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CPEC: चीनी नागरिक की हत्या खतरे की घंटी?

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कराची

पाकिस्तान में पिछले दिनों हुई चीनी नागरिक शेन झू की हत्या ने एक बार फिर पाकिस्तान में विदेशी नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही हजारों डॉलर्स की लागत से बन रहे चीनी प्रॉजेक्ट्स और उसके लिए वहां काम कर रहे हजारों चीनी नागरिकों की सुरक्षा भी सवालों के घेरे में आ गई है। यह पहली बार नहीं है जब चीन के नागरिकों को पाकिस्तान में निशाना बनाया गया है, लेकिन इतनी असुरक्षा और डर का माहौल पहले कभी नहीं रहा। हालांकि चीन ने पाकिस्तान से कहा है कि वह उसके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, लेकिन चीनी नागरिक अब भी अपनी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।

ब्लूमबर्ग में छपी खबर के मुताबिक, पाकिस्तान की सबसे बड़ी सिक्यॉरिटी कंपनी पाथफाइंडर ग्रुप के चेयरमैन और पूर्व सेना अधिकारी इकराम सहगल ने कहा, ‘जहां तक चीनी नागरिकों का सवाल है, उन्हें जो खतरा महसूस हो रहा है, लगता नहीं कि वह कम होगा।’ उन्होंने कहा कि यह हमला लक्षित था और इससे पाकिस्तान आने वाले चीनी व्यापारियों के भरोसा को झटका लगेगा।

चीन की सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अगस्त तक कम से कम 20,000 चीनी नागरिक पाकिस्तान में काम के सिलसिले में आ चुके हैं। पाकिस्तान के सुरक्षाबलों के लिए इन लोगों को सुरक्षा देना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। खास तौर पर कराची में मारे गए शेन झू जैसे लोगों के लिए, जो चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के बाहर काम करते हैं। खास बात यह है कि पाकिस्तान की सेना ने CPEC प्रॉजेक्ट्स को सुरक्षित रखने के लिए 15,000 सैनिकों की एक अलग फोर्स तैयार की है। अलग फोर्स बनाने के बावजूद चीनी नागरिकों को सुरक्षा देने में नाकाम पाकिस्तान अपनी आदत के मुताबिक भारत पर मनगढंत आरोप लगा रहा है।

अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चीन भी अब पहले से कहीं ज्यादा मुखर हो गया है। चीन में अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार और पूर्व नौकरशाह वांग ईवाय ने कहा, ‘वन बेल्ट वन रोड प्रॉजेक्ट जिन देशों के होकर गुजरेगा, उनमें से कई देश राजनीतिक तौर पर अस्थिर हैं और वहां कई तरह के जोखिम हैं। पाकिस्तान भी उन्हीं में से एक है। चीन के प्रॉजेक्ट्स और नागरिकों को उस तरह की पुख्ता सुरक्षा की जरूरत है जैसी पश्चिमी देशों में मिलती है।’

याद दिला दें कि बीते साल पाकिस्तान के क्वेटा में दो चीनी नागरिकों का अपहरण कर हत्या किए जाने की घटना हुई थी। ईसाई मिशनरी से जुड़े होने के आरोप में इनका कत्ल किया गया था। इस घटना के बाद पूरे चीन में पाकिस्तान में काम कर रहे लोगों के प्रति चिंता जताई गई थी। इसके बाद से ही पाकिस्तान सेना ने अपने देश में काम कर रहे चीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए अलग दस्ते का गठन किया था।

कराची में व्यापारी वर्ग भी चीन के नागरिकों को निशाना बनाए जाने को लेकर चिंतित है। व्यापारियों ने भी मांग की है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। पिछले सप्ताह पाकिस्तान ने मुख्य बिजनस अखबार बिजनस रिकॉर्डर में छपे संपादकीय का शीर्षक था- चीन के समर्थन को हल्के में न लिया जाए।

गौरतलब है कि अमेरिका से रिश्तों में आई कड़वाहट के बीच पाकिस्तान अब पूरी तरह चीन की मेहरबानी पर निर्भर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले महीने पाकिस्तान को दी जाने वाली करोड़ों की सैन्य सहायता पर रोक लगा दी थी। यह रोक ऐसे वक्त में लगाई गई जब पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार की हालत खस्ता है। अमेरिका ने पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को पालने-पोसने का आरोप लगाते हुए यह कार्रवाई की थी।

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