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साहब की ठेकेदार के साथ पार्टनरशिप

भोपाल

भेल में एक अफसर ने मनमानी की हद इतनी पार कर दी है कि टाउनशिप में हर आदमी की जुबान पर उन्हीं का नाम हैं। एक नेता के इशारे पर चहेतों के काम करना तो जग जाहिर है लेकिन एक ठेकेदार से गुप्त रूप से ठेकेदारी में पार्टनरशिप की चर्चाएं भी थमने का नाम नहीं ले रही। ऐसा भी नहीं कि शीर्ष प्रबंधन को इसकी जानकारी न हो लेकिन वह छोटे इंजीनियरों का तबादला कर बड़े को बचाने में लगी है। ऐसा ही एक मामला भेल टाउनशिप पिपलानी का सामने आया है। एक ठेकेदार को अपने लाभ शुभ के चलते पिपलानी के साहब ने लाखों के काम दे डाले। अब वह ठेकेदार कर्मचारियों के आवासों में काम करे या न करे वह उसकी मर्जी। इस संबंध में कर्मचाारियों ने शिकायत तक कर डाली। कुछ मामले तो भेल की विजिलेंस के पास इन साहब के पेन्डिंग पड़े हैं। यह चर्चा है कि साहब की दोस्ती एक नेता से होने के कारण वह देर रात तक सिविल आफिस में ही बैठे रहते हैं। लगभग उन्हीं के इशारे पर टाउनशिप के सारे काम करते दिखाई देते हैं इससे दूसरी यूनियन के नेता भी परेशान हैं।

इलेक्ट्रिकल विभाग सिर्फ दो अपर महाप्रबंधक के भरोसे

भेल प्रशासन की जितनी तारीफ की जाये कम ही है। वर्क डिस्ट्रीब्यूशन के नाम पर सालों से इलेक्ट्रिकल विभाग में दो अपर महाप्रबंधक स्तर के अफसर के अलावा प्रबध्ंान को कोई तीसरा अफसर दिखाई ही नहीं देता। चर्चा है कि हाल ही में भेल टाउनशिप इलेक्ट्रिकल के अपर महाप्रबध्ंाक अर्नेस्ट बिलुंग का तबादला कारखाना इलेक्ट्रिकल कर दिया है और कारखाने के इलेक्ट्रिकल विभाग के अपर महाप्रबंधक को टाउनशिप भेज दिया। कहा जा रहा है कि यह दोनों ही अफसरों को तबादले के नाम पर अदला बदली कर दी जाती है। इससे लगने लगा है कि इतने बड़े इलेक्ट्रिकल विभाग में कोई तीसरा अफसर काबिल है ही नहीं। इसको लेकर भेल के यूनियन नेता भी परेशान हैं। रही बात इस विभाग के काबिल अफसरों की तो वह प्रबंधन की तबादला नीति की चर्चा करते नजर आते हैं। कहा जा रहा है कि बिलुंग के पहले टाउनशिप का काम महज अपर महाप्रबध्ंाक महेश इक्का संभालते थे फिर अर्नेस्ट बिलुंग को यह जवाबदारी सौंपी गई और पांच साल बाद फिर से श्री इक्का टाउनशिप वापस आ गये। यह कैसा फेरबदल है।

हनुमान जी की शरण में साहब

भेल नगर प्रशासन विभाग में एक अपर महाप्रबध्ंाक स्तर के आगमन के बाद उनकी हनुमान भक्ति की चर्चा विभाग में शुरू हो गई है। यूं तो वह धार्मिक प्रवृत्ति के माने जाते हैं और उनकी धर्म में आस्था भी सही है लेकिन ड्युटी समय में उनकी भक्ति वह भी आफिस के सामने हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना लोगों के गले नहीं उतर रहा है। यहां तक कि आफिस में पूजा पाठ में उलझे रहना आम आदमी के लिए परेशानी का सब्ब बनने लगा है। इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। अब तो लोग यह भी चर्चा करने लगे हैं कि जिन साहब को जो जवाबदारी सौंपी गई है उस काम में साहब का मन नहीं लगता। मामला धर्म की आस्था का है इसलिए लोग शिकायत करने से भी कतराते हैं। यूं तो वह जिस मंदिर में जाते हैं उसकी दर्जनों शिकायतें नगर प्रशासन विभाग में पहले ही हो चुकी है।

चौदह घंटे काम और केंटीन में खाना

नये ईडी की आमद और पुराने ईडी की विदाई को दस दिन बीत गये हैं। नये ईडी का सादगी भरा जीवन और काम के प्रति लगाव इस बात से ही समझ में आता है कि वह दस दिन से कारखाने में करीब 14 घंटे काम कर रहे हैं। लंच कारखाने के केंटीन में और डिनर गेस्ट हाउस में। पहाड़ जैसा उत्पादन का लक्ष्य भले ही नये ईडी के लिए चुनौती भरा हो लेकिन लक्ष्य पाने की ललक उनके कारखाने में 14 घंटे काम करने से साफ दिखाई दे रही है। कर्मचारी और नेता यह कहने लगे हैं कि लंबे समय से नंबर वन बनी भोपाल यूनिट इस बार भी नये साहब के रहते बनी रहेगी। चर्चा है कि नये साहब के पहले जो भी भेल के मुखिया रहे उनके दरबार में मिलने वालों की भीड़ रहती थी लेकिन यह साहब सिर्फ काम वालों से ही मिलने में ज्यादा भरोसा दिखाते हैं।

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