Home ग्लैमर यूं ही नहीं नपे निहलानी, PMO ने दी इजाजत!

यूं ही नहीं नपे निहलानी, PMO ने दी इजाजत!

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नई दिल्ली

पूरे कार्यकाल विवादों से घिरे पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के नए चेयरमैन के तौर पर गीतकार प्रसून जोशी उनकी जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल तीन साल का होगा। दिलचस्प बात यह है कि निहलानी के मुखर आलोचक रहे फिल्मकार अशोक पंडित को भी तत्काल प्रभाव से बोर्ड की सदस्यता से मुक्त कर दिया गया है।

निहलानी को हटाए जाने के पीछे की वजह लंबे वक्त से उनके विवादों में घिरे रहना और उनका खिलाफ मिल रहा फीडबैक बना। फिल्मों में कांटछांट और फिल्ममेकर्स के उत्पीड़न की शिकायतों की वजह से निहलानी कुख्यात हो चले थे। वहीं, बोर्ड की छवि रोड़ा अटकाने वाले के तौर पर बन गई थी। यह भी संदेश जा रहा था कि उसके फैसलों के पीछे सरकार का समर्थन है। माना जा रहा है कि निहलानी को अपनी रवानगी का अंदाजा कुछ वक्त पहले ही हो गया था, लेकिन उन्होंने इस खबर को गंभीरता से नहीं लिया। केंद्र सरकार की मंशा थी कि बोर्ड चीफ का बदलाव बेहद स्मूथ हो, इसलिए शुक्रवार को सेंसर बोर्ड का पुनर्गठन हुआ।

बोर्ड में अब कौन
बोर्ड में अब बॉलिवुड ऐक्ट्रेस विद्या बालन, तमिल ऐक्टर तड़ीमला और जीविता राजशेखर, लेखक नरेंद्र कोहली, डायरेक्टर प्रड्यूसर नरेश चंद्र लाल और विवेक अग्निहोत्री, अवॉर्ड विनिंग पियानो वादक व हिंदी म्यूजिक डायरेक्टर नील हरबर्ट, नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के डायरेक्टर वामन केन्द्रे, कन्नड़ फिल्म डायरेक्टर टीएस नागाभर्ना और डायलॉग राइटर मिहिर भूटा बतौर मेंबर शामिल हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आरएसएस विचारक रमेश पतंगे और पूर्व बीजेपी सेक्रटरी व थिएटर आर्टिस्ट वानी त्रिपाठी टिक्कू को तीन साल के कार्यकाल के लिए सीबीएफसी मेंबर बनाया है।

निहलानी के खिलाफ शिकायतों का अंबार
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि निहलानी के खिलाफ फिल्म इंडस्ट्री के तरफ से महीनों से फीडबैक मिल रहा था। इनमें सीबीएफसी चीफ पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इंडस्ट्री का यह भी कहना था कि फिल्मों की सेंसरशिप को लेकर कड़ा रुख अपना रखा था। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय निहलानी द्वारा बोर्ड की गतिविधियों पर एकाधिकार जमाने की कोशिशों से ‘बेहद असहज’ था। निहलानी को अपनी इन कोशिशों की वजह से बोर्ड के अंदर से ही विरोध का सामना करना पड़ा था।

पीएम से इजाजत लेकर कार्रवाई
इसके अलावा, वक्त-वक्त पर निहलानी की वजह से सरकार को जो शर्मिंदगी उठानी पड़ी, उसके बाद मंत्रालय ने निहलानी का बोरिया-बिस्तर बांधने और प्रसून जोशी को उनकी जगह लाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से इजाजत मांगी। हाल ही में हिंदी फिल्म ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ पर सेंसर बोर्ड द्वारा 48 कट की सिफारिश के बाद डायरेक्टर कुशन नंदी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मंत्री स्मृति इरानी को फोन करके नाराजगी जाहिर की थी। बोर्ड के सदस्यों ने फिल्म की प्रड्यूसर किरण श्याम श्राफ पर निजी टिप्पणियां भी की थीं, जिसकी काफी आलोचना हुई थी। नंदी ने सरकार की कार्रवाई पर संतोष जताया।

प्रसून जोशी को क्यों लाया गया?
जोशी को लाने से पहले इस पहलू पर भी विचार किया गया कि उनको लेकर फिल्म इंडस्ट्री में बेहतर स्वीकृति है। उन्हें इंडियन सिनेमा के हितों की रक्षा करने के लायक माना गया। इसके अलावा, उन्हें सरकार के प्रति हमदर्दी रखने वाला शख्स भी माना जाता है। विज्ञापन जगत के एक्सपर्ट माने जाने वाले जोशी ने 2014 के आम चुनाव में बीजेपी के इलेक्शन कैंपेन पर भी काम किया था। इसके अलावा, उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के उस ‘असहिष्णु’ ब्रिगेड से थी एक दूरी कायम करके रखी, जिसने एफटीआईआई, एआईबी बैन और दूसरे मुद्दों पर एनडीए सरकार पर वक्त-वक्त पर हमला बोला।

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