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चौथे ‘लाल’ के रूप में क्या मनोहरलाल खट्टर को अपनाएगा हरियाणा?

चंडीगढ़

हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने जब वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की तो अप्रत्याशित तौर पर एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रचारक मनोहरलाल खट्टर को मुख्यमंत्री की कुर्सी थमा दी गई। उस दौरान कुछ लोगों ने इस बात की भविष्यवाणी की थी कि वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। हालांकि, अब वे तमाम लोग शांत नजर आ रहे हैं। बता दें कि खट्टर वर्ष 1993 से जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं और वर्ष 2000 से राज्य की सक्रिय राजनीति में हैं।

राज्य के कुछ हिस्सों में महापौर चुनाव के वक्त बीजेपी ने मुकाबला अपने नाम कर लिया, जिसके साथ ही मनोहरलाल खट्टर की स्थिति भी मजबूत हुई। उधर, पार्टी ने जींद उपचुनाव में भी जीत दर्ज कर ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सभी 10 सीटों के साथ क्लीन स्वीप कर दिया, इस दांव ने खट्टर की दावेदारी को और दृढ़ता प्रदान की।

इन वादों से लोगों को दिलाया यकीन
राज्य के पहले पंजाबी भाषी मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार को खत्म करने का वादा करके, खास तौर पर सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में होने वाली धांधली को समाप्त करने, इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने और जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने का वादा कर अपने प्रति मतदाताओं का विश्वास पैदा किया। हरियाणा की कुल जनसंख्या का 8 फीसदी हिस्सा जिस समुदाय से आता है उसको भी ध्यान में रखते हुए खट्टर और उनके सहयोगियों ने अल्पसंख्यक गैर जाट मतदाताओं पर जीत दर्ज करने का भी लक्ष्य बनाया। राज्य में जाटों का राजनीति में बोलबाला रहा है और जाट कोटे को लेकर हुई हिंसा के बाद गैर जाट समुदाय ने बीजेपी की ओर रुख करना शुरू कर दिया।

गैर जाट नेता के रूप में बना रहे छवि
इतना ही नहीं, खट्टर खुद को भी विश्वसनीय गैर जाट नेता के रूप में स्थापित करने में जुटे हैं। खट्टर ने हाल ही में जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा था, ‘आपको वंशवाद की राजनीति को समाप्त करने के लिए हमारे मिशन को श्रेय देना चाहिए। हमने हरियाणा एक हरियाणवी एक का नारा दिया। अपने पूर्ववर्तियों के विपरीत, जो सिर्फ खुद को ही आगे बढ़ाते थे हमने सभी के लिए काम किया है।’

क्या चौथे ‘लाल’ को भी मिलेगा मौका?
हरियाणा की राजनीति तीन लाल के इर्द गिर्द ही घूमती है। इनमें एक हैं आईएनएलडी के संस्थापक देवी लाल, कांग्रेस पार्टी के बंसी लाल और भजन लाल और विधानसभा चुनाव के नतीजे तय करेंगे यदि मुख्यमंत्री खट्टर हरियाणा के लोगों के द्वारा चौथे लाल के रूप में चुने जाते हैं। भजन लाल, जिन्होंने हरियाणा जनहित कांग्रेस की स्थापना के लिए कांग्रेस से नाता तोड़ लिया, वह एक प्रमुख गैर जाट मुख्यमंत्री थे। उन्हें हरियाणा की राजनीति के चाणक्य के रूप में पहचाना जाता था। उन्हें खरीदफरोख्त के इतर राज्य में आया राम गया राम राजनीति के प्रवर्तक के रूप में भी जाना जाता है।

भजन लाल और सीएम खट्टर की तुलना
कांग्रेस से एक पंजाबी नेता और भजन लाल के वफादार रविंदर रावल कहते हैं, ‘चौधरी भजन लाल जनसमूह के नेता थे। भजन लाल और सीएम खट्टर की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं और दोनों की तुलना नहीं होनी चाहिए।’

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