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धोनी पर गंभीर का तंज- युवाओं के लिए ही हमें बाहर किया था

भारत के दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी ने अपने संन्यास की तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है. धोनी फिलहाल क्रिकेट से संन्यास नहीं लेंगे. हाल ही में वर्ल्ड कप में भारत के सेमीफाइनल से बाहर होने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की बढ़ती अटकलों के बीच धोनी ने बीसीसीआई से कहा था कि वह अपनी पैरा सैन्य रेजिमेंट की सेवा के लिए खेल से दो महीने का विश्राम लेंगे.

धोनी के संन्यास को लेकर पूर्व क्रिकेटरों ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है. टीम इंडिया के पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज गौतम गंभीर ने महेंद्र सिंह धोनी को लेकर बड़ा बयान दिया है. बता दें कि वर्ल्ड कप 2019 में महेंद्र सिंह धोनी का फॉर्म बेहद खराब रहा. 38 वर्षीय धोनी ने वर्ल्ड कप 2019 में खेले 9 मैचों की 8 पारियों में 45.50 की औसत से 273 रन बनाए, जिसमें 2 अर्धशतक शामिल रहे. इस दौरान धोनी को अपनी धीमी बल्लेबाजी के लिए भी आलोचना झेलनी पड़ी थी. वह इस टूर्नामेंट में सबसे ज्‍यादा बाई के रन लुटाने वाले विकेटकीपर रहे.

हाल ही में एक टीवी शो को दिए इंटरव्‍यू में गौतम गंभीर ने वह विवादित वाकया याद दिलाया जब धोनी ने 2012 में ऑस्ट्रेलिया में खेली गई ट्राई सीबी सीरीज में सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और गंभीर को एक साथ नहीं खिलाने का फैसला किया था.

गंभीर ने कहा, ‘ट्राई सीरीज में धोनी ने कहा था कि वो हम तीनों (सचिन, सहवाग, गंभीर) को एक साथ नहीं खिला सकता क्योंकि वो 2015 वर्ल्ड कप की तैयारी कर रही है. ये बड़ा झटका था, मुझे लगता है कि किसी भी क्रिकेटर के लिए ये तगड़ा झटका होता.गंभीर ने कहा, ‘मैंने कभी ऐसा नहीं सुना था कि किसी को 2012 में ये कह दिया गया हो कि वो 2015 वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं होंगे. मेरे मन में हमेशा यही बात थी कि अगर आप लगातार रन बनाते रहेंगे तो उम्र तो केवल एक नंबर है.’

गंभीर ने याद दिलाया कि धोनी ने यह फैसला इसलिए किया था क्‍योंकि वह 2015 वर्ल्ड कप के लिए युवाओं को तैयार करना चाहते थे. गंभीर ने यह भी कहा कि चयनकर्ताओं को धोनी के भविष्‍य पर फैसला लेना चाहिए.

गंभीर ने कहा, ‘ऑस्ट्रेलिया में जब हमे एक जीत की बेहद जरूरत थी, तो मुझे याद है कि होबार्ट में, वीरू और सचिन ने ओपनिंग की थी और मैं नंबर तीन पर खेला था और विराट चार पर. भारत वो मैच जीत गया था और हमने 37 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया. सीरीज की शुरुआत में हम एक साथ नहीं खेले थे, हमे रोटेट किया जा रहा था. जब जीत की बेहद जरूरत थी, तब एमएस ने हम तीनों को खिलाया.’ गंभीर ने कहा, ‘अगर आपने कोई फैसला किया है तो उस पर टिके रहे. आपने पहले से जो सोच लिया है, उससे पीछ ना हटें.’

गंभीर ने भारत की ओर से अपना आखिरी टेस्ट 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट में खेला था. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर में 58 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और 41.95 की औसत से 4154 रन बनाए, जिसमें नौ शतक शामिल हैं. गंभीर ने 147 वनडे इंटरनेशनल में 39.68 की औसत से 5238 रन बनाए. जिसमें 2011 वर्ल्ड कप फाइनल की वो 97 रनों की यादगार पारी है, जिसकी बदौलत भारत ने दूसरी बार वर्ल्ड कप पर कब्जा जमाया था. वनडे में उन्होंने 11 शतकीय पारियां खेलीं. गंभीर ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भी अपनी छाप छोड़ी. उन्होंने 37 मैच में सात अर्धशतकों की मदद से 932 रन बनाए, जिसमें उनकी औसत 27.41 की रही.

गंभीर ने कहा, ‘यह सही है कि धोनी ने हमें दो वर्ल्ड कप (2007 और 2011) जिताये लेकिन कप्तान को सफलता का सारा श्रेय देना और नाकाम रहने पर उसे गुनहगार ठहराना गलत है. धोनी ने चैम्पियंस ट्रॉफी और विश्व कप जीते लेकिन दूसरे कप्तान भी भारत को आगे ले गए. अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ ने यह काम किया है.’

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