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लखनऊ का ‘शाहीन बाग’: परीक्षा छोड़ आईं छात्राएं, कहा, यह ‘परीक्षा’ ज्यादा जरूरी

लखनऊ

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी प्रदर्शन जारी है। घंटाघर पर चल रहे प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए सोमवार को कुछ स्कूली छात्राएं भी पहुंचीं। छात्राओं ने बताया वे अपनी प्री-बोर्ड परीक्षा छोड़कर सीएए और एनआरसी के खिलाफ आवाज बुलंद करने आई हैं। बता दें कि लखनऊ में चल रहे प्रदर्शन में भी धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।

बारहवीं कक्षा की छात्रा नशरा ने कहा, ‘सोमवार को इंग्लिश की प्री-बोर्ड परीक्षा थी लेकिन हमने परीक्षा छोड़ दी।’ बताते चलें कि दिन चढ़ते ही घंटाघर पर स्कूली छात्राओं की संख्या बढ़ गई। जबरदस्त ठंड और कोहरे में छात्राओं ने ‘नो सीएए-नो एनआरसी’ के नारे लगाए। हाथों में तिरंगा लेकर प्रदर्शनकारी स्कूली छात्राओं और महिलाओं ने ‘संविधान बचाओ-देश बचाओ’ की शपथ ली।

‘परीक्षा छूटे तो छूटे, हमें कोई डर नहीं’
डालीगंज निवासी इकरा मॉडर्न स्टैंडर्ड इंटर कॉलेज में बारहवीं की छात्रा हैं। उन्होंने कहा, ‘परीक्षा छूटे तो छूटे, हमें कोई डर नहीं है। सबसे पहले हम इस कठिन ‘परीक्षा’ को अहमियत देंगे।’ जिक्रा सिद्दीकी सरकारी गर्ल्स स्कूल की छात्रा हैं। जिक्रा ने बताया, ‘सोमवार को स्कूल में इंग्लिश की प्री-बोर्ड परीक्षा थी। मैं परीक्षा देने नहीं गई। सरकार ने हमें ऐसी स्थिति पर लाकर खड़ा किया है।’

बारहवीं की ही छात्रा ज़ोया फारुकी सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं। उन्होंने कहा, ‘सरकार को जरूरत क्या थी सीएए और एनआरसी लाने की? आखिर हमारे साथ ही पक्षपात क्यों? जबतक हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, यहीं खुले आसमान के नीचे अनिश्चितकालीन प्रदर्शन जारी रहेगा। हम न ही स्कूल जाएंगे और न परीक्षा देंगे।’ सानिया शेख शिया पीजी कॉलेज में बारहवीं की छात्रा हैं। सानिया बताती हैं, ‘बोर्ड परीक्षा नजदीक है फिर भी हम प्रर्दशन में शामिल हैं। वजह है, इसीलिए हम चार दिनों से यहीं हैं। सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले में हम मुस्लिम समुदाय के बारे में नहीं सोचा गया है। हम हिंदुस्तानी हैं, फिर हमारे साथ ही पक्षपात क्यों?’

सीएए हुआ लागू, एनआरसी पर इंतजार करेगी सरकार!
आपको बता दें कि संसद के दोनों सदनों से पास होने और राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद सीएए की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इसका मतलब है कि अब यह कानून पूरी तरह से लागू हो गया है। यह कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए छह धर्मों के शरणार्थियों को नागरिकता देता है। वहीं, एनआरसी के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि अभी इसपर कोई चर्चा नहीं हुई है।

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