Friday , February 21 2020
Home / राष्ट्रीय / निर्भया की मां ने क्यों कहा एक-एक कर हो फांसी

निर्भया की मां ने क्यों कहा एक-एक कर हो फांसी

नई दिल्ली

निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस के एक दोषी पवन कुमार गुप्ता के अपराध के वक्त नाबालिग होने संबंधी दावे को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया। इसके बाद निर्भया की मां आशा देवी ने फांसी में देरी के लिए दोषियों द्वारा अपनाए जा रहे हथकंडों की आलोचना करते हुए मांग की है कि उन्हें ‘एक-एक करके फांसी’ दी जानी चाहिए।

‘…तब पता चलेगा कानून से खिलवाड़ का मतलब’
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आशा देवी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ‘दोषी द्वारा खुद को फांसी से बचाने की एक और कुटिल चाल नाकाम हो गई है। फांसी में देरी के लिए अपनाए जा रहे उनके हथकंडे को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। मैं तभी संतुष्ट होऊंगी जब उन्हें 1 फरवरी को फंदे पर लटका दिया जाएगा। जिस तरह फांसी को टालने के लिए वे तरह-तरह के तिकड़म कर रहे हैं, उसी तरह उन्हें एक-एक करके फांसी के फंदे पर लटकाना चाहिए ताकि वे समझ सकें कि कानून के साथ खिलवाड़ का क्या मतलब होता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि दोषी सुप्रीम कोर्ट में एक के बाद एक याचिकाएं दाखिल करके शीर्ष अदालत का समय बर्बाद कर रहे हैं।

दोषियों के याचिका दायर करने की तय हो समयसीमा: निर्भया के पिता
दूसरी तरफ, निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह दोषियों के याचिका दायर करने की समयसीमा तय करने के लिए गाइडलाइन जारी करे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से दोषियों द्वारा दायर की जाने वाली याचिकाओं की संख्या को सीमित करने को लेकर दिशा-निर्देश तैयार करने की सोमवार को अपील की ताकि महिलाओं को समयबद्ध तरीके से न्याय मिल सके।

निर्भया के पिता ने न्यूज एजेंसी भाषा से कहा, ‘यह खुशी की बात है कि अदालत ने उसकी (पवन गुप्ता) याचिका खारिज कर दी। लेकिन जब भी हमारे मामले से जुड़ी कोई याचिका अदालत में आती है, हमारी धड़कनें तेज हो जाती हैं। अंत में हमें सुखद समाचार ही मिलता है।’ चारों दोषियों पर याचिका दायर कर ‘सजा में देरी’ के लिए चाल चलने का आरोप लगाते हुए उन्होंने शीर्ष अदालत से दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा ताकि पीड़िताओं को समय से न्याय मिल सके।

‘सुप्रीम कोर्ट बेटियों के साथ इंसाफ के लिए जारी करे गाइडलाइन’
निर्भया के पिता ने कहा, ‘ट्रायल कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने 3 बार मामले को सुना है। सुप्रीम कोर्ट को कुछ विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर याचिकाएं दायर करने के लिए कुछ समयसीमा निर्धारित करना चाहिए। यह सिर्फ निर्भया के नहीं बल्कि हमारी अन्य बेटियों के लिए भी है। हम शीर्ष अदालत से दिशा-निर्देश तैयार करने का अनुरोध करते हैं ताकि निर्भया और अन्य बेटियों को समय रहते न्याय मिल सके।’

बता दें कि दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को चारों दोषियों- विनय शर्मा, मुकेश कुमार, अक्षय कुमार सिंह और पवन- की मौत की सजा पर एक फरवरी को अमल करने के लिये नए सिरे से जरूरी वॉरंट जारी किए थे। निर्भया के साथ 16-17 दिसंबर, 2012 की दरम्यानी रात में दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 6 व्यक्तियों ने सामूहिक बलात्कार किया और इसके बाद उसे बुरी तरह जख्मी हालत में सड़क पर फेंक दिया था। निर्भया की बाद में 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

शाहीन बाग: एक रास्ता खुला, 2 माह से परेशान लोगों को राहत

नई दिल्ली दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ धरने की …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)