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चिन्मयानंद: जेल में कभी चीफ गेस्‍ट, यूं कटी रात

शाहजहांपुर

कहते हैं कि समय बदलते देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही हुआ पूर्व केंद्रीय मंत्री और छात्रा के साथ रेप के आरोपी बीजेपी नेता स्‍वामी चिन्‍मयानंद के साथ। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री रहने के दौरान चिन्‍मयानंद शाहजहांपुर की जिस जेल में चीफ गेस्‍ट थे, उसी में उन्‍हें शनिवार को विचाराधीन कैदी के रूप में बेचैनी भरी रात गुजारनी पड़ी।

जेल प्रभारी राकेश कुमार ने हबातचीत में कहा, ‘जब चिन्‍मयानंद शुक्रवार को सुबह 11.35 बजे जेल में पहुंचे तो वह काफी निराश नजर आ रहे थे। चिन्‍मयानंद ने किसी से बात नहीं की। इससे पहले जब चिन्‍मयानंद सत्‍ता में थे, तब इसी जेल में चीफ गेस्‍ट के रूप में आए थे। हालांकि इस बार उनका स्‍वागत फूलों से नहीं बल्कि तलाशी से हुआ। चूंकि वह विचाराधीन कैदी हैं, इसलिए बैरक में ले जाने से पहले उनकी तलाशी ली गई।’

कुमार ने बताया, ‘चिन्‍मयानंद रात करीब 8.30 बजे सो गए और सुबह 3.30 बजे उठ गए। करीब एक घंटे तक चिन्‍मयानंद अपनी बैरक में टहले और बैरक के अंदर बनी टॉइलट में गए। बैरक सुबह 5.30 बजे खुल गई तब वह स्‍नान के लिए बाहर आए। चूंकि जेल के अंदर कोई मंदिर नहीं है, इसलिए चिन्‍मयानंद ने बरगद के पेड़ के नीचे पूजा की और सूर्य को जल चढ़ाया।’

‘जेल अनुभव के बारे में लिखने के मांगी पेन और डायरी’
जेल में खाने के बारे में पूछे जाने पर जेल प्रभारी राकेश कुमार ने कहा, ‘चिन्‍मयानंद ने दलिया खाया और उसके बाद चाय पी। अपने जेल के अनुभवों के बारे में लिखने के लिए चिन्‍मयानंद ने पेन और डायरी मांगी है। हम उन्‍हें यह जल्‍द ही दे देंगे।’ बता दें कि यूपी पुलिस के विशेष जांच दल ने शुक्रवार को चिन्‍मयानंद को उनके आश्रम से अरेस्‍ट किया था।

चिन्‍मयानंद को अदालत में पेश किया गया जहां से उन्‍हें 14 दिनों की न्‍यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एसआईटी ने साक्ष्यों और छात्रा के कलमबंद बयान के आधार पर स्वामी को आईपीसी की धारा 376-सी, 354-डी, 342 और 506 के तहत गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा चिन्मयानंद पर गलत तरीके से प्रतिबंधित करने (आईपीसी-342) और धमकाने (आईपीसी-506) की धाराओं में भी केस दर्ज है।

छात्रा और चिन्‍मयानंद के बीच 200 बार फोन पर बातचीत
इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी की जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि आरोप लगाने वाली छात्रा और चिन्‍मयानंद के बीच जनवरी 2019 से अगस्‍त महीने के बीच 200 बार फोन पर बातचीत हुई है। उधर, इन्‍हीं 8 महीनों के दौरान छात्रा और उसके साथ संजय के बीच 4200 से ज्‍यादा बार फोन पर बात हुई थी। आईजी नवीन अरोड़ा ने बताया कि एसआईटी ने हर जरूरी डिजिटल साक्ष्य, दोनों पक्षों के फोन कॉल डीटेल जुटाए। घटनास्थल, संस्थान, पीड़िता के घर और हॉस्टल से भी साक्ष्य एकत्र किए। गाड़ियों के मूवमेंट, टॉल टैक्स बैरियर, दिल्ली और राजस्थान के होटलों से सीसीटीवी फुटेज, बैंक और एटीएम से रकम निकालने से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए गए हैं।

रंगदारी की बात कबूली
एसआईटी के आईजी अरोड़ा ने बताया कि एफएसएल के जरिए दोनों पक्षों की तरफ से दिए गए विडियो की मिरर इमेज तैयार कर उनका विश्लेषण किया गया। तब जाकर एसआईटी ने दोनों पक्षों की तरफ से दर्ज करवाए गए मुकदमों की धाराएं तरमीम कीं। उन्‍होंने बताया कि छात्रा के तीनों साथियों संजय सिंह, सचिन सेंगर उर्फ सोनू और विक्रम ने स्वामी चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने की बात कबूली है। इन तीनों ने वायरल विडियो में खुद के होने की बात भी स्वीकार की है। एसआईटी ने तीनों को अपने पुलिस लाइंस स्थित अस्थायी कार्यालय से गिरफ्तार किया। एसआईटी 23 सितंबर को हाई कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

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