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एक और सुपर ओवर से होता फैसला: तेंडुलकर

नई दिल्ली

सचिन तेंडुलकर ने मंगलवार को विश्व कप फाइनल जैसी स्थिति आने पर ‘बाउंड्री’ की संख्या के आधार पर विजेता का निर्धारण करने के बजाय एक दूसरा सुपर ओवर खेलने की वकालत की। लॉर्ड्स में रविवार को खेले गए फाइनल में इंग्लैंड को अधिक बाउंड्री लगाने के कारण विजेता घोषित किया गया। न्यू जीलैंड के खिलाफ उसका मैच और सुपर ओवर दोनों टाई छूटे थे।

तेंडुलकर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि दोनों टीमों की बाउंड्री पर विचार करने के बजाय एक अन्य सुपर ओवर से विजेता का फैसला होना चाहिए था। केवल विश्व कप फाइनल ही नहीं, प्रत्येक मैच महत्वपूर्ण है। जिस तरह से फुटबाल में जब टीमें अतिरिक्त समय में जाती है तो पूर्व का खेल कुछ मायने नहीं रखता।’

किसने लगाई कितनी बाउंड्री
इंग्लैंड ने अपनी पारी में कुल 26 बाउंड्री लगाईं और न्यू जीलैंड ने 17। इसी आधार पर इंग्लैंड टीम को विजेता घोषित किया गया।

चोटी पर रहने वाली टीमों को मिले मौका
तेंडुलकर से पूछा गया कि नॉकआउट चरण में विश्व कप के प्रारूप में बदलाव की जरूरत है, उन्होंने कहा, ‘जो दो टीमें चोटी पर रहती हैं उनके लिए निश्चित तौर पर निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए कुछ होना चाहिए।’

धोनी आते नंबर पांच पर
उन्होंने इसके साथ ही कहा कि सेमीफाइनल में पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को नंबर सात के बजाय नंबर पांच पर भेजा जाना चाहिए था। तेंडुलकर ने कहा, ‘निसंदेह, मैं धोनी को नंबर पांच पर भेजता। भारत तब जिस स्थिति में था तब वह पारी संवार सकते थे। हार्दिक छठे और कार्तिक सातवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिये आ सकते थे।’

वॉर्न भी यही बोले
महान लेग स्पिनर शेन वॉर्न भी यही राय रखते हैं। वॉर्न का भी यही कहना है कि अगर सुपर ओवर में नतीजा नहीं निकलता तो एक और सुपर ओवर होना चाहिए और अगर तब भी परिणाम नहीं आता तो विजेता तय होने तक सुपर ओवर होते रहना चाहिए।

इससे पहले क्या हुआ इससे पहले विश्व कप में सिर्फ एक मैच टाई हुआ था। 1999 के विश्व कप में साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच मैच टाई रहा था। इससें ऑस्ट्रेलिया को इस आधार पर विजेता घोषित किया गया था चूंकि उसने साउथ अफ्रीका को लीग स्टेज में हराया था। इस आधार पर देखा जाए तो इंग्लैंड ही विजेता बनता।

किसने खोए अधिक विकेट वनडे इतिहास में 40 मुकाबले टाई रहे हैं इसमें से सिर्फ चार में विजेता घोषित हुए हैं। इंग्लैंड बनाम न्यू जीलैंड और साउथ अफ्रीका बनाम ऑस्ट्रेलिया के अलावा 2 अन्य मुकाबले भारत बनाम पाकिस्तान, 1987 में और 1988 में पाकिस्तान बनाम ऑस्ट्रेलिया के बीच टाई हुए मुकाबले में विजेता तय किया गया था। इन दोनों मुकाबलों में कम विकेट खोने वाली टीम को विजेता घोषित किया गया। अगर इसे आधार बनाया जाता तो न्यू जीलैंड विजेता होता चूंकि उसने 8 विकेट खोए थे और इंग्लैंड ऑल आउट हुआ था।

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