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एक जीएम आधे कारखाने के मालिक

भोपाल

भेल कारखाने में लगातार महाप्रबंधक स्तर के अफसरों की कमी होती जा रही है। कभी 22 थे अब 11 अफसर ही काम कर रहे हैं। अभी दो अफसरों को और रिटायर होना है लाजमी है ऐसे में भेल के मुखिया एक अफसर को तीन-तीन विभाग का काम देने को मजबूर हैं। चर्चा है कि ट्रेक् शन मोटर विभाग के मुखिया को पहले फीडर्स और अब ईएम विभाग का भी काम दे डाला। इसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई तरह की चर्चाएं हैं। विदेश से इलाज करा कर लौटे साहब पर प्रोडक् शन का इतना लोड बढ़ गया है कि इसे संभालना मुश्किल हो गया है यानी आधा कारखाना के भार अकेले साहब के ऊपर ही है उस पर स्वीचगियर और क्वालिटी के महाप्रबंधक भी रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में कहीं यह दो विभाग काम भी प्रभाव के चलते इन्हें दे दिया तो समझों पूरे कारखाने के मालिक बन जायेंगे। आगे देखना यह है कि होता है क्या?

प्लांट कमेटी की बैठक चर्चाओं में

चर्चा है कि भेल की प्रबंधन यूनियनों को खूबसूरत ढंग से खेल खिलाने में लगा है। करीब तीन साल के बाद हुई दूसरी मीटिंग भी निरस्त होने की खबर है। दरअसल आनन फानन में प्रबंधन ने 31 अगस्त को तीन नंबर यूनियन को बैठक में बुलाकर सबको परेशानी में डाल दिया। सबसे ज्यादा परेशान एक नंबर और दो नंबर यूनियन दिखाई दी। उन्होंने तो आरोप लगा दिया कि जब कोरम पूरा नहीं है तो बैठक कैसी। यहां तक कि तत्काल भेल कार्पोरेट में बैठक निरस्त करने की शिकायत तक कर डाली। चर्चा है कि कार्पोरेट के आदेश के बाद यह बैठक निरस्त हो गई। सवाल यह खड़ा हो गया कि सबसे अहम प्लांट कमेटी को मजाक क्यों बनाया जा रहा है या फिर तीनों यूनियनों के आपसी समन्वय का फायदा प्रबध्ंान उठा रहा है।

पांच साल के एचओडी पर गाज

भेल कार्पोरेट ने नई प्रमोशन पॉलिसी बनाकर भेल अफसरों को पहले ही परेशान कर डाला और अब कारखाने में काम कर रहे अपर महाप्रबंधक स्तर के एचओडी बने अफसरों पर गाज गिराना शुरू कर दिया है पहल तो अच्छी है लेकिन मलाईदार विभाग में बैठे अफसरों के लिए बुरी खबर है। यूं तो लंबे समय से बिजिलेंस गाइड लाइन का पालन पहले से नहीं हो रहा था बल्कि सालों से एक ही विभाग में जमें अफसर चांदी काट रहे थे। चर्चा है कि कार्पोेरेट गाइड लाइन ने पांच साल से एक ही विभाग में एचओडी बने अफसरों को बदलना शुरू कर दिया है। अब तक अकेले एमएम का काम संभाल रहे करीब दस अफसरों के विभागों में फेरबदल कर दिया है अब भेल कार्पोरेट ने कंपनी स्तर पर ऐसे अफसरों की सूची बनाना शुरू कर दी है जो सालों से न केवल एक ही विभाग में जमें बल्कि जिन्होंने बाहर की यूनिट की सूरत ही नहीं देखी। इनके लिए जल्द ही विभाग में फेरबदल के साथ अन्तरयूनिट तबादले की तैयारी भी शुरू हो गई है।

प्रमोशन के लिए चंदा वसूली

भेल में प्रमोशन पाने के लिए काबलियत और सिफारिश की जरूरत पड़ सकती है यह तो सुना है लेकिन इसके लिए ठेकेदारों से चन्दा वसूली करना पिपलानी सिविल में चर्चाओं का विषय बन गया है। चर्चा है कि यहां पदस्थ एक अफसर अपने प्रमोशन को लेकर काफी परेशान है वह हर हाल में इस बार प्रमोशन से नहीं चूकना चाहते हैं इसलिए उन्होंने अपने अंडर में काम कर रहे कुछ मालामाल ठेकेदारों से प्रमोशन के लिए चंदा वसूली का काम शुरू कर दिया है। इसको लेकर डरे हुए ठेकेदार कुछ कहने से तो कतरा रहे हैं लेकिन शाम 7 बजे तक साहब के केबिन में बैठकर उन्हें खुश करने में लगे हुए हैं। दबी जुबान से उन्होंने टाउनशिप में इस मुद्दे को बताना शुरू कर दिया है। ऐसा भी नहीं प्रमोशन के लिए परेशान साहब को यह सब पता न हो लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल डर नहीं है। अब यह अलग बात है कि वह चंदा किसको देेंगे।

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