Home मिर्च- मसाला मामला 3 करोड़ के टेन्डर का

मामला 3 करोड़ के टेन्डर का

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भोपाल

भेल प्रबंधन की जितनी तारीफ की जाये कम है। 6 माह पहले भेल उद्योग नगरी के आवासों की पुताई के 3 करोड़ का ठेका आनन-फानन में कर डाला। भले ही कुछ ठेकेदार इस ठेका का लेने के पात्र हो लेकिन उन्होंने इस मामले की शिकायत भेल कार्पोरेट और सीवीओ तक कर डाली। ठेका तो निरस्त नहीं हुआ लेकिन प्रबंधन के अक्लमंद अफसर दीपावली करीब आने के बाद भी किसी दबाव के चलते इस ठेके की फाईल दबाए बैठे है।

हद तो तब पार हो गई जब नगर प्रशासन विभाग के दो अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी साफ सुथरी छवि होने के बाद भी कुछ ठेकेदारों के कहने पर इस टेंडर को निरस्त कराने शराब और कबाब की पार्टी में शामिल हो गये, इसकी चर्चा भेल नगर प्रशासन और सभी सिविल आफिसों सुनी जा सकती है। यहीं नहीं एक वाटर सप्लाई के अधिकारी इस पार्टी में जमकर आनंद लेते रहे। अब ठेका निरस्त हो या न हो लेकिन महाप्रबंधक एचआर इस फाईल पर हां-ना करने से कतरा रहे हैं। चर्चा है कि भेल कर्मचारी इस पुताई के टेंडर से काफी परेशान है तो दूसरी और प्रबध्ंान फैसला करने में अक्षम दिखाई दे रहा है। यह मामला काफी चर्चाओं में है।

एक अफसर पर प्रबंधन मेहरबान

सीबीआई जांच में घिरे भेल के एक अफसर भले ही चार्ज शीट थमा दी गई हो लेकिन प्रबंधन आजकल उन पर काफी मेहरबान दिखाई दे रहा है। चर्चा है कि या तो इस अफसर ने प्रबंधन पर दबाव बनाकर अपने फायदे के विभाग पा लिया, या फिर आगे भी फायदा लेने की ठान ली है। मामला एक सीएमजी विभाग के अफसर से जुड़ा हुआ है। आजकल साहब ने उन्हें सेन्ट्रल प्लानिंग विभाग का भी सौंप दिया है यहीं नहीं वह अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के लिए बनी कमेटी में नोडल अफसर बना डाला। यह किसी के गले नहीं उतर रहा है कि उन्हें विश्वकर्मा जयंती के मौके पर बनी कमेटी में भी जज बना डाला। यह बात किसी को हजम नहीं हो रही कि आखिर प्रबंधन उन पर कैसे मेहरबान हो गया। कहीं इस दागी अफसर पर मेहरबानी प्रमोशन में तब्दील न हो जाये ऐसी प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं है। इधर राजभाषा एचआर में भी एक महिला अधिकारी और एक अन्य अधिकारी में वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी हुई है। चर्चा है कि प्रबंधन एक अन्य अधिकारी पर कुछ ज्यादा ही मेहरबानी दिखा रहा है इससे दु:खी होकर महिला अधिकारी ने भेल के मुखिया से शिकायत तक कर डाली। अब लोग कहने लगे है कि आखिर यह सब क्या हो रहा है।

भेल के कस्तूरबा अस्पताल के दलाल

जब से कस्तूरबा अस्पताल नये मुखिया की पोस्ंिटग हुई है तब से उनका दिल भोपाल में कम और हरिद्वार में ज्यादा लगा है। इसके चलते महंगी दवाओं की हेरा-फेरी फर्जी तरीके से किये जाने की चर्चाएं थम नहीं रही है। शनिवार को हुई मिनी ज्वाइंट कमेटी की बैठक में एक यूनियन प्रतिनिधि ने यह शिकायत भेल के मुखिया से कर ही डाली। मामला कुछ इस तरह का है कि लोकल परचेज की महंगी दवा मेडिकल बुक चुराकर उस पर दवाईयों के नाम चढ़ाकर डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर कुछ दलाल दवा वितरण केन्द्र से लेने से बाज नहीं आ रहे हैं। मामले का खुलासा तब हुआ जब इस केन्द्र के एक फार्मासिस्ट ने दवा देते समय इस बुक पर डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर देख लिये। जैसे ही उसने दलाल को दवा देने से मना किया तो वह भाग खड़ा हुआ। इधर 10 अक्टूबर को अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के संसदीय दल के भोपाल आगमन से जुड़ी चर्चाएं भी थमने का नाम नहीं ले रही है। एक प्रतिनिधि यूनियन ने सरकार से शिकायत करने का मन बना लिया है कि जब भेल आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है तो फिर फिजूल खर्ची करने की क्या जरूरत आन पड़ी। जब भेल भोपाल यूनिट के पास सांची-नर्मदा में वीआईपी 60 और क्षितिज गेस्ट हाउस में 120 रूम है तो ऐसे में संसदीय दल व अन्य को महंगे होटल में क्यों रूकवाया जा रहा है।

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