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एग्जिट पोल में हार, कश्मीर पर पलटेगी कांग्रेस?

नई दिल्ली

महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के सभी एग्जिट पोल्स इस बात को लेकर एकमत हैं कि बीजेपी शानदार तरीके से दोनों राज्यों में वापसी कर रही है। 24 अक्टूबर को नतीजे यही रहते हैं तो बीजेपी के लिए इन दोनों राज्यों में यह लगातार पहली जीत होगी जबकि एक समय इन राज्यों में कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था। लोकसभा के बाद विधानसभा चुनावों में भी प्रमुख विपक्षी दल कोई कमाल नहीं दिखा पाया।

एग्जिट पोल्स की मानें तो महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना को संयुक्त रूप से 166 से 244 सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं, 90 सीटों वाले हरियाणा में बीजेपी के खाते में 75 सीटें जा सकती हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस-NCP अलायंस का प्रदर्शन राज्य के पश्चिमी हिस्से में थोड़ा ठीक दिख रहा है। लेकिन यहां भी भगवा पार्टियों ने अपनी स्थिति में सुधार किया है। कई प्रभावशाली मराठा नेताओं के बीजेपी और शिवसेना में आने से अलायंस और भी मजबूत हुआ है।

हरियाणा में अगर एग्जिट पोल्स ही नतीजों में तब्दील होते हैं तो राज्य में न सिर्फ कांग्रेस बल्कि चौटाला के दोनों धड़ों और बीएसपी जैसे प्लेयर्स हाशिए पर आ जाएंगे। नतीजों से साफ हो जाएगा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की साफ-सुथरी छवि, कृषि, अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्टर और भर्तियों में पारदर्शिता की पहल को जनता ने स्वीकार किया है।

एग्जिट पोल्स में कुछ त्रुटियों की भी गुंजाइश रहती है। बहरहाल इन अनुमानों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष व गृह मंत्री अमित शाह काफी खुश होंगे क्योंकि इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सुस्त अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष के कैंपेन का जनता पर असर नहीं हुआ है। विपक्ष ने नौकरियों के जाने, कई सेक्टरों में निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर सरकार पर निशाना साधा था।

इन विधानसभा चुनावों में राष्ट्रवादी भावनाएं हावी रहीं और बीजेपी ने आर्टिकल 370, NRC और पाकिस्तान जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। बीजेपी की जीत से दोनों राज्यों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और हरियाणा के खट्टर के नेतृत्व पर भी मुहर लग जाएगी, जिन पर केंद्रीय नेतृत्व ने फिर से भरोसा जताया था।

अनुकूल नतीजे कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती जैसे सुधारों के साथ आगे बढ़ने के लिए मोदी सरकार को प्रोत्साहित करेंगे। दरअसल, आर्थिक मंदी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया था। 18 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू हो रहा है और ये नतीजे सरकार की इच्छाशक्ति को और भी मजबूत करेंगे और विवादास्पद कानून जैसे सिटिजनशिप अमेंडमेंड बिल और यूनिफॉर्म सिविल कोड पर आगे बढ़ा जा सकेगा।

कांग्रेस कश्मीर पर स्टैंड बदलने को होगी मजबूर?
खास बात यह है कि इससे जम्मू-कश्मीर के स्पेशल स्टेटस को खत्म करने का विरोध कर रही कांग्रेस के खिलाफ और पाकिस्तान के मुद्दे पर बीजेपी एक बेहतर स्थिति में आ जाएगी। दरअसल, 370 के फैसले के बाद ये पहला चुनाव है और जीत से जनता की मुहर भी लग जाएगी। उधर, हरियाणा में चुनावी रैलियों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया है कि वह सिंधु नदी का भारत के हिस्से का पानी पाकिस्तान में नहीं जाने देंगे। पड़ोसी मुल्क ने इसे ‘आक्रामक कृत्य’ करार दिया है।

एग्जिट पोल्स के नतीजे कांग्रेस के लिए और मुश्किलें बढ़ा देंगे। लोकसभा चुनाव में शर्मनाक हार और राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद से पार्टी को नेतृत्व संकट से जूझना पड़ा। आंतरिक कलह, दलबदल के बीच राफेल जैसे मुद्दों को फिर से हवा देना लोकसभा की तरह इस चुनाव में भी कांग्रेस के काम नहीं आया। इतना ही नहीं, दो राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बढ़ा देंगे कि वह जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार के स्टैंड का विरोध न करे और जनता की भावनाओं के हिसाब से अपना रुख तय करे।

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