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ट्रैफिक फाइन पर अब महाराष्ट्र ने की ‘बगावत’, चुनाव पर नजर?

मुंबई

देशभर में नया मोटर वीइकल ऐक्ट 2019 प्रभावी हो गया है। हालांकि, चुनावी सरगर्मी इस कानून को पूरी तरह लागू नहीं होने दे रही है। जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ने से जनता की नाराजगी की संभावना को देखते हुए कई राज्‍य इस कानून को लागू करने में पीछे हट रहे हैं। अब महाराष्ट्र सरकार ने भी इस कानून के तहत लगने वाले जुर्माने की राशि पर केंद्र सरकार से पुनर्विचार करने की अपील की है। कांग्रेस शासित राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल सरकार ने भी इसे लागू करने से मना कर दिया है। गुजरात सरकार ने भी नियमों में बदलाव करते हुए जुर्माने की राशि घटा दी है।

आपको बता दें कि अगले कुछ महीनों में ही महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ शिवसेना और बीजेपी जनता को नाराज नहीं करना चाहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार फिलहाल इस कानून को लागू नहीं करेगी। राज्य सरकार की ओर से केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से इसपर पुनर्विचार करने की भी अपील की है।

महाराष्ट्र सरकार के परिवहन मंत्री दिवाकर राओते ने इस संबंध में नितिन गडकरी को पत्र भी लिखा है। पत्र में लिखा गया है, ‘नए मोटर वीइकल ऐक्ट में जुर्माने की राशि हद से ज्यादा बढ़ा दी गई है। हम केंद्र सरकार से अनुरोध करते हैं कि इसपर पुनर्विचार करें और जरूरी संशोधन करके जुर्माने की राशि को घटा दें।’

गुजरात ने घटा दी जुर्माने की राशि
इससे पहले गुजरात सरकार ने भी नियमों में बदलाव करते हुए जुर्माने की राशि घटा दी थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा है कि उनकी सरकार फिलहाल इस नियम को लागू नहीं करेगी। उनका तर्क है कि इससे राज्य की जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके अलावा कांग्रेस शासित राज्यों ने भी इस कानून को लागू नहीं किया है।

मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने कहा था कि वह इस संबंध में केंद्र सरकार से बात करेंगे। वहीं, राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार की ओर से कहा गया था कि राज्य सरकार लोगों को छूट देने पर विचार कर सकती है। बता दें कि नए कानून के मुताबिक, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर भारी भरकम जुर्माना पड़ सकता है।

गडकरी ने कहा, जिंदगी बचाना प्राथमिकता
इससे पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि लोगों की जिंदगी बचाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। उन्होंने कहा जुर्माने से मिली रकम राज्य सरकारों की ही मिलेगी। राज्य सरकार जुर्माना घटाने का फैसला कर सकती है और यह उनपर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ‘केंद्र का मकसद सड़क परिवहन को सुरक्षित बनाना है। अगर लोग नियमों का पालन करेंगे तो उन्हें जुर्माना भरने की जरूरत नहीं है। भारी-भरकम जुर्माने का मकसद जनहानि कम करना था।’

‘राजस्व बढ़ाना उद्देश्य नहीं’
गडकरी ने कहा था कि जुर्माना बढ़ाने का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम लोगों से कोई जुर्माना नहीं वसूलना चाहते हैं, सड़क सफर को सुरक्षित बनाना चाहते हैं। रोड हादसों के मामले में भारत का रेकॉर्ड विश्व में काफी खराब है। अगर लोग परिवहन नियमों का पालन करेंगे तो उन्हें कोई रकम देने की जरूरत नहीं है।’

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