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महाप्रबंधक को कोटा होगा कम

भोपाल

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) में अपर महाप्रबंधक से महाप्रबंधक स्तर के अफसरों के प्रमोशन में चांस कम करने की खबर जोरों पर है। इससे भेल के अफसरों की नींद हराम है। प्रशासनिक स्तर पर खबर है कि आर्थिक संकट के चलते कम्पनी यह बड़ा कमद उठा सकती है। इससे योग्य अफसरों को नुकसान की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। चर्चा तो यहां तक है कि जून माह में हो वाले अपर महाप्रबंधक से महाप्रबंधक स्तर के प्रमोशन तो दूर इसके साक्षात्कार भी नहीं हो सके। यही नहीं साक्षात्कार दे चुके उप महाप्रबंधक और वरिष्ठ उप महाप्रबंधक स्तर के अफसरों के साक्षात्कार होने के बाद भी प्रमोशन लिस्ट जारी नहीं हो सकी। पहली बार नये चेयरमैन के बनने के बाद भेल के अफसर काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं। वह तो यहां तक कहने लगे हैं कि आखिर इनके हक को क्यों मारा जा रहा है। अब अफसर इस बात का इंतजार भी कर रहे हैं कि इनके प्रमोशन में कोटा कम होता है या नहीं। फिलहाल भेल के डायरेक्टर मानव संसाधन बने साहब इनके हित में क्या करते हैं देखना बाकी है।

नेताजी के प्यारे साहब

भेल में यूनियन नेताओं और अफसरों के बीच पटरी बैठना बहुत ही मुश्किल बात है लेकिन भेल नगर प्रशासन विभाग के पिपलानी सिविल आपको इन दोनों के बीच गहरी दोस्ती देखने को मिल जाएगी। यही नहीं यहां के साहब देर रात तक नेताजी को खुश करने के लिए गपशप करते हुए नजर आएंगे। मजाल है कि नेताजी के चाहने वालों के काम पूरे न हों। एक सिविल अफसर उनके काम आधी रात को भी करने में देरी नहीं करते भले ही आम कर्मचारी का काम हो या न हो। नेताजी उनसे इतने खुश हैं कि भोपाल से लेकर दिल्ली कारपोरेट तक उन्हें संरक्षण देने से नहीं चूकते हैं। वैसे भोपाल यूनिट के मुखिया और मानव संसाधन विभाग भी सिविल में लाखों के भ्रष्टाचार की खबरों के बाद नेताजी के डर से खौफ खाये हुए हैं।

राजनीति की भेंट शॉप पालिसी

भेल के 1400 व्यापारियों की दुकानों को डबल स्टोरी का मामला हो या फिर शाप पालिसी राजनीति की भेंट चढ़ गये हैं। इसके लिए व्यापारियों ने कांग्रेस-भाजपा समर्थित संगठन बनाकर बड़े-बड़े ओहतों पर बिठाया लेकिन मामला वही ढाक के तीन पात। राजनीति में गुटबाजी के चलते अकेले नई शाप पालिसी वापस लेने का मामला 2011 से पेंडिंग है। धरने प्रदर्शन कर भेल प्रशासन को तो परेशान किया लेकिन केन्द्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय को नहीं हिला पाए। मजेदार बात यह है कि यहां भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं की वर्चस्व की लड़ाई में भेल के 1400 व्यापारी पिस रहे हैं। रही बात कुछ व्यापारी नेताओं की तो इनके नेता कांग्रेस में रहकार भाजपा नेताओं की गोद में बैठ गए हैं। चर्चा है कि पतली गली से भेल के आला अफसरों से भी हाथ मिला रहे हैं। एक नेता ने तो अकेले ही दर्जनों दुकानें भेल से आवंटित कराकर टाउनशिप में अतिक्रमण फैला रखा है। मजाल है कि भेल प्रशासन इन पर हाथ डाल दे। साफ है कि ऐसे में व्यापारियों के हितों के काम हों तो कैसे। अब तो कुछ व्यापारी भी कहने लगे हैं कि जब केन्द्र में सरकार भाजपा की है तो भी काम क्यों नहीं कराते नेता?

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