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साहब जरा हैदराबाद याद करो

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भोपाल

एक कहावत है कि हनुमान जी को खुद उनकी ताकत का अंदाजा नहीं था इसलिए उनके सहयोगी जब उन्हें अपनी ताकत याद दिलाया करते थे तब भगवान श्रीराम के काम जल्द ही निपटा देते थे। वह सात समुंदर पार भी तब ही जा पाये थे। कुछ यहीं हालात भोपाल यूनिट के दिखाई दे रहे है। बड़े साहब जब से इस यूनिट की कमान संभाली है कुछ बदले-बदले नजर आ रहे हैं। कारखाने में क्या हो रहा है और बाहर क्या हो रहा है उस पर वह पूरी तरह ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। इसको लेकर कर्मचारी और नेता तो दूर वरिष्ठ अधिकारियों ने भी चर्चाएं शुरू कर दी है। कुछ लोग तो यह भी कहने लगे है कि जिस हैदराबाद यूनिट को साहब ने पूरी दमदारी से चलाया वहां के अधिकारी,कर्मचारी और नेता भी यह कहनें से नहीं चूकते कि साहब के हैदराबाद चलाने की स्टाइल को आज भी नहीं भुलाया जा सकता। फिर क्या बात है कि बड़े साहब इस यूनिट के लिए कोई कठोर कदम नहीं उठा पा रहे हैं। लोग तो यह भी कहने लगे है कि बदले-बदले सरकार नजर आ रहे हैं। चर्चा है कि जल्द ही साहब नहीं बदले तो कारखाने में अनुशासन का रूप ही बदल जायेगा।

एसटीएम में ड्रिल चोरी का मामला

आजकल कारखाने मेें चोरों के हौंसले काफी बुलंद हैं। दिन में ही चोरी की वारदात को अंजाम देना आम बात हो गई है। चर्चा है कि सीआईएसएफ की विजिलेंस की नजर तेज न हो तो लाखों का माल आसानी से बाहर जा सकता है ऐसे कई मामले कॉपर,चांदी और पीतल चोरी के सामने आ चुके है। चर्चा है कि ऐसा ही एक मामला 25 जुलाई को रात 12.50 बजे पर जब एक ठेका श्रमिक गेट क्रमांक 8 से एसटीएम विभाग की 15 एमएम की ड्रिल पैर में बांधकर बाहर ले जा रहा था तब सीआईएसएफ ने उसे धर दबोचा। मामला सीधे-सीधे चोरी का होने के बाद भी आरोपी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया बल्कि विभाग को रिपोर्ट सौंप दी और आरोपी को खुला छोड़ दिया। चर्चा है कि इस मामले मेें किसका क्या लेना देना है यह अलग बात है लेकिन आरोपी के केबिन में दस खाली ड्रिल के डिब्बे मिलने के बाद भी जांच क्यों नहीं की जा रही है यह गंभीर मामला है। रही बात ठेकेदार की तो वह भी चुप्पी साधे हुए हैं। कारखाने में कॉपर, चांदी,पीतल से जुड़े मामले गंभीर हैं। चर्चा है कि ऐसे गोरख धंधें कारखाने के कुछ ब्लॉकों में बड़े ही प्लानिंग से चल रहे हैं।

दो साल बाद एलपी इनरकेसिंग की वापसी

एक दिन ऐसा आया 6 बड़े-बड़े ट्राले भेल कारखाने के प्रवेश द्वार पर दिखाई दिये। नेताओं ने यह जानने की कोशिश की आखिर इसमें हैं क्या तब पूछताछ में पता चला कि इनमें एसटीएम में एलपी इनरकेसिंग जो दो साल पहले गुजरात के काकरापार भेजे गये थे वापस आ गये कारण साफ था कि इनमें साईट पर पड़े-पड़े जंग लग गई थी अब विभाग उनको पुन: सही कर वापस साईट पर भेजेगा। चर्चा है कि यह साईट पर असेम्बल नहीं हो पा रहे है। क्वालिटी विभाग की लापरवाही कहें या कुछ और मामला गड़बड़ नजर आ रहा है इसके लिए ईडी साहब ने विभाग के अधिकारियों को भी साईट पर भेजा था। मामला जो भी हो लेकिन सीवीओ जांच का बनता है। इसके पीछे की राजनीति तो साहब लोग ही जाने। इधर सीनियर डीजीएम से एजीएम की लिस्ट भी सोमवार को निकलने की खबर है रही बात एजीएम से जीएम की लिस्ट की तो समझो प्रेशर की राजनीति शुरू हो गई है। कार्पोरेट इस सवाल पर अड़ा है कि डेढ़ सौ से ज्यादा इस यूनिट में एजीएम की फौज होने के बाद प्रमोशन में इनकी संख्या क्यों बढ़ाई जाये। एक-एक एजीएम की जानकारी खंगाली जा रही है।

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