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‘मेड इन चाइना’ पेस्टिसाइड स्प्रे पंप पर बैन, मुश्किल में महाराष्ट्र के किसान

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नागपुर

‘मेड इन चाइना’ पेस्टिसाइड स्प्रे पंप्स पर बैन के सरकारी फैसले ने महाराष्ट्र के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। फडनवीस सरकार के इस फैसले के बाद बाजार में पेस्टिसाइड स्प्रे पंप की किल्लत हो गई है। डीलरों का कहना है कि इसका असर ऐग्रिकल्चर सेक्टर पर बहुत ही बुरा पड़ने वाला है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को ऐलान किया था कि खेती के लिए इस्तेमाल किए जा रहे चाइनीज पेस्टिसाइड स्प्रे पंप्स बैन कर दिए जाएंगे। इस बारे में ट्रेडर्स का कहना है कि 35 किसानों की मौत के लिए जानलेवा केमिकल मिक्स को जिम्मेदार ठहराकर सरकार अपनी गलती छुपाने की कोशिश कर रही है। इंडियन प्रॉडक्ट्स की जगह चाइनीज पंप्स का इस्तेमाल किसान कर रहे थे। यह रातों-रात नहीं हुआ था और इसमें वक्त लगा था। अब बैन के फैसले से इसका असर पड़ना तय है।

चाइनीज प्रॉडक्ट्स पसंद करने के पीछे किसान दो अहम तर्क बताते हैं- पहला यह बेहद बेहद सस्ता है और दूसरा यह दूसरे पंप के मुकाबले ताकतवर है। हालांकि, कई ऐसे ‘मेड इन चाइना’ स्प्रे प्रॉडक्ट्स भी हैं जो इंडियन ब्रांड के नाम से बेचे जाते हैं।

एक ट्रेडर का कहना है कि हमारी कंपनी दोनों ब्रांड (चाइनीज व इंडियन) के नाम से बाजार में स्प्रे बेचती है, लेकिन किसान चाइनीज प्रॉडक्ट को ज्यादा पसंद करते हैं। यहां तक कि हमारी बिक्री का 90 फीसदी हिस्सा चाइनीज प्रॉडक्ट से है। एक स्प्रे पंप की कीमत 2500-5000 रुपये के बीच है। वहीं भारतीय पंप की कीमत 3500 रुपये से ही शुरू होती है, जो करीब 30 फीसदी महंगा है।

यह माना जाता है कि चाइनीज मैन्युफैक्चर का बड़ा नेटवर्क है जो इंडियन डीलर्स की मांग पर पंप बनाते हैं। बाद में इसे इंडियन कंपनी का नाम दे दिया जाता है। हाल ही एक जांच में बात सामने आई थी कि इन तरह के पंप्स पर चाइनीज ब्रांड नाम ऐसे लिखे जाते हैं, जो पहली नजर में बिल्कुल नहीं दिखते।

वैसे इन दिनों एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि चाइनीज पंप्स बेहद तेजी से काम करते हैं। इस वजह से स्प्रे करने वालों किसानों की सांस में समस्या हो जाती है। हालांकि ट्रेडर्स इस थिअरी से बिल्कुल सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि क्या देश में हालिया दिनों में किसानों की मौत सिर्फ पेस्टिसाइड्स की वजह से हुई? देश के हर इलाके में हर फसल के लिए अलग तरीके के पंप इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में सरकार की यह दलील समझ से परे है।

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