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HWL 2017 फाइनल: बेल्जियम को हराकर SF में भारत

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भुवनेश्वर

यहां रफ्तार थी। स्किल था। जोश था। जुनून था। यहां सांसें थामने वाली हॉकी थी। हॉकी वर्ल्ड लीग क्वॉर्टर फाइनल में भारत और बेल्जियम के बीच खेला गया मैच जिसने भी देखा वह तालियां बजाए बिना नहीं रह पाया। भारत ने शूटआउट में बेल्जियम को 3-2 से हराकर दूसरी बार हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल के सेमीफाइनल में जगह बनायी। फुलटाइम तक दोनों टीमें 3-3 तक बराबर थीं। इसके बाद मैच शूटआउट में गया जहां दोनों टीमें पांच में से 2-2 मौके भुना पाईं। इसके बाद मैच सडन डेथ में गया। कप्तान हरमप्रीत सिंह ने भारत की ओर से गोल किया और इसके बाद आकाश चितके ने बेल्जियम का प्रहार रोककर भारत को जीत दिला दी।

भारतीय हॉकी टीम अब हमले रोकती नहीं। हमले करती है। वह अपने खेल से चौंकाती है। बुधवार को भी ऐसा ही हुआ। ग्रुप बी में सबसे निचले पायदान पर रही भारतीय टीम ने इस करो या मरो मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाया। भारत के सामने ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट बेल्जियम की मजबूत टीम थी। दुनिया की तीसरे नंबर की टीम अपने ग्रुप ए में टॉप पर रही थी। भारत ने जहां ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ड्रॉ खेला था वहीं इंग्लैंड और जर्मनी के खिलाफ उसे हार का सामना करना पड़ा था और आज बेल्जियम के खिलाफ तो उसके खेल अलग ही स्तर का था।

पहले हाफ में भारतीय टीम ने बेल्जियम के गोल पोस्ट पर कई हमले किए। यूरोप की यह मजबूत टीम कमतर नजर आ रही थी। भारतीय टीम ने दोनों छोरों से हमले किए। मिडफील्ड से कप्तान मनप्रीत सिंह ने मूव तैयार किए। गुरजंत सिंह से मिले दो मौकों को एसवी सुनील गोल में नहीं तब्दील कर पाए। दोनों बार गेंद गोलपोस्ट से बाहर रही।शूटआउट में भारत के लिए ललित उपाध्याय और रुपिंदर पाल सिंह ने गोल दागे जबकि हरमनप्रीत, सुमीत और आकाशदीप के निशाने चूके। वहीं बेल्जियम के लिए आर्थर और जॉन डोमैन ने गोल किये।

इंडिया जीतेगा , चक दे इंडिया , इंडिया इंडिया के नारे लगाते कलिंगा स्टेडियम पर जमा हजारों दर्शकों के सामने इस मैच में रोमांच और जुझारुपन की जबर्दस्त बानगी मिली। बेल्जियम जहां लीग चरण में अपराजेय थी, वहीं भारत ने एक भी मैच नहीं जीता था। हाफटाइम तक स्कोर गोलरहित बराबरी पर रहने के बाद भारत ने ब्रेक के बाद पहले ही मिनट में खाता खोला जब एस वी सुनील ने सर्कल के भीतर आकाशदीप सिंह को पास दिया और उनसे गेंद लेकर गुरजंत सिंह ने बेहतरीन गोल को अंजाम तक पहुंचाया।

चार मिनट बाद ही हरमनप्रीत ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करके भारत की बढ़त दोगुनी कर दी। दो गोल से पिछड़ने के बाद सकते में आई बेल्जियम टीम ने 39वें मिनट में जवाबी हमलों पर पेनल्टी कॉर्नर बनाया इसे लोइक लुपार्ट ने गोल में बदलकर टीम को मैच में लौटाया। उन्होंने 46वें मिनट में एक और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील करके बेल्जियम को बराबरी पर ला दिया। इसके साथ ही मैदान में जमा हजारों दर्शकों को मानो सांप सूंघ गया।

भारतीयों ने हालांकि हार नहीं मानते हुए हमले जारी रखे और अगले ही मिनट इसका परिणाम पेनल्टी कार्नर के रूप में मिला। रूपिंदर ने इसे गोल में बदलकर माहौल फिर जीवंत कर दिया। बेल्जियम ने हालांकि 57वें मिनट में अमॉरी क्यूस्टर्स के गोल के दम पर फिर वापसी करके मैच को शूटआउट की ओर धकेला।

इससे पहले लीग चरण से सबक लेते हुए भारत ने इस मैच में काफी आक्रामक आगाज किया। गेंद पर नियंत्रण और विरोधी गोल पर हमलों के मामले में भारतीय टीम बेल्जियम पर हावी रही। दूसरे ही मिनट में अनुभवी स्ट्राइकर एस वी सुनील भारत को बढ़त दिला देते लेकिन चूक गए। भारत को तीन मिनट बाद मैच का पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन इस पर हरमनप्रीत गोल नहीं कर सके। इस बीच भारत के तेवरों से सन्न बेल्जियम ने जवाबी हमले बोलने शुरु किए। अब तक अडिग दिख रहे भारतीय डिफेंस को भेदते हुए उसने दसवें मिनट में गेंद गोल के भीतर डाल दी लेकिन भारत के विडियो रेफरल लेने के बाद इस गोल को अमान्य करार दिया गया।

दूसरे क्वॉर्टर के तीसरे ही मिनट में गुरजंत सिंह ने डी के भीतर सुनील को बेहतरीन पास दिया। गेंद से दूर खड़े सुनील ने उसे लपका भी लेकिन गोल के दाहिने ओर से उनका शॉट बाहर निकल गया। पिछले मैचों में आखिरी मिनटों में गोल गंवाने के कारण आलोचना झेल रहा भारतीय डिफेंस पहले हाफ में काफी चुस्त दिखाई दिया। इस टूर्नमेंट के जरिए आठ महीने बाद भारतीय टीम में लौटे रूपिंदर पाल सिंह और वरुण कुमार ने बेल्जियम के कई मूव नाकाम किए। गोलकीपर आकाश चिकते ने 28वें मिनट में बेल्जियम का शर्तिया गोल बचाया। भारत को हाफटाइम से ठीक पहले पेनल्टी कॉर्नर मिला लेकिन इस बार रूपिंदर चूके। हाफटाइम तक दोनों टीमें गोलरहित बराबरी पर थी।

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