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भेल में विभागों का नहीं हो पा रहा सही वर्क डिस्ट्रीब्युशन

23 नवबंर को दो अफसरों के रिटायरमेंट के बाद सिर्फ 7 महाप्रबंधक ही संभालेंगे भेल कारखाने की कमान

भोपाल

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) भोपाल यूनिट में भले ही नये कार्यपालक निदेशक कार्यभार संभाल लिया हो लेकिन उत्पादन लक्ष्य पाने सिर्फ साढ़े चार माह से कम का समय बचा है उस पर अपर महाप्रबध्ंाक से महाप्रबध्ंाक पद के साक्षात्कार होने के बाद भी प्रमोशन लिस्ट जारी न होना कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई। दूसरी और उत्पादन की कमान संभालने वाले महाप्रबंधकों की संख्या लगातार कम होना परेशानी का सबब बना हुआ है। वहीं सही वर्क डिस्ट्रीब्युशन न होने से भी कंपनी अनुभवी अफसरों के अनुभव का लाभ कारखाने के विभिन्न शॉपों में नहीं ले पा रहे हैं। हालात कुछ ऐसे बन गये हैं कि महाप्रबध्ंाकों की संख्या कम होने के कारण एक को दो और तीन-तीन विभागों का काम संभालना पड़ रहा है।

कारखाने के महत्वपूर्ण विभाग क्वालिटी के महाप्रबंधक एमएस किनरा और स्वीचगियर के महाप्रबध्ंाक के माथुर 23 नवबंर को भेल से रिटायर होंगे। इस हिसाब से अब कारखाने में महाप्रबध्ंाकगण एके वाष्र्णेयए विनय निगम, पीके मिश्रा, विपिन मिनोचा, एमके श्रीवास्तव, एसएम रामनाथन और एमएल तौरानी ही शेष बचेंंगे। ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि जिस भोपाल यूनिट में 22 से 24 महाप्रबंधक हुआ करते थे वहां आज सिर्फ 7 महाप्रबध्ंक ही दिखाई दे रहे हैं। श्री वाष्र्णेय के पास टीपीटीएन के अलावा, फीडर्स, ईएम, पीके मिश्रा हाइड्रो, फेब्रीकेशन के अलावा मानव संसाधन विभाग तो श्री तौरानी थर्मल, एसएम रामनाथन पीएण्डडी, एमके श्रीवास्तव डब्ल्यूई और विनय निगम ट्रांसफ ार्मर का काम संभाल रहे हैं।

23 नवबंर के बाद दो महाप्रबंधक श्री किनरा और श्री माथुर भी रिटायर हो जायेंगे। एक बार फि र स्वीचगियर की कमान एमके श्रीवास्तव और क्वालिटी की कमान श्री मिनोचा को सौंपी जा सकती है, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि भेल की इस सबसे बड़ी यूनिट में उत्पादन में सबसे महत्वर्पूण भूमिका निभाने वाली शॉप में सिर्फ तीन महाप्रबंधकों के पास रह जायेगी। ऐसे में उत्पादन के साढ़े चार माह शेष रहते भारी भरकम लक्ष्य कैसे पूरा होगा। हालांकि नये कार्यपालक निदेशक की कार्यक्षमता से इंकार नहीं किया जा सकता।

यहां सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि अनुभवी अफ सरोंं की कमी और एक ही महाप्रबंधक को दो से तीन-तीन विभागों का अतिरिक्त भार उत्पादन लक्ष्य को पार करना मुश्किल काम दिखाई दे रहा है। वहीं ऐसे दर्जनों अपर महाप्रबध्ंाक स्तर के अधिकारी जो वर्क डिस्ट्रीब्युशन का शिकार हुए हैं। उन्हें अनुभव इंजीनिरिंग या डिजाईनिंग का है तो बिठा कहीं और रहे हैं। भेल टाउनशिप में तो मैनटेनेंस के स्पेशलिस्ट एजीएम सपन सुहाने को तो सिविल का काम दे रखा है। वहीं आईआईटी हाइड्रो जनरेटर बनाने वाले बीएस चौहान को टीएडी में भेज दिया है। इसी तरह कारखाने में भी अनुभवी अफ सरों के अनुभव का लाभ कंपनी नहीं ले पा रही है।

अनुभवी अफ सर दरकिनार, कैसे होगी उत्पादन की नैय्या पार
भेल कारखाने में अनुभवी अफसरों की कमी नहीं हैं लेकिन वर्क डिस्ट्रीब्युशन के चलते जो जहां है वहां बरसों से जमा है। इनके अनुभव का लाभ प्रबंधन नहीं ले रहा है। इंजीनियरिंग, डिजाइनिंग और सेल्स से जुड़े अफसरों को सही काम दिया जाये तो कंपनी को काफी फायदा पहुंच सकता है। हालांकि हाल ही में प्रबंधन ने कुछ अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों को विभागों में फेरबदल किया भी है फिर भी काफी अफसर अभी भी जमे हुए हैं।

यह हैं अनुभवी अपर महाप्रबध्ंक अफसर
नाम                    अनुभव                 यहां बैठे हैं
आलोक गुप्ता       सीईई                    क्यूटीआर
अमिताभ दुबे        एसटीई                 एचआरडी
अजस सक्सैना    एफ बीएम             एचआरएम
पी पांडा               डब्ल्यूटीएम            ईएसएच
मोहम्मद रशिद    एसटीएम             क्यूएफबी
अभिजित सिन्हा   एफ वायएम           टीएसडी
नीरज दवे             एसटीई                   सीडीई
वीके वर्मा            एलईएम               सीएमएम
एनके अजवानी आईएमएम           सीआरएक्स
ब्रजमोहन गोयल टीआरएम          एमआरएक्स
प्रदीप रावत        टीआरएम            एमआरएक्स
कमला उरांव      टीएक्सएम             एचआरडी
एके इम्तियाज  एसडब्ल्यूएम          सीएमएक्स
बिमलजीत सिंह डब्ल्यूटीएम             ईसीसी
एमआर डिंगरोचा एसडब्ल्यूएम       एससीएस
वायएस सिंह     आईएमएम           एलजीएक्स
जेआर प्रजापति एचसीएम             पीसीजी
एसके गुप्ता         एचजीएम          एसटीएस
विकास खरे         आईएमएम        टीईएक्स
कमलजीत सिंह   एचसीएम           एसडीएक्स
जे चटर्जी           डब्ल्यूटीएम          एचएसएस
शंकर नारायण    एसटीएम            आईएमएम
शरद मेहरोत्रा      टीएक्सएम            ईपीडी

इनका कहना है-
यह कंपनी का पॉलिसी मेटर है इसका फैसला भी दिल्ली कार्पोरेट को करना है, भोपाल यूनिट को नहीं।
शरीफ खान, उप महाप्रबंधक प्रचार एवं जनसम्पर्क विभाग

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