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भेल कर्मचारियों को कम पीपी बोनस मिलने से यूनियनें नाराज

भोपाल

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल)के कर्मचारियों को प्लांट परफार्मेंस बोनस कम मिलने से भेल की कुछ यूनियनें चल रही हैं। दरअसल ज्वाइंट कमेटी की बैठक में भेल की प्रतिनिधि यूनियनें कंपनी द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में बेहतर परफार्मेंस दिया था इसी आधार पर बोनस का निर्धारण होना था लेकिन कंपनी ने आर्थिक तंगी का रोना रोया तो प्रतिनिधि यूनियनों ने कम बोनस पर मुहर लगा दी।

जानकारों के मुताबिक कंपनी ने वर्ष 2014-15 में 30947 करोड़ का उत्पादन तो वहीं इसका प्राफि ट 2140 करोड़ हुआ था। इस समय कंपनी के पास मेन पॉवर 44950 था। पिछले वित्तीय वर्ष 2018-19 में कपंनी ने घाटे से उबरकर प्राफिट 2058 करोड़ तो उत्पादन 29350 करोड़ किया था। इस समय मेन पॉवर 35471 रह गया यानी 10 हजार कर्मचारी कम हुए। कंपनी ने 2014-15 में भेल कर्मचारियों को न्यूनतम 25 हजार और अधिकतम 40120 बोनस दिया था। वर्ष 2018-19 में कर्मचारियों को न्यूनतम 22500 और अधिकतम 26500 रूपये बोनस दिया गया। कर्मचारियों को कम बोनस दिया गया।

पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी ने न केवल बेहतर उत्पादन किया बल्कि घाटे में चल रही कंपनी को 2000 हजार करोड़ से ज्यादा के प्राफिट में लाकर खड़ा कर दिया। इस हिसाब से कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2014-15 के मुताबिक प्लांट परफार्मेंस बोनस मिलना था। कम बोनस मिलने के पीछे कहानी कुछ भी हो लेकिन यह माना जा रहा है कि कर्मचारियों के हक के लिए लडऩे वाली प्रतिनिधि यूनियनों ने ज्वाइंट कमेटी की बैठक में बिना स्टे्रेजिक प्लान कम बोनस पर हामी भर दी।

यह बोनस पिछले वित्तीय वर्ष का था न कि 2019-20 का। फस्र्ट क्वाटर में कंपनी को यदि घाटा भी हुआ है तो अभी तीन क्वाटर और भी होना है हो सकता है इस समय में कंपनी फिर से प्राफिट में आकर खड़ी हो जाये। कारण जो भी लेकिन कम बोनस मिलने से भेल की एचएमएस, भेल कर्मचारी ट्रेड यूनियन, एटक, सीटू जैसी यूनियनें नाराज बताई जा रही है।

बोनस की स्थिति
टर्न ओवर और प्राफिट की स्थिति
2014-15                               2018-19
टर्न ओवर   30947                29348 करोड़
प्राफिट        2140                  2158 करोड़
कर्मचारी    44950                  35471

आंकड़ों के खेल के चलते कर्मचारियों को कम बोनस दिया गया है। प्रतिनिधि यूनियनों ने कर्मचारियों के हित में प्रबंधन के सामने सही प्रस्तुतिकरण नहीं किया। इसका खामियाजा कर्मचारियों को कम बोनस के रूप में भुगतना पड़ा।
अमर सिंह राठौर, महासचिव, एचएमएस

2014-15 में कंपनी ने बेहतर परफार्मेंस किया था उस हिसाब से बोनस भी सही दिया गया लेकिन इसी तरह वर्ष 2018-19 में भी कंपनी ने टर्न ओवर और प्राफिट में छलांग लगाई लेकिन कंपनी ने यूनियनों को राजी कर कर्मचारियों को कम बोनस दिया गया जो सही नहीं है।
आरएस ठाकुर, अध्यक्ष, भेल कर्मचारी ट्रेड यूनियन

भेल के डीजीएम सीजे क्रिस्टोफर का तबादला
भेल भोपाल के मानव संसाधन विभाग में पदस्थ सीजे क्रिस्टोफर का तबादला भेल के साउथ रिजन पॉवर सेक्टर में किया गया है। यह आदेश शुक्रवार को भेल दिल्ली कार्पाेरेट के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कपूर ने जारी किये है। गौरतलब है कि श्री क्रिस्टोफर सालों से भेल भोपाल यूनिट में जमें हुए थे।

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