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और बिना पास घुस गये कारखाने में

भोपाल

जब स्वाधीनता दिवस पर भेल कारखाने में कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किये जा रहे हैं तब ही शनिवार की दोपहर पौने एक बजे तीन अज्ञात लोग फाउन्ड्री गेट से एफसीएक्स विभाग के पब्लिक हेल्थ तक कैसे पहुंच गये यह चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल भेल स्कील डेव्हलपमेंट के एक कर्मचारी की पब्लिक हेल्थ के एक सुपरवाइजर की आपसी रंजिश के चलते यह मामला प्रकाश मेें आया। उक्त कर्मचारी ने तीन लोगों को अपने साथ लेकर बिना पास बनवाये धमकाने कारखाने के अंदर जा पहुंचा। उक्त सुपरवाइजर ने यह बात अपने वरिष्ठ अधिकारियों और सीआईएसएफ की विजिलेंस को भी की। लेकिन बजाय कार्यवाही करने के उन तीनों लोगों को कारखाने से बाहर भेज देना किसी के गले नहीं उतर रहा। यह मामला कितना सही है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि आखिर बिना पास बनवाये कड़ी सुरक्षा के बीच यह कारखाने में प्रवेश कैसे कर गये।

पचपन पार कर चुके अफसर परेशान

भेल जैसी महारत्न कंपनी के पचपन पार कर चुके अफसर काफी परेशान हैं। भेल कार्पोरेट ऐसे अफसरों की सूची बनाकर उन्हें रिटायरमेंट देने की तैयारी शुरू कर चुका है। चर्चा यह भी है कि ऐसे अफसरों का यह भी रिकार्ड खंगाला जा रहा है कि वह बीमार तो नहीं हैं और यदि बीमार नहीं है तो अपने कार्यस्थल पर सही ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं। कंपनी के पास यह भी रिकार्ड है कि कुछ अफसर इंजीनियर से लेक र भले ही और ऊंचे ओहदे पर पहुंच गये हो लेकिन एक ही यूनिट मेंं लंबे समय से जमे हैं उनको भी बाहर भेजने की कवायद शुरू हो गई है। चर्चा है कि प्रमोशन पाने वालों को भी बाहर की यूनिट का रास्ता दिखाये जाने को भी हरि झंडी मिल गई। इन सब बातों से कंपनी के अफसर न केवल परेशान है बल्कि अपने अफसरों से मुलाकात कर बचने की कोशिश कर रहे हैं।

जो चाहे वो करूं मेरी मर्जी

भेल कारखाने के महाप्रबंधक भले ही कितने ईमानदार हों लेकिन उनके आधीन काम करने वाले कुछ अफसर अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। चर्चा है कि इन अफसरों ने कुछ ठेकेदारों से इतनी सांठ-गांठ कर रखी है कि जब चाहे विभाग में बैठे देखे जा सकते हैैं। रही बात लाभ-शुभ की तो यह तो किसी से छिपी नहीं है। यहां तक ठेकेदारों ने इनके घर तक की पैठ बना ली है। हाल फि लहाल फेब्रीकेशन ब्लॉक 1 के प्लानिंग के एक इंजीनियर तो ऐसे हैं जो चाहे करूं मेरी मर्जी की तर्ज पर काम करूं। चाहे पीएमडी में नाम जुड़वाना हो, चाहे ठेके लेना हो इनके पास पहुंचते ही ठेकेदारों के काम आसानी से हो जाते हैं। चर्चा है कि चाहे जीएम साहब हो या फिर अन्य वरिष्ठ अधिकारी, ठेकेदारों से सांठ गांठ करने वाले इंजीनियर किसी की नहीं सुनते। फेब्रीकेशन विभाग के मामले में तो यहां तक कहा जाने लगा है कि यहां यह सालों से जमें हैं। इन्हें हटाने का साहस भेल प्रशासन ने कभी नहीं दिखाया।

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