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टीसीबी ने किया कमाल भोपाल

भोपाल

टीम भेल और टीम टीसीबी को बधाई, एक बार फि र टीसीबी-बीएचईएल भोपाल ने कर दिया कमाल। चर्चा है कि 315 एमवीए टाटा-एनटीपीसी रामागुंडम, जनरेटर ट्रांसफार्मर (नेशनल हाई पावर टेस्टिंग लैब) बीना में शॉर्ट सर्किट टेस्ट पास कर दिया। इसके साथ ही बीएचईएल ने शॉर्ट सर्किट टेस्ट के लिए उच्च सफ ल परीक्षण का रिकॉर्ड बनाए रखा है। वैसे भी पिछले वित्तीय वर्ष में इन विभाग में अपना टर्न ओवर 850 करोड़ से ज्यादा था नंबर वन बनकर कंपनी का नाम रोशन किया। इस काम में ईडी डीके ठाकुर, जीएम विनय निगम के साथ एजीएम अविनाश चंद्रा की कड़ी मेहनत और टीम के मार्गदर्शन में कमाल अलग ही दिखाई दे रहा है। प्रशासनिक स्तर पर चर्चा है कि इससे भेल को 315 एमवी कैटेगरी में भविष्य के ऑर्डर प्राप्त करने में खासी मदद मिलेगी।

प्रमोशन में मार सकते हैं बाजी

भेल भोपाल यूनिट में कुछ अपर महाप्रबंधक अपने परफार्मेंस के आधार पर बाजी मार सकते हैं। चर्चा है कि पिछली बार अपर महाप्रबध्ंाक से महाप्रबंधक पद पर कुछ अफसर प्रमोशन भले ही पा गये हैं लेकिन इस बात की तारीफ किसी ने नहीं की। कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए शीर्ष प्रबंधन को इस बार बेहतर परफार्मेंस वाले अफसरों को तलाश होगा। चर्चा है कि इस यूनिट को अपर महप्रबध्ंाक अविनाश चन्द्रा, राजीव सरना, संजय चन्द्रा, संजय गुप्ता, रमेश्वर चौधरी, श्रीमती शुभ्रा चतुर्वेदी, एमके शर्मा, रिजवान सिद्दीकी, विनय कुमार, एसबी सिंह,डॉ. श्रीमती वंदना दुबे या अनेस्ट बिलुंग बाजी मार सकते हैं। वहीं प्रदीप रावत, रामभाऊ पाटिल, अमिताभ दुबे, ब्रजेश अग्रवाल, अमित शर्मा भी किसी से कम दिखाई नहीं दे रहे हैं। यह भी चर्चा है कि साक्षात्कार की तारीख निरस्त होने से अपर महाप्रबध्ंाक स्तर के अधिकारियों में खासी निराशा हैं। कारण जो भी हो लेकिन इसे भेल के चेयरमेन के एक्सटेंशन से लेकर देखा जा रहा है लेकिन प्रशासनिक स्तर पर चर्चा है कि वर्तमान चेयरमेन को एक्सटेंशन जरूर मिलेगा।

भेल मेंं तीन बच्चों पर बवाल

भेल कार्पोरेट द्वारा जारी किये गये एक सर्कुलर को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। दरअसल कार्पोरेट ने 1 अप्रैल 2014 के बाद जन्म लेने वाले भेल कर्मचारी के तीसरा बच्चा पैदा होने पर चिकित्सा सुविधा बंद करने का फरमान जारी कर दिया है। साथ ही उस बच्चे को आश्रित की परिभाषा से हटा दिया गया है। उसको लेकर कुछ यूनियनों ने आपत्ति दर्ज कराई। वह इसे प्रबंधन का एक तरफा निर्णय माने रहे हैं। यूनियन किसी महिला कर्मचारी या कर्मचारी की पत्नि के गर्भ धारण सर्कुलर जारी होने के पहले यानी कम से कम एक साल का समय परिवार नियोजन के लिए मांग कर रही है। खबर है कि भेल की हरिद्वार यूनिट ने कर्मचारियों की इस मांग को लगभग मान लिया तो ऐसे में कार्पोरेट प्रबंधन भी पुराने सर्कुलर को निरस्त कर नये सर्कुलर को जारी कर सकता है। यह मांग एचएमएस ने प्रमुखता से उठाई है।

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