीवन दान मिला था और उन्होंने तीन बार शतक बना डाले। इस मैच में न्यू जीलैंड के कीपर टॉम लेथम ने कोई गलती नहीं की और रोहित शर्मा के बाद के एल राहुल का भी कैच लपका। इसके बाद जेम्स नीशम ने दिनेश कार्तिक का शानदार कैच लपककर मैच में पकड़ बना ली। पूरे टूर्नमेंट में बल्ले से नाकाम रहे न्यू जीलैंड के विस्फोटक बल्लेबाज मार्टिन गप्टिल ने 49वें ओवर में चीते जैसी फुर्ती से सटीक थ्रो कर दुनिया के बेस्ट रनर में से एक महेंद्र सिंह धोनी को रन आउट किया।

तीसरा कारण: खराब शॉट चयन
ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या अच्छे टच में लग रहे थे और उनके बल्ले से रन भी निकल रहे थे लेकिन स्पिनर मिशेल सैंटनर की बॉल पर छक्का मारने की कोशिश में ये दोनों बल्लेबाज अपना विकेट गिफ्ट में देकर चले गए।

चौथा कारण: आक्रामकता दिखाने में देरी
रविंद्र जडेजा और धोनी ने 116 रनों की पार्टनरशिप की। विश्व कप में 7वें या उससे निचले क्रम के लिए यह रेकॉर्ड साझेदारी है लेकिन आक्रमण करने में देरी का नतीजा यह हुआ कि भारत को आखिरी 3 ओवर में 37 रन की दरकार हो गई और दबाव काफी बढ़ गया।

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