Home मिर्च- मसाला प्रमोशन के लिए थोड़ा और इंतजार

प्रमोशन के लिए थोड़ा और इंतजार

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भोपाल

ऐसा बहुत कम देखने को मिला है कि सीनियर डीजीएम और एजीएम की प्रमोशन लिस्ट देरी से निकली हो, 25 जून के प्रमोशन और तबादले के सीजन में हर कर्मचारी-अधिकारी के लिए इस लिस्ट के निकलने का मजा ही कुछ और है। चर्चा है कि इस बार कुछ यूनिट प्रमुखों ने कार्पोरेट को जून माह में प्रोडक्शन पिटने की कहानी सुनाकर सीनियर डीजीएम, एजीएम और जीएम की प्रमोशन लिस्ट पर ब्रेक लगवा दिया। उस पर जीएम पद के लिए हैदराबाद और हरिद्वार में तो आज तक इंटरव्यू ही नहीं हुए। भले ही जीएम की लिस्ट जुलाई के अंतिम सप्ताह में निकले, लेकिन सीनियर डीजीएम और एजीएम पद पर प्रमोशन पाने वालों को 21-22 जुलाई को एमसीएम की मीटिंग तक ही इंतजार करना पड़ेगा।

इधर चर्चा यह भी है कि प्रमोशन लिस्ट निकलने के बाद रिटायरमेंट में सवा साल शेष रहते फीडर्स ग्रुप व डब्ल्युई के जीएम स्वीचगियर जा सकते हैं। इसके लिए वह दोनों विभाग छोडऩें से भी पीछे दिखाई नहीं दे रहे हैं। लेकिन ईडी साहब के मन में क्या हैं यह अलग बात है। भेल कार्पोरेट ने एक और चर्चाओं का बाजार गर्म है कि जनरल मैनेजर फायनेंस सुबोध गुप्ता या हैदराबाद के जीएम आरपी सिंह में से किसी एक को डायरेक्टर फायनेंस बनाया जा सकता हैं।

अब भेल में दिखेंगे नेताओं के जलवे

भेल भोपाल यूनिट में इंटक, ऐबू और बीएमएस प्रतिनिधि यूनियन के रूप में चुनी गई। यह यूनियनें कर्मचारियों की मांगो को लेकर लगातार प्रबंधन से उलझ रही हैं। लेकिन प्रबंधन की नाक में नकेल डालने में भले ही कितना विरोध किया हो लेकिन पूरी मांगे मनवानें में सफल नहीं हो पाई। यह बात कुछ हारी हुई यूनियनों को नागवार गुजरी,उन्होंने अपनी ताकत व दादागिरी दिखाने के लिए आनन-फानन में मिलजुलकर एक भेल ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा का गठन कर डाला। चर्चा है कि इस गठबंधन की राजनीति के जरिये अपनी मांगे व अपने काम कराने प्रबंधन की नींद हराम करने की कोशिश अब शुरू होगी। इस गठबंधन में पिछली बार नम्बर वन रही प्रतिनिधि यूनियन एचएमएस व तीसरे नम्बर पर रही भेल कर्मचारी ट्रेड यूनियन भी शामिल हो गई है। मजेदार बात यह है कि इसके साथ हमेशा के लिए हाशिये पर चली गई एटक, सीटू और भेलू भी हो गई है। अब कर्मचारियों को यह देखना है कि इस मोर्चा के रिटायर्ड नेता कर्मचारियों के हित में कितने फैसले कराने में सफल होते है या फिर अपने खुद के हित साधने में लग जायेंगे। सब मिलाकर अब जीती हुई प्रतिनिधि यूनियन और हारी हुई यूनियनें प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलेंगी।

एक अफसर की चापलूसी की चर्चाएं

वैसे तो भेल कारखाने में हर अफसर ईडी के करीब आने के लिए गुपचुप तरीके से कई तरह केेे हथकंडे अपनाते हैं लेकिन एक अफसर ऐसे भी है जो खुले आम चापलूसी की मिशाल बन गये हैं। ऐसी चर्चा एचजीएम विभाग के जॉब टेस्टिंग सेक्शन में देखी जा सकती हैं। चर्चा है कि जैसे ही बड़े साहब टेस्टिंग में पहुंचते हैं एक एजीएम साहब का चेहरा खिल जाता है। और वह बड़े साहब पीछे-पीछे चलने लगते हैं। जैसे ही साहब कैबिन में पहुंचते हैं यह एजीएम साहब अपने आफिस से थर्मस में रखी चाय टेबिल पर रखी प्याली में बड़े प्यार से डाल कर नमकीन और बिस्कुट के साथ परोसते हैं। यह सब विभाग के कर्मचारी अपनी आंखों से देखते रहते हैं। अब इस चापलूसी को बड़े साहब तो पारखी निगाहों से परख ही लेते हैं लेकिन वहां मौजूद लोग यह समझ कर हंसने लगते है कि एजीएम साहब अगले साल प्रमोशन की कतार में जो खड़े हैं।

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