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ईडी ठाकुर कहेंगे भेल को अलविदा

भोपाल

भेल भोपाल के मुखिया डीके ठाकुर अपना ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर 24 अक्टूबर को भेल को अलविदा कहेंगे। इस कार्यकाल को लेकर भेल में कई तरह की चर्चाएं जारी है। यूं तो उनकी प्रशासनिक क्षमता के बारे में लोग कुछ भी कहे लेकिन जब कार्य क्षमता की बात को लेकर जब भी चर्चा चलती है विभागीय लोग यह कहने से भी नहीं चूकते कि पूर्व कार्यपालक निदेशक एसआर प्रसाद और एएमवी युगांधर की तरह उन्होंने भोपाल यूनिट को उत्पादन, लाभ और कैश कलेक् शन जरूर नंबर वन बनाये रखा। हां यह जरूर कहा जा रहा है कि जिन नेताओं के काम उनके कार्यकाल में नहीं हुए या कम हुए वह कोसते नजर आ रहे हैं। छ: माही टारगेट में भी यह यूनिट नंबर वन पर है। अब देखना यह है कि नये ईडी के कार्यकाल में इन नेताओं की कितनी चलती है या उनकी प्रशासनिक क्षमता कितनी है। फिलहाल भले ही नये ईडी को लेकर चर्चाएंं कुछ भी हो लेकिन दलालों की नहीं चलेगी।

भेल में नये महाप्रबंधक और नगर प्रशासक की तलाश

भेल में महाप्रबंधक मानव संसाधन एम इसादोर का तबादला भेल दिल्ली कार्पोरेट में हो गया है। दूसरी और 24 नवंबर को टाउनशिप के मुखिया अनंत टोप्पो भी रिटायर हो जायेंगे। भेल में यह दोनों ही पद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। महाप्रबंधक एचआर का काम पहले से ही दो ब्लॉकों का भार ढो रहे पीके मिश्रा को अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है इसके लिए भेल के नये ईडी सी आनंदा ही फैसला करेंगे कि इस पद पर किसको बिठाया जाये। यूं तो शीर्ष प्रबंधन दिल्ली कार्पोरेट में महाप्रबंधक पद पर प्रशासनिक काम संभाल रहे बीरेन्द्र कुमार सिंह को भोपाल यूनिट भेज सकता है या फिर पीके मिश्रा को ही हाईड्रो या फेब्रीकेशन ब्लॉक में से किसी एक ब्लॉक से हटाकर इसका दायित्व सौंप सकता है। ऐसा कहा जा रहा है कि दोनों ही अधिकारी दमदार व प्रशासनिक क्षमता के धनी हैं। इधर भेल टाउनशिप के मुखिया को लेकर पिपलानी और बिजली विभाग के अफसर भी मुंगेरीलाल के हसीन सपनें देख रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर चर्चा है कि इस पद के लिए किसी दमदार अफसर को ही भेजा जा सकता है।

काम सिक्यूरिटी का और ठेका मिल गया सफाई

भेल कारखाने के अफसरों की जितनी तारीफ की जाये कम ही है। अपने चहेतों को खुश करने के लिए वह कोई भी काम देने में नहीं चूकते। यही कारण है कि कम दर पर ठेका मिलने के बाद भी ठेकेदार की बल्ले-बल्ले रहती हैं। ऐसा ही एक मामला वक्र्स कॉन्ट्रेक्ट डिपार्टमेंट का चर्चाओं में है। जिसमें कारखाने के चार विभागों में सफाई का काम एक ऐसे को दे दिया जो सिक्यूरिटी के काम में यानी सुरक्षा गार्डाे की सप्लाई करता है अब वह उन्हीं गार्डों से पर्याप्त संसाधन न होने के बाद भी करा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि जिसे काम दिया उसका अनुभव सर्टिफिकेट भी सही है या नहीं। यहां तक की एनआईटी के नियमों के मुताबिक काम हो रहा है कि नहीं इसे देखने की फुर्सत किसी अधिकारी को नहीं है। हां कर्मचारी जरूर यह कहते हैं कि साहब साफ-सफाई तो दूर लेकिन गंदगी का आलम इन विभागों में ज्यादा देखा जा सकता है।

सीबीआई में के स और डिपार्टमेंटल इंक्वायरी भी जारी

कम्प्यूटर में आंकडों ही हेरा फे री कर लाखों का भ्रष्टाचार के मामले में भेल के 13 अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है जो आज भी कोर्ट में लंबित है। खास बात यह है कि इन अफसरों पर सीबीआई में केस होने के बाद भी डिपार्टमेंटल इंक्वायरी जारी है। मजेदार बात यह सामने आई है कि इस पूरे मामले को तीन ईमानदार अफसर भी बुरी तरह फंस गये हैं। उन्हें बड़े साहब की गलत बात को सही मानना काफी महंगा पड़ा। इानमें से एक अफसर तो भगवान को प्यारा हो गया और कुछ रिटायरमेंट के बाद घर बैठ गये हैं। भेल के प्रशासनिक भवन में यह कहा जाने लगा है कि जब मामला कोर्ट में है तो विभागीय जांच में सालों कैसे लग रहे हैं ऐसे में कुछ अफसर तो प्रमोशन पाने से ही महरूम रह गये हैं। एक साहब तो ईमानदार होते हुए भी चैन्नई में सिर्फ समय काट रहे हैं।

हैदराबाद कांड की गूंज भेल भोपाल कारखाने में भी

भोपाल में रहने वाली भेल की एक महिला कर्मी की भेल हैदराबाद यूनिट में मौत का मामला भेल भोपाल में भी चर्चाओं में है। जिस तरह से विभागीय अधिकारी कर्मचारी या महिला कर्मचारियों को अपने कार्य स्थल पर अपने बड़े ओहदे के कारण परेशान कर रहे हैं उसमें भोपाल यूनिट का नाम भी अव्वल माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस यूनिट के कुछ अफसरों के नाम भी मृतक महिला ने अपने सुसाईड नोट में लिखा है तब से कुछ विभाग के अधिकारी तो डरे सहमें हुए है लेकिन कुछ विभाग के अफसर आज भी अपनी मनमानी करने से नहीं चूक रहे हैं। यह मामले विभगीय फेर बदल या फिर नेताओं की दादागिरी से जुड़े हैं। चर्चा है कि कुछ नेता अपने ही समर्थकोंं को उनकी मनमर्जी का काम न करने पर प्रबंधन पर दबाव बनाकर प्रताडि़त करने से नहीं चूक रहे हैं। यह चर्चाएं भेल कर्मी चौक-चौराहों पर करते नजर आयेंगे।

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