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अटल हाथ थाम लेते थे, मोदी हाथ मरोड़ने में विश्वास रखते हैं: पीडीपी नेता

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श्रीनगर

tariq-hameed-karaजम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने को लेकर बीजेपी-पीडीपी के बीच सबकुछ सुलझ नहीं पाया है। इस बीच पीडीपी के वरिष्ठ नेता और श्रीनगर से सांसद तारिक हमीद कारा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से करते हुए कहा कि दोनों की दिशा ही उलट है। इकनॉमिक टाइम्स के साथ इंटरव्यू में कारा ने कहा, ‘वाजपेयी डॉक्ट्रिन ‘हाथ थामने’ पर आधारित था, लेकिन मोदी का तरीका ‘हाथ मरोड़ने’ का है।’

कारा ने कहा कि बीजेपी और मोदी, दोनों ही ना तो कश्मीरियों की मानसिकता और ना ही कश्मीर की समस्या की जड़ में जो है, उसे ही समझ पा रहे हैं। वह यहीं नहीं रुके, कारा ने आगे कहा, ‘मोदी मॉर्डन डे अलेक्जेंडर द ग्रेट की तरह व्यवहार कर रहे हैं जो ताकत के बल पर लोगों का दिलोदिमाग जीतना चाहता है।’

पीडीपी नेता ने कहा कि वाजपेयी का सिद्धांत हाथ थामने का था, जबकि मोदी हाथ मरोड़ने में विश्वास रखते हैं। कारा ने कहा कि यह नीति जम्मू-कश्मीर में काम नहीं कर सकती। कश्मीरी इसके खिलाफ दिलोजान से लड़ेंगे। कारा ने कहा कि मोदी के लिए पार्टी का हित सबसे ऊपर है जबकि वाजपेयी के लिए राष्ट्र का हित सर्वोपरी था।

पीडीपी-बीजेपी गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसे तीन स्तर पर सुलझाया जा सकता है- शासन का अजेंडा, सरकार का काम-काज और कश्मीर के मूल मुद्दे। मुझे लगता है कि जिन बातों पर सहमति बनी थी, वे लागू नहीं हुए और जो नहीं किया जाना था, वही हुआ।

ऐसा कैसे? इस सवाल पर कारा ने कहा, पहले ही दिन पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने आर्टिकल 370 का मुद्दा उछाल दिया। बाद में धारा 370 के खिलाफ पीआईएल भी दाखिल कर दी गई। फिर आर्टिकल 335 (ए) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई। उसके बाद झंडे और बीफ आदि से जुड़े मुद्दे आए। ये सब चीजें नहीं होनी चाहिए थीं, लेकिन हुईं।

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