Home भेल न्यूज़ भेल के सुपरवाइजर व यूनियन कार्यालय में लगे ताले

भेल के सुपरवाइजर व यूनियन कार्यालय में लगे ताले

भेल को उठाना पड़ रहा है बिजली, पानी और टेलीफोन का खर्च

भोपाल

18 Bhel 2भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड भेल भोपाल यूनिट के कई सुपरवाइजर व यूनियन कार्यालय में ताले लटके हुए हैं। इस कारण बिजली, पानी और टेलीफोन का खर्च भेल को उठाना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि कई कार्यालय तो महीने में एक-दो दिन खुलते हैं और कई तो सालों से बंद पड़े हुए हैं। यही नहीं कई कार्यालयों का आवासीय तौर पर खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि भेल प्रबंधन को इस बात की भनक नहीं है, लेकिन यूनियन पदाधिकारियों के प्रभाव के चलते वह कोई भी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।

यही नहीं कुछ यूनियन कार्यालय खुलते तो हैं, लेकिन देर रात तक खुले रहने के कारण आसपास के रहवासियों को काफी परेशानी होती है। गौरतलब है कि भेल की कई यूनियन के पदाधिकारी अपने दफ्तरों का महज औपचारिक तौर पर उपयोग कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ यूनियन कार्यालय तो महीने में एक या दो बार ही खुलते हैं। वहीं कुछ पर तो पूरे साल ताला टंगा दिखाई देता है। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कार्यालय सिर्फ नाम मात्र के ही हैं। इसका उपयोग अन्य लोगों द्वारा किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक वर्ष 1977 में भेल की प्रतिनिधि यूनियन के चुनाव के बाद सिर्फ प्रतिनिधि यूनियन इंटक के पास पिपलानी में स्थित कार्यालय था। बाद में भेल प्रबंधन ने एचएमएस, बीएमएस, सीटू और एटक को भी चुनाव में एक सीट हासिल करने पर कार्यालय खोलने की अनुमति दे दी। उस समय भेल की इन पांच यूनियन के पास ही कार्यालय थे। वर्ष 2010 में दोबारा प्रतिनिधि यूनियन के चुनाव हुए जिसमें भेल कर्मचारी ट्रेड यूनियन को एक सीट हासिल करने के बाद पिपलानी में कार्यालय खोलने की अनुमति दी गई थी।

वर्ष 2016 में फिर से हुए प्रतिनिधि चुनाव के बाद आल इंडिया भेल एम्पलाईज व बीएमएस को प्रबंधन ने यूनियन की गतिविधियां संचालित करने के लिए ऑफिस आवंटित किये। बीएमएस के पास पहले से ही यूनियन चलाने के लिये गोविन्दपुरा में आवास आवंटित है लेकिन प्रबंधन ने दबाव के चलते दो एन4 बंगले आवंटित कर दिये। जिसमें करीब ढाई लाख रूपये सिविल विभाग में अतिरिक्त खर्च कर डाले। कुछ यूनियन ऑफिसों में टीवी , फ्रिज, एयरकंडीशन, कम्प्युटर, टेलिफोन के आलावा मुफ्त की पानी-बिजली की सुविधा भी दी गई है। यहां तक कि आफिस के गार्डन व साफ-सफाई का काम भी भेल के श्रमिक करते नजर आते है।

कई सुपरवाइजर व यूनियन के पदाधिकारी द्वारा कार्यालयों का प्रबंधन की मंशा के अनुरूप उपयोग नहीं किया जा रहा है। कंपनी गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है ऐसे में कम से कम इन ऑफिसों पर होने वाली फिजूल खर्ची तो कम की जा सकती है।स्थानीय प्रबंधन को सोचना होगा कि आखिर बंद यूनियन के कार्यालयों पर हो रहे खर्च को कैसे बचाया जाए। देखने में यह आ रहा है कि कतिपय यूनियने सुविधा भोगी बनकर रह गई है।

कहां-कहां है भेल की यूनियन के कार्यालय
1. इंटक, सुभाष नगर
2. एचएमएस, पिपलानी
3. केटीयू, पिपलानी
4. बीएमएस, गोविंदपुरा
5. सीटू, पिपलानी
6. एटक, गोविंदपुरा
7. भेल सुपरवाइजर्स संघ, बरखेड़ा
8. भेल सुपरवाइजर्स एकता मंच, पिपलानी
9. भेल जूनियर एक्सजीक्यूटिव एसोसिएशन, बरखेड़ा
10. एससी/एसटी वेलफेयर एसोसिएशन, बरखेड़ा
11. भेल अनुसूचित जाति एसोसिएशन, गोविंदपुरा
12. भेल अनुसूचित एसोसिएशन, पिपलानी
13. इंटक, पिपलानी

चुनाव जीतते जाओ ऑफिस लेते जाओ
भेल में प्रतिनिधि यूनियन के चुनाव की रस्म वर्ष 2010 से शुरू हो गई है इसके पूर्व गिनी चुनी यूनियनों को प्रबंधन कार्यालय मुहैया कराता था। लेकिन अब हर 5 साल में चुनाव होंगे जो यूनियन जीतेगी उसे कार्यालय आवंटन के साथ प्रबंधन मुफ्त मे सुविधाए प्रदान करता रहेगा , इस तरह हारने वाली यूनियन का कब्जा भी बरकरार रहेगा। पिछले साल हुए चुनाव में यह नजारा देखने को मिला। चुनाव लड़ते समय जिन यूनियनों ने शपथ-पत्र देकर भेल प्रबंधन को लिखा था कि चुनाव हारने के बाद हम अपने कार्यालय बंद कर देंगे वह आज भी अपने कार्यालय में जमें हुए है। नेताओं के बड़े आकाओं ने कार्पोरेट पर दबाव बनाकर खाली होने से बचा लिया । यूनियनें आपसी समझौता करने में कामयाब हो गई, यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी, ऐसा जानकारों का मानना है।

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