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हिमस्खलन में दबे सैनिकों के बचने की उम्मीद नहीं : सेना

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जम्मू

thumbnailसेना ने गुरुवार को कहा कि सियाचिन ग्लेशियर में हिमस्खलन में दबे दस जवानों के बचने की संभावना बहुत कम है। सेना की उत्तरी कमान के प्रवक्ता कर्नल एस डी गोस्वामी ने कहा कि दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि जवानों के बचने की संभावना बहुत कम है। बुधवार सुबह हुए भीषण हिमस्खलन में फंसे जवानों को निकालने के लिए दूसरे दिन भी बचाव कार्य जारी है।

बचाव कार्य तेज करने के लिए अतिरिक्त जवानों को लगाया गया है। बर्फ काटने वाली मशीन और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता ली जा रही है। सियाचिन ग्लेशियर में 19600 फुट की ऊंचाई पर स्थित सेना की चौकी के हिम चट्टानों के नीचे दब जाने से एक जूनियर कमीशन्ड अधिकारी समेत दस जवान दब गए हैं। न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे 42 डिग्री और अधिकतम शून्य से नीचे 25 डिग्री सेल्सियस चल रहा है। ऐसे में बचाव दल को कठिन स्थितियों में काम करना पड़ रहा है।

इस बीच राज्यपाल एन एन वोहरा ने उत्तरी सियाचिन ग्लेशियर स्थित चौकी में तैनात जवानों के त्रासदपूर्ण नुकसान पर दुख एवं स्तब्धता व्यक्त की है। उत्तरी कमान के सैन्य कमांडर ले. जनरल डी एस हूडा ने भी इस त्रासदपूर्ण हादसे पर दुख जताया है। यहां जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि वोहरा ने जनरल हूडा को फोन करके इस हादसे से प्रभावित सैनिकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना जताई।

राज्यपाल ने दुर्गम में इलाकों में तैनात बहादुर सैनिकों की प्रशंसा की जो देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर देते हैं। जनरल हूडा ने कहा, यह त्रासदपूर्ण दुर्घटना है। हम उन सैनिकों को सलाम करते हैं जो देश की सीमाओं की रक्षा करने में प्राणोत्सर्ग कर देते हैं।

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