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एचआर साहब का खुल सकता है किस्मत का पिटारा

भोपाल

भेल के कई अफसर ऐसे हैं जब-जब उनकी किस्मत साथ दे गई तब-तब या तो वह जीएम बने या फिर ईडी या फिर डायरेक्टर, ऐसे ही हालात भेल कारखाने के महाप्रबंधक एचआर के भी दिखाई देने लगे हैं। दरअसल पहले वह डायरेक्टर मानव संसाधन बनते-बनते रह गये। इस दौरान वह काफी उदास भी दिखाई दिये। खबर है कि दिल्ली कार्पोरेट के एक महाप्रबंधक का ईसीआईएल के डायरेक्टर पद पर चयन हो गया और ईडी एचआर का पहले ही डायरेक्टर पद के लिए चयन हो चुका है यहां तक कि उन्हें इसके पॉवर भी दे दिये गये हैं। ऐसे में भोपाल के साहब की किस्मत चेतने की चर्चाएं भी शुरू हो गई है। यह कहा जाने लगा है कि वह जल्द ही कार्पोरेट में रवाना हो सकते हैं। उनके चाहने वाले भी चाहने लगे हैं कि साहब को सर्विस के साढ़े चार साल बाकी है ऐसे में भले ही देर से उनका प्रमोशन तो बनता है।

और भी पांच साल से जमें अफसरों पर गिर सकती है गाज

यूं तो भेल जैसी महारत्न कंपनी में नये चेयरमेन के आते ही एक ही विभाग में पांच साल से जमें कुछ अफसरों पर गाज गिर चुकी है लेकिन आज भी कुछ अफसर ऐसे हैं जो अपनी एप्रोच के चलते पांच साल से ज्यादा समय होने के बाद भी जमें हुए हैं। चर्चा है कि भेल की विजिलेंस ऐसे अफसरों की लिस्ट बना रही है। कारखाने के फीडर्स ग्रुप, फेब्रीकेशन, हाईड्रो, ट्रेक् शन,ट्रांसफार्मर, मानव संसाधन विभाग, वित्त विभाग, थर्मल जैसे विभागों में कुछ अफसर सिर्फ पांच साल ही नहीं बल्कि दस साल से जमें हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि नियमों का पालन कराने वाले खुद विजिलेंस विभाग में अधिकारी पांच साल से ज्यादा का समय पार कर चुके हैं। इन पर किसी की निगाहें नहीं पड़ी, या वरिष्ठ अधिकारियों की मेहरबानी इस बात की चर्चाएं प्रशासनिक स्तर पर सुनी जा सकती है। इधर खबर यह भी है कि जिन अफसरों का प्रमोशन पॉलिसी के तहत बाहर की यूनिट में तबादला होना है वह यूनिट का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। यानी कुछ तो प्रमोशन ही नहीं चाह रहे हैं।

भेल को कहेंगे अलविदा

भेल कारखाने में दीनबंधु दुखहर्ता तुम ठाकुर मेरे के नाम से अफसरों में चर्चित रहे भेल के मुखिया 24 अक्टूबर को भेल से रिटायर होंगे। न काहू की दोस्ती न काहू से बैर की तर्ज पर ढाई साल का वक्त पूरा करने जा रहे मुखिया साहब की जितनी तारीफ की जाये कम ही है। यह तो जग जाहिर है कि उन्होंने भोपाल यूनिट को रिटायरमेंट होने तक कंपनी में नंबर वन बनाये रखने कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी। चर्चा यह जरूर है कि कुछ चापलूस नेताओं ने उनसे जमकर फायदा उठाया और उनकी बुराई भी की, लेकिन साहब ने यह सब बातें अनसुनी कर अपना वक्त गुजार लिया। लोग उन्हें जितना सीधा समझते हैं दरअसल वह इतने सीधे भी नहीं हैं। अपने कार्यकाल में जहां अपने चहेते अफसरों को जहां प्रमोशन दिलाने में सफलता हासिल की वहां कुछ अफसरों को बाहर का रास्ता भी दिखा दिया। लेकिन अपना भोलापन आज तक नहीं छोड़ा। इसके चलते कुछ अफसर बजाय मुखिया की सुनने के अपनी स्वार्थ सिद्धि में लग गये हैं। वहीं उनकी स्वार्थ सिद्धि पकड़ी भी जाए बड़े साहब मीठी डांट फटकार लगाकर उन्हें चलता कर देते हैं। ऐसा लंबे समय से चल रहा है और भीतर ही भीतर कुछ अफसर मजे से चांदी काट रहे हैं। उस पर यह कहने लगते हैं कि जब तक साहब हैं तब तक सब ठीक ठाक चलता रहेगा। यह हैं ंदीनबंधु दुखहर्ता ठाकुर।

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