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GDP अनुमान: कैसे खाए गच्चा, हैरत में पड़े RBI ने की समीक्षा

नई दिल्ली

पहली तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर के साढ़े छह साल के निचले स्तर पर पहुंचने पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को यकीन नहीं हुआ। जीडीपी दर में इतनी बड़ी गिरावट से इतनी हैरानी हुई कि उसे अपने पूर्वानुमान की पुनः समीक्षा तक करनी पड़ी। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि हमने जीडीपी दर के 5.8 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया था, लेकिन यह महज पांच फीसदी रहा, जो हमारे आकलन से काफी दूर है।

जीडीपी की दोबारा समीक्षा की
ईटी नाऊ को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘वास्तविक आर्थिक विकास दर के हमारे अनुमान से इतना दूर रहने के कारण हमें इस बात की समीक्षा करनी पड़ी कि आकलन में हमने कहां चूक की, जिसके कारण हम गलत साबित हुए।’ उन्होंने कहा, ‘अब हम जीडीपी का बेहद बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं। महंगाई दर का हमारा आकलन अब वास्तविक आंकड़े के लगभग समीप होता है। मार्जिन ऑफ एरर उल्लेखनीय रूप से घटा है। हम जीडीपी आकलन भी बिल्कुल सही-सही करना चाहते हैं।’

सुस्ती कब दूर होगी यह वक्त बताएगा
यह पूछे जाने पर कि विकास दर में आई सुस्ती कब दूर होगी, आरबीआई गवर्नर ने कोई समय-सीमा बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘हमें दूसरी तिमाही के आंकड़े को देखना होगा और इस पर गौर करना होगा कि आर्थिक सुस्ती आगे बरकरार रहेगी या नहीं।’ दास ने हालांकि कहा कि आरबीआई ने अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती की फरवरी में ही पहचान कर ली थी, जिसके बाद हमने नीतिगत ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (0.25%) की कटौती की थी।

बैंकों की ऑटोनोमी में हस्तक्षेप नहीं
उन्होंने कहा, ‘हमने अगस्त में ग्रोथ को उच्च प्राथमिकता दी थी। इसके बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे कि अर्थव्यवस्था को कुछ और बूस्ट करने की जरूरत है। इसलिए, हमने अगस्त में नीतिगत ब्याज दरों में 35 आधार अंकों (35%) की कटौती की।’ दास ने बैंकों के रिटेल लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्किंग से जोड़ने के आरबीआई के दबाव का बचाव किया। उन्होंने कहा, ‘हमने उनपर यह दबाव नहीं डाला कि उन्हें इंट्रेस्ट रेट कितना रखना है। उनकी स्वायत्तता में हमारा कोई हस्तक्षेप नहीं है। और अगर उनके पास कोई मसला है तो हम उन्हें सुनने और उसका समाधान करने के लिए हमेशा तैयार हैं।’

आर्थिक गतिविधियों पर करीबी नजर
आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘आर्थिक गतिविधियों पर करीबी से नजर रखी जाएगी, क्योंकि वित्त मंत्रालय द्वारा ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, एक्सपोर्ट तथा अन्य सेक्टर्स के लिए की गई घोषणाओं से रिकवरी को सहायता मिलने की उम्मीद है।’ उन्होंने कहा कि फिलहाल लगभग हर वैश्विक केंद्रीय बैंक नरम रुख अपनाए हुए है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इन बैंकों में सबसे पहले नरम रुख को अपनाया था।

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