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MP में रिलीज नहीं होगी पद्मावती: शिवराज; अमरिंदर बोले- विरोध सही

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भोपाल

मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को साफ कर दिया कि फिल्म पद्मावती राज्य में नहीं दिखाई जाएगी। शिवराज ने कहा- भारत में नारी हमेशा से पूजनीय रही है। फिल्म में रानी पद्मावती के किरदार और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है, इसलिए इसका प्रदर्शन मध्य प्रदेश में नहीं होगा। बता दें कि यूपी सरकार ने भी इस फिल्म को नहीं दिखाने का फैसला किया है। राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे भी फिल्म के विवादित हिस्से को हटाए जाने की मांग कर रही हैं। अब पंजाब के सीएम अमरिंदर ने फिल्म के विरोध कर रहे लोगों का समर्थन किया है।

मध्य प्रदेश में राजपूत समाज इसके प्रदर्शन का विरोध कर रहा है। राजपूत समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराया। इस पर चौहान ने उन्हें भरोसा दिलाया कि भले ही सेंसर बोर्ड उसे रिलीज कर दे लेकिन राज्य में वह प्रदर्शित नहीं होगी। शिवराज के ऐलान के कुछ देर बाद अमरिंदर सरकार ने भी पंजाब में फिल्म बैन करने का ऐलान किया। पंजाब में कांग्रेस की सरकार है और अमरिंदर सिंह सीएम हैं। पद्मावती फिल्म को लेकर उन्होंने भी सोमवार को बयान दिया। कहा- कोई भी ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं कर सकता। अगर लोग फिल्म का विरोध कर रहे हैं, तो वो सही कर रहे हैं।

सोमवार सुबह बड़ी संख्या में राजपूत समाज से जुड़े प्रतिनिधि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह के साथ मुख्यमंत्री आवास पर शिवराज से मिले और उनके सामने अपनी बात रखी। प्रतिनिधि मंडल का कहना था कि फिल्म रिलीज हुई तो रानी पद्मावती की छवि धूमिल हो जाएगी। इस प्रतिनिधिमंडल में कई बीजेपी विधायक भी शामिल थे। उसके बाद चौहान ने कहा कि राज्य में फिल्म ‘पद्मावती’ किसी भी हालत में प्रदर्शित नहीं होगी।

पद्मावती का स्मारक बनाएगी शिवराज सरकार
शिवराज ने कहा कि फिल्म राजमाता पद्मावती के सम्मान के खिलाफ बनी है, जबकि अपने मान-सम्मान के लिए रानी पद्मावती ने जान दे दी थी। रानी पद्मावती और उनके जीवन और मृत्यु के बारे में उन्होंने बचपन से पढ़ा है। इतिहास से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं है। फिल्म से आपत्तिजनक दृश्य हटाने तक उसे प्रदर्शित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके उलट उन्होंने मध्य प्रदेश में रानी पद्मावती का स्मारक बनाने की घोषणा भी की।

मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले का समर्थन करते हुए पंजाब सरकार ने भी राज्य में फिल्म की रिलीज प्रतिबंधित कर दी। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि इतिहास के साथ कोई भी छेड़खानी बर्दाश्त नहीं करेगा। जो फिल्म ‘पद्मावती’ का विरोध कर रहे हैं, वे सही हैं।

दरअसल फिल्म ‘पद्मावती’ का विरोध अब पूरी तरह से राजनीतिक रुख ले चुका है। पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने करणी सेना जैसे संगठनों के विरोध को समर्थन दिया। इसके बाद राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति इरानी को पत्र लिख मांग की थी कि ‘पद्मावती’ को जरूरी बदलाव के साथ रिलीज किया जाए।

यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सीधे तौर पर कह दिया कि बिना आपत्तिजनक सीन हटाए मूवी को यूपी में रिलीज नहीं होने दिया जाएगा। इससे पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी 1 दिसंबर को ‘पद्मावती’ को रिलीज नहीं करने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने फिल्म रिलीज होने पर शांति भंग होने की आशंका जताई थी।

कांग्रेस में भी घमासान
ऐसा नहीं है कि ‘पद्मावती’ को लेकर केवल बीजेपी के नेता मुखर हैं। कांग्रेस में भी इस मसले पर घमासान दिख चुका है। फिल्म ‘पद्मावती’ पर छिड़े विवाद के बहाने थरूर ने विरोधियों पर तंज कसा था। थरूर ने कहा था कि आज जो ये तथाकथित जांबाज महाराजा एक फिल्मकार के पीछे पड़े हैं और दावा कर रहे हैं कि उनका सम्मान दांव पर लग गया है, यही महाराजा ब्रिटिश शासकों के सामने भाग खड़े हुए थे। थरूर के इस बयान पर पलटवार करते हुए सिंधिया ने कहा था कि ‘मुझे लगता है उन्हें इतिहास पढ़ने की जरूरत है। मैं सिंधिया हूं और मैं अपने पूर्वजों पर गर्व करता हूं।’

उधर, फिल्म पद्मावती को लेकर लगातर बढ़ रहे विवादों के बीच फिल्म के निर्माता कंपनी वायकॉम18 ने इसकी रिलीज को टाल दिया। कंपनी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि ‘पद्मावती’ की निर्माण कंपनी वायकॉम 18 ने 1 दिसंबर, 2017 को फिल्म की रिलीज स्थगित कर दी है। कंपनी ने बयान में कहा, ‘हम एक जिम्मेदार, कानून का पालन करने वाले कॉर्पोरेट नागरिक हैं। हम देश के कानून व CBFC सहित अपने सभी संस्थानों और वैधानिक निकायों का सम्मान करते हैं।’

कंपनी ने विश्वास जताया कि उन्हें फिल्म रिलीज करने के लिए जल्द ही अपेक्षित मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद ‘पद्मावती’ को रिलीज करने की नई तारीख की घोषणा की जाएगी। गौरतलब है कि सेंसर बोर्ड ने भी कुछ तकनीकी कारणों से फिल्म को लौटा दिया था। साथ ही इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने सेंसर बोर्ड से फिल्म के पास हुए बगैर ही कुछ चुनिंदा पत्रकारों को फिल्म दिखा दी।

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