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बिना टेस्ट बना डाली क्वाइल

भोपाल

भेल कारखाने के फीडर्स ग्रुप के टूल एण्ड गेज विभाग में सामान खरीदी की चर्चाएं खत्म ही नहीं हुई और सीआईएम विभाग में बिना टेस्ट कराये कॉपर से क्वाइल बनाने का मामला चर्चाओं में आ गया। विभाग के अफसरों की जितनी तारीफ की जाये कम नहीं है। चर्चा है कि विभाग के कुछ अफसरों ने लाखों के कॉपर (मटेरियल)को टीएसडी विभाग में बिना टेस्ट कराये क्वाइल बना डाली। इनके बनने के बाद जब क्वाइल टेस्ट होने टीएसडी पहुंची तब पता चला कि इसका कॉपर खराब है लिहाजा इसमें दोबारा क्वाइल बनाई जा रही है यानी यह कॉपर रिजेक्ट हो गया। ऐसा भी नहीं कि संबंधित अफसरों को क्वाइल बनने के पूर्व यहां के कर्मचारियों ने चेताया न हो लेकिन इसका असर किसी पर नहीं हुआ। इसका नुकसान भी भेल को ही भुगतना पड़ा। यह मोटरें एक बड़ी कंपनी को सप्लाई होनी थी।

भोपाल में नये ईडी के नाम की चर्चाएं तेज

जैसे-जैसे भोपाल ईडी के रिटायरमेंट का समय करीब आता जा रहा है वैसे-वैसे नये ईडी के आने की चर्चाएं तेज हो गई है। चर्चा है कि नॉन बीएचईएल नये चेयरमेन के आने के बाद भेल के अफसर यह नहीं समझ पा रहे हैं कि वह आखिर किसे भोपाल यूनिट का मुखिया बनाएंगे या फिर अपने मन पसंद का मुखिया बिठाएंगे। प्रशासनिक स्तर पर यह कहा जा रहा है कि इस यूनिट के प्रबल दावेदार राजीव सिंह, संजय गुलाटी और एके जैन के अलावा जनाब टीके बागची जैसे अफसर इस यूनिट की कमान संभाल सकते हैं लेकिन नये चेयरमेन के आने के बाद यह भी चर्चाएं तेज है कि वह प्रशासनिक क्षमता के धनी किसी भी कार्यपालक स्तर के अफसर को भोपाल यूनिट के लिए भेज सकते हैं। अगले माह ओएसडी के रूप में नये मुखिया इस यूनिट की कमान संभाल सकते हैं या उनके नाम की घोषणा हो सकती है।

प्रमोशन पॉलिसी बनी परेशानी

ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि भेल के अफसरों के प्रमोशन के बाद सौ फीसदी ट्रांसफर किये जायेंगे लेकिन भेल कार्पोरेट की इस नयी पॉलिसी से अफसर परेशान हैं, उस पर डीजीएम, सीनियर डीजीएम की प्रमोशन लिस्ट तक जारी नहीं हो सकी। रही बात दिल्ली, भोपाल और झांसी के अपर महाप्रबंधक स्तर के अफसरों की तो उनकी तो इन्टरव्यू की अगली तारीख तय ही नहीं हो सकी। इससे इन अफसरों में असमंजस की स्थिति ही नहीं बनी बल्कि उनका काम में भी मन नहीं लग रहा है। चर्चा है कि वह अपने आंकाओं को फोन लगाकर रोज पूछते नजर आते हैं कि साहब कब इन्टरव्यू होंगे और कब निकलेगी प्रमोशन लिस्ट। कुछ अफसरों ने तो अपने प्रमोशन के लिए दिल्ली के चक्कर लगाने भी शुरू कर दिये। ऐसे में कैसे प्रोडक्शन होगा यह चर्चा प्रशासनिक स्तर पर सुनी जा रही है।

सीनियर डीजीएम बनने की कतार में

भेल भोपाल यूनिट में कई अफसर प्रमोशन की कतार में खड़े हैं। स्थानीय प्रबंधन प्रमोशन में बेहतर परफार्मेंस तलाशने में लगा है। भले ही यूं तो यूनिट में 119 उप महाप्रबंधकों की फौज है लेकिन 2016 के 71 अफसर ही प्रमोशन की कतार में खड़े हैं खबर है कि इनमें से 24 ही प्रमोशन पा सकेंगे। चर्चा है कि यूनिट के करीब तीस काबिल डीजीएम की लिस्ट भोपाल यूनिट के पास है लेकिन कुछ ऐसे भी प्रमोशन पा जायेंगे जो काम कम और कंपनी में मजे ज्यादा मार रहे हैं। अब काबिल अफसरों में किसका पत्ता कटेगा यह तो प्रमोशन लिस्ट जारी होने के बाद ही पता चल पायेगा, या दबाव के चलते कोई नया नाम भी जुड़ जायेगा।

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