Tuesday , January 21 2020
Home / Featured / इतना प्रेशर? 5 साल में 7 हजार छात्रों ने छोड़ी IIT

इतना प्रेशर? 5 साल में 7 हजार छात्रों ने छोड़ी IIT

बेंगलुरु

पिछले पांच सालों में इंजिनियरिंग शिक्षा का ‘मक्का’ समझे जाने वाले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटीज) से कमोबेश 7,248 छात्रों ने बीच में पढ़ाई छोड़ दी है। यह जानकारी लोकसभा में पेश एक आंकड़े से हुई है। दरअसल मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईआईटीज) के छात्रों को एग्जिट ऑप्शन की सहूलियत देने के संबंध में बयान देते हुए यह आंकड़ा पेश किया।

क्या है एग्जिट ऑप्शन?
एग्जिट ऑप्शन का मतलब है कि छात्रों को दूसरे सेमेस्टर के बाद अपना कोर्स बदलकर बीटेक से बीएससी कोर्स लेने की अनुमति देना। कई बार छात्र किसी खास कोर्स का प्रेशर झेल नहीं पाते हैं। ऐसे में उनकी आसानी के लिए एग्जिट का ऑप्शन दिया जाता है ताकि वे अपनी सहूलियत के मुताबिक कोर्स का चयन कर सकें। जहां तक एग्जिट ऑप्शन की स्वीकार्यता की बात है तो आईआईटीज इसको लेकर तैयार हैं लेकिन कुछ आईआईआईटीज इस विकल्प को सही नहीं मानते हैं।

एचआरडी मिनिस्ट्री ने संस्थानों पर छोड़ एग्जिट ऑप्शन का फैसला
फिलहाल आईआईआईटीज के बीच में कोर्स छोड़ने वाले छात्रों का डेटा उपलब्ध नहीं है। कुछ महीने पहले आईआईटी काउंसिल ने एग्जिट ऑप्शन के चुनाव का फैसला सभी आईआईटीज के ऊपर छोड़ दिया था। उसके बाद 16 अक्टूबर को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के समन्वय मंच की बैठक हुई थी जिसमें एक प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव में आईआईआईटीज के बोर्ड ऑफ गवर्नर को एग्जिट ऑप्शन पर फैसला लेने का अधिकार दिया गया है। देश में मौजूदा समय में 24 आईआईआईटीज हैं जिनमें से 19 पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर चल रहे हैं।

IIITs हैं एग्जिट ऑप्शन के खिलाफ
कई आईआईआईटीज का मानना है कि देश के प्रमुख इंजिनियरिंग संस्थानों में बढ़ते ड्रॉपआउट रेट (बीच में पढ़ाई छोड़ने की दर) का हल एग्जिट ऑप्शन नहीं है।

आईआईआईटी-बेंगलुरु के निदेशक एस. सदागोपान ने कहा, ‘हम एग्जिट ऑप्शन नहीं लाना चाहते हैं क्योंकि इससे छात्र को लेकर एक गलत अवधारणा बनती है और किसी संस्थान से छात्रों के पढ़ाई छोड़ने जितना ही बुरा है। इसका दाग एक इंसान के साथ हमेशा लगा रहता है। एग्जिट करने की बजाय इन संस्थानों के शिक्षक पर भरोसा करना चाहिए। शिक्षक किसी संस्थान में लंबे समय से रहते हैं और वे जानते हैं कि किसी छात्र के लिए क्या सबसे अच्छा हो सकता है। हर छात्र के लिए कोई अलग-अलग फॉर्म्युला नहीं हो सकता है और हर संस्थान को अलग समाधान करने की जरूरत होती है।’

आईआईआईटी हैदराबाद ने भी एग्जिट ऑप्शन लाने की योजना को खारिज किया है। संस्थान के निदेशक पी.जे.नारायणन ने बताया ‘आईआईआईटी अपने सभी छात्रों के परफॉर्मेंस पर काफी गहरी नजर रखता है। खासतौर पर पहले साल के छात्रों पर। छात्रों को उनके पहले एग्जाम के बाद ही अतिरिक्त शैक्षिक सहायता मुहैया कराने के लिए हमारे पास व्यवस्था है।’ वैसे उन्होंने कहा कि एग्जिट ऑप्शन से उन छात्रों को राहत मिलेगी जो कठिनाई का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने बताया, ‘सरकार को एक वैकल्पिक डिग्री पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो चार साल का कोर्स कर रहे छात्र को तीन साल में वैकल्पिक डिग्री के साथ एग्जिट का ऑप्शन होना चाहिए। एग्जिट ऑप्शन पर गौर कर रहे संस्थानों को इन परिस्थितियों पर भी गौर करना चाहिए था और संतोषपरक समाधान जरूर निकालना चाहिए था।’

आईआईआईटी-पुणे के रजिस्ट्रार एस.एन.सपाली ने भी इसी तरह का विचार व्यक्त किया है। सपाली ने बताया, ‘हमारे छात्रों की बहुत ध्यान से निगरानी और मार्गदर्शन किए जाते हैं। हमारे छात्रों के लिए एग्जिट प्रोग्राम का ऑप्शन नहीं है।’मानव संसाधन विकास मंत्रालय का कहना है कि कई बार अच्छा जॉब ऑफर मिलने की वजह से भी पोस्टग्रैजुएट छात्र बीच में ही कोर्स छोड़ते हैं।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

IMF ने घटाया जीडीपी अनुमान, भारत के कारण दुनिया भी सुस्त

दावोस अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने सोमवार को भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनुमानित आर्थिक …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)