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हिंद महासागर में दबदबे को चीन की चाल, लंका को दिया युद्धपोत

पेइचिंग

हिंद महासागर में अपना दबदबा बढ़ाने की जुगत में लगे चीन ने श्रीलंका को एक युद्धपोत गिफ्ट कर उसे लुभाने की कोशिश की है। पिछले कुछ वर्षों से चीन सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस द्वीपीय देश के साथ सैन्य संबंधों को मजबूत कर रहा है। चीन द्वारा गिफ्ट किया गया युद्धपोत ‘P625’ पिछले हफ्ते कोलंबो पहुंच गया। यही नहीं, रेल के डिब्बे और इंजन बनाने वाली चीन की कंपनी ने घोषणा की है कि वह जल्द ही श्रीलंका को नए तरह की 9 डीजल ट्रेनों की डिलिवरी करेगी।

2300 टन का युद्धपोत 2015 में चीनी सेना से रिटायर
आपको बता दें कि 052 टाइप के इस युद्धपोत (तोंगलिंग) को चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की नेवी में 1994 में शामिल किया गया था। 2300 टन के इस युद्धपोत को 2015 में PLA नेवी से रिटायर कर दिया गया। अब इसे ही श्रीलंका नेवी को गिफ्ट किया गया है।

पिछले साल ही भारत ने गिफ्ट किया था जहाज
श्रीलंका की नौसेना ने लिट्टे के खिलाफ संघर्ष में अहम भूमिका निभाई थी। उसके पास करीब 50 लड़ाकू, सपॉर्ट शिप और तटीय इलाकों की निगरानी के लिएगश्ती प्लेन हैं जो मुख्य रूप से भारत, अमेरिका, चीन और इजरायल से मिले हैं। भारत ने पिछले साल ही अपने इस अहम पड़ोसी की नौसेना को एक गश्ती जहाज गिफ्ट में दिया था। इससे पहले भी भारत ने 2006 और 2008 में 2 गश्ती पोत दिए थे।

श्रीलंका की नेवी ने कहा, अच्छी मित्रता का प्रतीक
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका की नेवी के कमांडर वाइस ऐडमिरल पियल डीसिल्वा ने युद्धपोत के लिए चीन को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सेनाएं इस गिफ्ट को दोनों देशों के बीच अच्छी मित्रता के संकेत के तौर पर लेंगी।

श्रीलंका को क्या होगा फायदा?
उन्होंने कहा कि श्रीलंका इस समय समुद्री चुनौतियों का सामना कर रहा है। नेवी कमांडर ने कहा कि ड्रग तस्करी समेत अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देकर संदिग्ध भाग जाते हैं। अब इस युद्धपोत के मिलने से नेवी की सर्विलांस क्षमता में काफी इजाफा होगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि श्रीलंका की नेवी के नए मेंबर के तौर पर ‘P625’ युद्धपोत का इस्तेमाल मुख्यतौर पर समंदर में गश्त, पर्यावरण संबंधी निगरानी और समुद्री लुटेरों के खिलाफ किया जाएगा।

कोलंबो में स्थित चीन के मिशन द्वारा जारी बयान के मुताबिक चीन की नेवी ने श्रीलंका के 110 से ज्यादा नेवल अफसरों और नाविकों को शंघाई में दो महीने का प्रशिक्षण दिया है।गौरतलब है कि श्रीलंका पर भारी-भरकम कर्ज थोपने के बाद चीन ने 2017 में उसके हंबनटोटा पोर्ट का अधिग्रहण कर लिया था। उसके बाद से ही उसकी नजर इस क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाने पर है। वह लगातार हिंद महासागर में नौसेना की मौजूदगी बढ़ा रहा है। उसने जिबूती में एक बेस भी तैयार कर लिया है, जिसे वह फिलहाल एक लॉजिस्टिक्स बेस बता रहा है।

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