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4 साल में तीसरी बार नेपाल जाएंगे पीएम, सामने ये तीन चुनौतियां

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नई दिल्ली

भारत और नेपाल के रिश्तों में आई खटास को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को नेपाल जाएंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा वैसे तो धार्मिक बताया जा रहा है, लेकिन इसमें भी इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि दोनों देशों के बीच आई दूरी को कैसे कम किया जाए। नेपाल में चीन की पहुंच को कम करने के लिए मोदी सरकार पूरी कोशिश कर रही है। इसका सबूत यह है कि पिछले चार सालों में मोदी का यह तीसरा नेपाल दौरा होगा। वहीं, पिछले महीने नेपाल के पीएम केपी ओली शर्मा भी भारत आए थे। ऐसे में अब मोदी का जाना खास संदेश देता है।

दो दिन के अपने धार्मिक दौरे में मोदी जनकपर में जानकी मंदिर के दर्शन करेंगे और फिर मुक्तिनाथ जाएंगे। इसके साथ ही मोदी नेपाल के साथ कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट को मजबूती देने पर जोर भी देंगे। दोनों देश के प्रधानमंत्री मिलकर जलविद्युत परियोजना अरुण-3 की आधारशिला भी रखेंगे। भारत का ध्यान रक्सौल-काडमांडू रेल लिंक पर भी होगा जिसके लिए ओली से भारत दौरे के दौरान बात हुई थी।

सामने हैं तीन चुनौती
भारत-नेपाल के बीच फिलहाल तीन मुद्दों फिलहाल प्रमुख तौर पर देखे जा सकते हैं, जिनको लेकर रिश्ते खराब हो सकते हैं। पहला चीन से बढ़ती नजदीकी, दूसरा जलविद्युत परियोजना अरुण-3 के पास ब्लास्ट और तीसरा नोटबंदी के वक्त बंद हुए नोट।

ओली जल्द ही चीन जानेवाले हैं, ऐसे में देखना होगा कि नेपाल कहीं अपना विकास करने के लिए चीन को नया पार्टनर न बना ले। इसका अंदाजा गंडकी हाइड्रोपावर प्रॉजेक्ट पर लिए अगले फैसले से हो जाएगा। नेपाल ने अभी चीनी कंपनी को दिया गया ठेका कैंसल किया था, अगर यह फिर से दिया जाता है तो चिंता की बात होगी। भारत में नोटबंदी के बाद बंद हो गए 500-1000 के नोट नेपाल के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।दरअसल, वहां के बैंकों में बड़ी संख्या में ये नोट जमा हैं। उनका क्या किया जाए इसका फैसला लेने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय बैंक ऑफ नेपाल के बीच मीटिंग्स हुईं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

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