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दो करोड़ के ठेके में लाखों की हेराफरी, ठेकेदारों के बल्ले-बल्ले

भोपाल

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) टाउनशिप के एक सिविल अफसर की अनदेखी के चलते भेल को लाखों का चूना लग गया है। उन्होंने इस हेराफेरी में यह देखने की जरूरत ही नहीं समझी कि ठेकेदार ने कितना काम किया है या नहीं, यहां तक कि दो करोड़ के इस काम की जो शर्तें थीं उसका पालन भी हुआ है या नहीं।

सूत्रों के मुताबिक बरखेड़ा सिविल के अन्तर्गत भेल प्रशासन ने दो करोड़ की लागत से एक नया एसडी प्लांट के निर्माण का काम एक निर्माणकर्ता एजेंसी को सौंपा था। इस टेन्डर के मुताबिक सारा मटेरियल ठेकेदार को लगाकर भेल से भुगतान प्राप्त करना था। सूत्र बताते हैं कि एसडी प्लांट के निर्माण के समय संबंधित ठेकेदार ने कारखाने के भीतर रखा क्विंटलों से लोहा और अन्य सामान लेकर प्लांट के निर्माण में लगा दिया। जिसमें बेशकीमती गर्डर यानी चैनल तक का उपयोग किया गया। इसका रिकार्ड कारखाने के प्रवेश द्वार से मिल सकता है। बड़ी बात यह है कि इसका भुगतान भी ठेकेदार को लेबर रेट पर किया गया या फुल रेट पर किया गया। इसकी जांच की जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है।

ठेके में कारखाने का सामान बाहर लाने और लगाने की कोई शर्त न होने की बात भी सामने आई है। सूत्र बताते हैं कि टाउनशिप के सिविल विभाग ने कुछ अपने चहेते ठेकेदारों को मनमाने दर पर काम देने की नीयत से बंदरबांट शुरू कर दी। इससे भेल को लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन ठेकेदारों का काकस आपस में बैठकर ही एक सिविल अधिकारी की मिलीभगत से खुद ही रेट तय कर लेते हैं यहां तक कि अब यह कहा जाने लगा है कि खुद यह अधिकारी ठेकेदारों पर ज्यादा रेट डालने का दबाव बनाने लगे हैं। इससे यह साफ दिखाई दे रहा है कि कहीं न कहीं इनका लाभशुभ जुड़ा हुआ है।

नहीं बन पाई आधा किलोमीटर सड़क तक
सूत्र बताते हैं कि टेन्डर नियमों के मुताबिक पुराने एसडी प्लांट से नये एसडी प्लांट तक जाने के लिए नई सड़क बनाना जरूरी था लेकिन यह काम किया ही नहीं गया। इससे यहां आने जाने वाले कर्मचारी- अधिकारियों को कीचड़ में सनी सड़क से नये एसडी प्लांट तक पहुंचना पड़ता है। यह सब जानते हुए भी न तो भेल के वरिष्ठ अधिकारी और न ही सोई हुई भेल की विजिलेंस कोई कार्यवाही नहीं कर रही है।

रहवासी परेशान
दूसरी और भेल टाउनशिप के आवासों में रहने वाले कर्मचारी और अधिकारी भी चाहे चेम्बर चौक हो या फिर छत से पानी टपकता हो आदि कई परेशानियों से जूझ रहे हैं। आये दिन सिविल अफ सर से सुधार की गुहार भी लगा रहे हैं। ऐसी सैकड़ों शिकायतें होने के बाद भी भेल प्रशासन बजट न होने का रोना रोकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। जबकि भेल के नेताओं के दबाव में अपने चहेतों के आवास में सिविल अधिकारी कहां से बजट लेकर काम कराते हैं यह किसी के समझ में नहीं आ रहा है।

एसडी प्लांट के निर्माण के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। यदि कुछ गलत हुआ है तो संबंधित विभाग से जानकारी ली जायेगी।
राघवेन्द्र शुक्ला, अपर महाप्रबंधक, प्रचार एवं जन सम्पर्क विभाग, भेल

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