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‘860 घोड़ों’ पर पुतिन की एंट्री, 1991 के बाद पहली बार हुआ ऐसा

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65 साल के पुतिन को सोमवार को चौथी बार देश के राष्ट्रपति पद की शपथ दिलायी गयी. केजीबी अधिकारी से वैश्विक नेता बनने तक का सफर तय करने वाले व्लादिमीर पुतिन ने रूस पर अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ साथ विपक्ष को कमजोर किया और विदेशों में रूस की ताकत की नयी झलक भी दिखायी.

शपथ लेते वक्‍त पुतिन की एंट्री देखने लायक थी. इस इवेंट के लिए 1991 के बाद पहली बार राष्‍ट्रपति के लिए स्‍पेशल लिमोजिन तैयार करवाई गई थी. यह कार राष्‍ट्रपति के लिए रूस में ही तैयार की गई है. 860 ‘घोड़ों की शक्‍त‍ि’ यानी हॉर्सपावर वाली ये कार दुनिया में किसी भी राष्‍ट्रपति के लिए बनी सबसे बड़ी कार है. इसे रूस के सरकारी ऑटोमोबाइल संस्‍थान NAMI में तैयार किया गया है. इस कार का वजह लगभग 6 टन है.

पुतिन लगभग 20 सालों से रूस के लीडर हैं. आपको बता दें कि सोवियत संघ के विघटन के बाद एक दशक तक रूस में कानूनविहीन लेकिन अपेक्षाकृत मुक्त समाज रहने के बाद पुतिन ने उस पर दोबारा क्रेमलिन ( रूसी सत्ता का केंद्र ) की पकड़ मजबूत की. अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर उन्होंने तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल देखे और यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र का रूस में विलय कराकर एवं सीरिया में हस्तक्षेप कर पश्चिमी देशों के साथ एक तरह से नयी दुश्मनी की शुरूआत की है.

पिछले चार सालों से फोर्ब्स पत्रिका द्वारा दुनिया की सबसे ताकतवर हस्ती करार दिए जा रहे पुतिन जूडो में ब्लैक बेल्ट धारी नेता हैं. उन्होंने कभी साइबेरिया के जंगल में घुड़सवारी करते हुए बिना कमीज पहने तो कभी एक लुप्तप्राय प्रजाति के बाघ को शांत करने के लिए डार्ट से शूट करते तस्वीर खिंचायी और इस तरह अलग अलग तरीकों से खुद को खबरों में बनाए रखा है.

रूसी नेता के समर्थक उन्हें एक उद्धारक मानते हैं, जिसने कमजोर पड़ते देश में दोबारा गर्व एवं पारंपरिक मूल्य बहाल किए. दूसरी तरफ उनके विरोधी उन्हें एक ऐसा नेता मानते हैं जो देश को लोकतंत्र से और दूर ले गया और जिसने रूस में दोबारा गौरव की भावना भरने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा लिया.

सात अक्तूबर, 1952 को लेनिनग्राद ( अब सेंट पीटर्सबर्ग ) के एक साधारण परिवार में जन्मे पुतिन ने रूसी खुफिया सेवा केजीबी में शामिल होकर अपना बचपन का सपना पूरा किया था. बाद में सेंट पीटर्सबर्ग के मेयर अनातोली सोबचाक के अधीन काम करते हुए उनका राजनीति उदय शुरू हुआ.

रूस के लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित पहले राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के अधीन उन्हें क्रेमलिन में काम करने के लिए मॉस्को बुलाया गया.इसके बाद 1998 में उन्हें केजीबी की उत्तराधिकारी एजेंसी एफएसबी का प्रमुख बनाया गया. स्वास्थ्य एवं शराब के नशे की समस्याओं से जूझ रहे येल्तसिन ने अगस्त, 1999 में पुतिन को देश का प्रधानमंत्री बना दिया और चेचेन्या क्षेत्र में विद्रोहियों के दमन के लिए शुरू किए गए दूसरे युद्ध की देखरेख करने के साथ उनकी लोकप्रियता बढ़ गयी.

1999 के नव वर्ष से एक दिन पहले जब येल्तसिन ने सनसनीखेज तरीके से इस्तीफा दिया तब पुतिन दुनिया के सबसे बड़े देश के नये राष्ट्रपति बन गए.तब से वह राजनीति में और मजबूत होते चले गए. उन्होंने अपने निजी जीवन को हमेशा मीडिया की नजरों से दूर रखने की कोशिश की. तीन दशकों की शादी के बाद 2013 में उन्होंने पत्नी ल्यूडमिला को तलाक दे दिया लेकिन उनके नये प्रेम संबंधों की खबरें लगातार चर्चा में रहीं जिनमें एक पूर्व ओलंपिक जिम्नास्ट से संबंध शामिल हैं. हालांकि इनकी पुष्टि नहीं हुई.

संविधान के तहत निर्धारित प्रावधानों के कारण 2008 में दूसरा कार्यकाल पूरा करने के बाद पुतिन ने सत्ता की बागडोर अपने वफादार नेता दमित्री मेदवेदेव को सौंप दी और खुद प्रधानमंत्री बन गए. संविधान में संशोधन के बाद वह 2012 में फिर से राष्ट्रपति बने जिसे लेकर देश की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन पुतिन लगातार मजबूत होते रहे.

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