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‘घोटाले’ पर इन्फोसिस हुआ सख्त, फंसेंगे CEO?

नई दिल्ली

दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने मंगलवार को कहा कि कंपनी की ऑडिट समिति सीईओ सलिल पारेख और सीएफओ निलांजन रॉय के खिलाफ व्हिसल ब्लोअर समूह द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच करेगी। खुद को ‘नैतिक कर्मी’ बताने वाले कंपनी के एक व्हिसल ब्लोअर समूह ने पारेख और रॉय के खिलाफ लघु अवधि में आय और लाभ बढ़ाने के लिए ‘अनैतिक कामकाज’ में लिप्त होने का आरोप लगाया है। उनकी इस शिकायत को कंपनी की व्हिसल ब्लोअर नीति के अनुरूप सोमवार को ऑडिट समिति के सामने रखा गया।

स्वतंत्र फर्म को जांच का जिम्मा
शेयर बाजार को दी सूचना में नीलेकणि ने एक बयान में कहा कि समिति ने स्वतंत्र आंतरिक ऑडिटर इकाई और कानूनी फर्म शारदुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी से स्वतंत्र जांच के लिए परामर्श शुरू कर दिया है। नीलेकणि ने कहा कि कंपनी के निदेशक मंडल के सदस्यों में से एक को 20 और 30 सितंब,र 2019 को दो अज्ञात शिकायतें प्राप्त हुईं थीं। कंपनी ने सोमवार को व्हिसल ब्लोअर की शिकायत को ऑडिट समिति के समक्ष पेश करने जानकारी दी थी।

क्या है शिकायत?
कंपनी के कुछ अज्ञात कर्मचारियों (व्हिस्लब्लोअर) ने आरोप लगाया है कि इन्फोसिस अपनी आय और मुनाफे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए अपने बही-खातों में हेरफेर कर रही है।

व्हिस्ल ब्लओर ने बोर्ड, SEC को लिखा पत्र
इन्फोसिस बोर्ड तथा यूएस सिक्यॉरिटी एक्सचेंज कमिशन (SEC) को लिखे गए एक पत्र में व्हिस्लब्लोअर ने सीईओ सलिल पारेख पर निशाना साधते हुए कहा है कि वह फाइनैंस टीम पर आंकड़ों के साथ हेरफेर करने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हम इन्फोसिस के कर्मचारी हैं और इस मामले में हमारे पास ई-मेल और वॉयस रेकॉर्डिंग हैं। हमें उम्मीद है कि बोर्ड इसकी तत्काल जांच करेगा और कार्रवाई करेगा।’

बड़ी डील में अनियमितता का आरोप
उन्होंने वेरिजॉन, एबीएन एमरो तथा जापान के जॉइंट वेंचर के साथ डील में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा है कि रेवेन्यू रेकॉग्निशन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के अनुरूप नहीं है। पत्र के मुताबिक, ‘अधिकतर डील में अनियमितता बरती गई है। सीईओ रिव्यूज और अप्रूवल्स की अनदेखी कर रहे हैं और सेल्स डिपार्टेमेंट को अप्रूवल के लिए मेल नहीं भेजने का निर्देश दे रहे हैं। बीती कुछ तिमाहियों में अरबों डॉलर के सौदे हुए हैं, जिसका मुनाफा शून्य रहा है। कृपया डील प्रपोजल्स, मार्जिंस और अघोषित अपफ्रंट कमिटमेंट्स तथा रेवेन्यू रेकॉग्निशन का ऑडिट कराएं। ऑडिटर्स के साथ सभी सूचनाएं साझा नहीं की गई हैं।’

ऑडिटर्स पर दबाव बनाया
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि ऑडिटर्स को बीती कुछ तिमाहियों में मुनाफे में सुधार के लिए वीजा पर आने वाले खर्चों को पूरी तरह स्वीकार नहीं करने के लिए कहा गया। पत्र के मुताबिक, ‘हमारे पास इस बातचीत की वॉइस रेकॉर्डिंग्स है। जब ऑडिटर्स ने विरोध किया तो मामले को स्थगित कर दिया गया।’ पत्र में सलिल पारेख पर बोर्ड को अंधेरे में रखने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि कुछ सदस्यों को ऑपरेशंस के बारे में थोड़ी बहुत ही जानकारी है।

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