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भेल प्रबंधन नेताओं पर हावी

भोपाल

पहले दमदार ट्रेड यूनियन भेल प्रबंधन पर हावी रहती थी लेकिन आजकल प्रबंधन इन पर हावी दिखाई दे रहा है। इसके बाद भी बड़े नेताओं की चुप्पी कर्मचारियों को काफी खल रही है। हाल ही में एक यूथ इंटक के अध्यक्ष का न केवल ट्रांसफर किया बल्कि उनका डिमोशन कर आर्थिक नुकसान भी कर डाला। इसी तरह इसी यूनियन के एक और कोषाध्यक्ष को झांसी यूनिट का रास्ता दिखा दिया। अब यूनियन छोड़ चुके एक पूर्व महामंत्री निशाने पर है। वहीं ऐबू यूनियन के एक नेता को भी बंगलौर यूनिट भेज दिया। वह वापस आने की जुगाड़ में हैं। बीएमएस के एक नेता भी सोशल मीडिया फर्जी सर्कुलर वायरल करने में सजा पा चुके हैं। इन सब बातों को यूनियनों के प्रति वफादार कर्मचारी घबराने लगे हैं। यूनियनों में रहे या न रहे या फिर बागी हो जाये यह अलग बात है। लेकिन बड़े नेताओं की चुप्पी उन्हें परेशान किये हुए है। इसका असर अगले प्रतिनिधि यूनियन के चुनाव में दिखेगा।

नई प्रमोशन पॉलिसी कहीं खुशी कहीं गम

भेल की नई प्रमोशन पॉलिसी के आते ही जहां कुछ अफसरों के चेहरे लटक गये हैं वहीं कुछ के चेहरे पर खुशी की लहर है। दरअसल प्रमोशन पॉलिसी में कार्पोरेट ने डीजीएम से नीचे के अफसरों को दस फीसदी, डीजीएम से सीनियर डीजीएम 75 फीसदी, सीनियर डीजीएम से एजीएम और एजीएम से जीएम को सौ फीसदी नई प्रमोशन पॉलिसी में ट्रांसफर पर फैसला लेने की खबर है। चर्चा है कि अब जगदीशपुर यूनिट के एजीएम एस चन्द्रशेखर और मुंबई ईएमआरपी के सीनियर डीजीएम विनोदानंद झा के भोपाल आने के रास्ते खुलते दिखाई दे रहे हैं। वहीं भोपाल यूनिट से जो भी जीएम बनेंगे उन्हें हर हाल में बाहर की यूनिट में जाना ही पड़ेगा। इससे झांसी यूनिट के जीएम प्रवीश वाष्र्णेय, रानीपेट के जीएम रूपेश तेलंग, दिल्ली कार्पोरेट से जीएम बीके सिंह और संजीव कॉक के भोपाल आने के रास्ते लगभग साफ हो गये हैं।

सोसायटी में फर्जी मेंबरों की भरमार

भेल सहकारी उपभोक्ता भंडार के चुनाव में आठ हजार से ज्यादा मेंबर होने से काफी खलबली मच गई थी। अब नया संचालक मंडल इसकी सच्चाई खंगलाने में लगा है। खबर है कि इनमें से कई मेंबर लापता हैं तो कई भगवान को प्यारे हो गये। ऐसे मेंबरों को तलाशने का काम नये संचालक मंडल के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। यूं तो यह भंडार बीएचई एम्प्लाईज कॉ-आपरेटिव सोसायटी के नाम से जाना जाता है इसके रेग्युलर एम्प्लाईज महज 1100 ही हैं। ऐसे में रिटायर एम्प्लाईजों की तादाद काफी बताई जा रही हैं। फिलहाल नया संचालक मंडल तलाश रहा है कि आखिर वास्तव में इसके मेंबर हैं कितने। यहीं नहीं चार साल से संस्था को चला रहे सहकारिता विभाग के कार्यकाल में करीब 150 गैस सिलेन्डर गायब होने की जांच भी शुरू हो गई। चर्चा है कि कई घपलों की फाईल जिस कमरें बंद थी उसमें ताला जड़ दिया है।

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