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रूस और चीन की दोस्ती से अमेरिका के छूट रहे पसीने

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पेइचिंग/मॉस्को

china-russia_2919509bएशिया-प्रशांत क्षेत्र में रूस और चीन के बीच बढ़ते सुरक्षा, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के कारण अमेरिका के लिए मामला जटिल होता जा रहा है। कई विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती करीबी के कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों का प्रभाव कम होगा। रूस और चीन के बीच बढ़ते प्यार से अमेरिका का परेशान होना लाजिमी है।

रूस और चीन के बीच करीबी बढ़ने के ऐतिहासिक और वैचारिक कारण भी हैं। दोनों देशों में सरकारें अधिनायकवादी शैली में चलती हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस स्टाइल की सरकारों से भी पश्चिम को आशंका रहती है। पश्चिम के देशों को लगता है कि कहीं दुनिया की दिशा इनके हिसाब से न तय होने लगे।

रूस और चीन अपने-अपने राष्ट्रीय हित में सैनिकों की तैनाती का इरादा रखने वाले देश हैं। ये क्षेत्रीय सुरक्षा औरर चुनौतियों में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करते हैं। फिलहाल रूस यूक्रेन में और चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी ताकत को दिखा रहा है। दोनों इन जगहों पर मिलिटरी की तैनाती में कोई समझौता नहीं करना चाहते।

रूस और चीन दुनिया भर में अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने की इच्छा रखते हैं। जहां भी ऐंटी अमेरिकी सरकारें हैं वहां इन देशों की मौजूदगी अच्छी है। दोनों देश सीरिया और ईरान की सरकारों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। जाहिर है अमेरिका की ईरान से दशकों पुरानी दुश्मनी है और सीरिया में भी अमेरिका असद को हटाने पर अड़ा है।

पुतिन और शी चिनफिंग के अपने-अपने हित हैं। इन हितों के जरिए ये करीब आ रहे हैं। यूनाइडेट सिक्यॉरिटी काउंसिल में भी ये दोनों देश अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को खिलाफ अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हैं। पिछले दशकों में चीन ने 6 वीटो पावर का इस्तेमाल किया है। इन सारे वीटो का संबंध रूस से रहा है। इसी वक्त रूस ने 11 वीटो इस्तेमाल किए। सबसे नया वीटो का इस्तेमाल रूस और चीन ने 2012 में सीरिया पर यूएन के चार प्रस्ताव के खिलाफ किया था। रूस और चीन के वीटो के कारण ही अमेरिका मिडल-ईस्ट में सैनिक हस्तक्षेप नहीं कर पाता है।

आर्थिक रूप से भी चीन और रूस अपने अलग कुनबे का निर्माण कर रहे हैं। ये दोनों देश नए संस्थानों को खड़ा करने में लगे हैं। इनमें एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक और न्यू डिवेलपमेंट बैंक ब्रिक्स अहम हैं। इसके साथ ही चीन और रूस में सिल्क रोड इकनॉमिक बेल्ट पर भी सहमति बन गई है। इसे यूरेशियन इकनॉमिक यूनियन कहा जा रहा है। चीन इस योजना के तहत सेंट्रल एशिया से यूरोप को सड़क मार्ग से जोड़ रहा है।

अमेरिका के रक्षा मंत्री एश कार्टर ने कहा है कि रूस अमरीका के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री के अनुसार, रूस की आक्रामकता को देखते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यूरोप के लिए अमेरिका के रक्षा बजट में 2017 में चार गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखेगा। मार्च 2014 में यूक्रेन के प्रायद्वीप क्राइमिया को रूस ने अपने कब्जे में कर लिया था। इसके बाद से अमेरिका और रूस के रिश्तों में तनाव बना हुआ है।

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