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मध्य प्रदेश में शौचालय बना जातीय टकराव का मुद्दा

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भोपाल

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए जोर लगा रहे हैं और हर घर में शौचालय बनवा रहे हैं तो दूसरी ओर मध्य प्रदेश के एक इलाके में इस पर जातीय टकराव शुरू हो चुका है। बुंदेलखंड के एक गांव में अनुसूचित जाति के लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली समुदाय के लोगों ने उनके शौचालय तोड़ डाले हैं।

छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर बराखेरा गांव में दलित प्रजापतियों और पटेलों के बीच तनाव है। एससी समुदाय की महिलाओं का आरोप है कि पटेल समुदाय के कुच लोगों ने उन्हें शौचालय इसलिए तोड़ दिए क्योंकि इनका दरवाजे उनके घर के सामने खुलते थे। अब शौच के लिए बाहर जाने का रास्ता ही बचता है, लेकिन उन्हें ऐसा करने से भी रोका जा रहा है।

गांव के हालात के बारे में बताते हुए चंपा कहती हैं, ‘पटेल समुदाय के लोग हमें शौच के लिए बाहर जाने पर पीटने की धमकी दे रहे हैं। वे न तो हमें हमारे शौचालय में जाने दे रहे हैं और न ही खुले में जाने देते हैं। हम अब क्या कर सकते हैं?’

तनाव की खबर प्रशासन तक पहुंची तो शनिवार को अधिकारियों की एक टीम गांव में पहुंची ताकि शौचालयों का दोबारा निर्माण कराया जाए। इस गांव में प्रजापति समुदाय के आधा दर्जन परिवार हैं। पटेल अन्य पिछड़ा वर्ग आते हैं, लेकिन इस इलाके में वे समृद्ध और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं। स्थानीय निवासी मुकेश प्रजापति ने बताया, ‘हम लोग शौच के लिए अब अब अपने घरों के पीछे मिट्टी के बर्तन का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरपंच भी पटेल समुदाय से ही है। हमारे शौचालय सिर्फ इसलिए तोड़ दिए गए क्योंकि ये पटेलों के घर के सामने बने थे।’

वहीं, दूसरे समुदाय के सदस्य भगवान दास पटेल ने कहा, ‘हम दिन भी लोगों को शौचालय में आते-जाते देखने के लिए मजबूर हैं। शौचालयों से सड़क भी संकरी हो गई है। हमने पंचायत में शिकायत दर्ज कराई है।’ जिला पंचायत के सीईओ हर्ष दीक्षित ने कहा, ‘मैंने एक टीम को यह जांचने के लिए भेजा है कि शौचालय क्यों तोड़े गए। मैं टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया दे सकता हूं।

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