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अंतरिक्ष की राह में भटका यान तो ये कैप्सूल बचाएगा एस्ट्रोनॉट्स की जान

अंतरिक्ष की यात्रा बेहद खतरनाक होती है. अगर सबकुछ सही न हो तो अंतरिक्ष की यात्रा में शामिल एस्ट्रोनॉट्स को कैसे बचाया जाए, इसे लेकर अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेस एक्स (Space-X) ने नया अबॉर्ट मिशन (Abort Mission) किया. सफल रहे इस मिशन में जानूबझकर खराब रॉकेट से क्रू-ड्रैगन को सफलतापूर्वक बचाया गया. क्रू-ड्रैगन कैप्सूल (Crew Dragon Capsule) को स्पेस एक्स कंपनी ने बनाया है. इसमें बैठकर एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे.

परीक्षण अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित जॉन एफ कैनेडी स्पेस सेंटर से किया गया. क्रू-ड्रैगन को फॉल्कन-9 रॉकेट से लॉन्च किया गया. करीब 16 किलोमीटर की ऊंचाई पर जाने के बाद फॉल्कन-9 रॉकेट के इंजन बंद कर दिए गए.रॉकेट के 16 किलोमीटर की ऊंचाई पूरी करने में क्रू-ड्रैगन को सिर्फ 84 सेकंड लगे. इसके बाद धमाके के साथ रॉकेट को क्रू-ड्रैगन कैप्सूल को अलग किया गया. तत्काल क्रू-ड्रैगन में लगा इसका खुद का इंजन चालू हो गया.

करीब 10 सेकंड तक खुद आसमान में आवाज की गति से तेज उड़ने के बाद क्रू-ड्रैगन कैप्सूल नीचे की ओर आने लगा. इतनी ऊंचाई से नीचे गिरने में उसे करीब 9 मिनट लगे. फिर चार पैराशूट के जरिए उसने अटलांटिक महासागर के पानी में लैंड किया. 16 किलोमीटर की ऊंचाई से नीचे आकर वह अटलांटिक महासागर में गिरा. इसके बाद समुद्र में तैनात अमेरिकी नौसेना के जहाज से कैप्सूल को वापस लाया गया.

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने अब स्पेस मिशन के लिए यान बनाने बंद कर दिए हैं. उसने निजी कंपनियों को इस काम में लगाया है. नासा का स्पेस शटल प्रोगाम 2011 में ही बंद हो चुका है.नासा की इस अपील के बाद अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने स्पेस एक्स कंपनी बनाई. इसके बाद नासा ने स्पेस एक्स और बोइंग कंपनी को करीब 608 करोड़ डॉलर का काम दिया. बोइंग के परीक्षण विफल रहे थे. लेकिन स्पेस एक्स को लगातार सफलता मिलती चली गई.

फिलहाल नासा अपने अंतरिक्षयात्रियों को स्पेस स्टेशन पर भेजने के लिए रूस के सोयुज यान का उपयोग कर रही है. लेकिन यह बेहद खर्चीला साबित हो रहा है. अमेरिकी अंतरिक्ष विज्ञानियों की माने तो फॉल्कन रॉकेट को दोबारा उपयोग के लायक बनाया जा सकता है. यह रॉकेट इससे पहले तीन बार सफल उड़ान भर चुका है.

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