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आईएमएम विभाग के एक डीजीएम के जलवे

भोपाल

भेल कारखाने के इंडस्ट्रीयल मोटर्स मैन्युफैक्चरिंग ब्लॉक टू के एक एक उपमहाप्रबंधक के जलवे हैं। बिना इनकी इजाजत के कोई वेन्डर प्रवेश तक नहीं कर सकता। चर्चा है कि अपने चहेतों को उपकृत करने के लिए वह कई तरह के रास्ते निकाल लेते हैं। यही नहीं अपनों को अंदर लाने के लिए तीन कोटेशन डलवाकर एक को मनमाने ढंग से रेट भरवा कर काम दे डालते हैं। भले ही ब्लॉक के कर्मचारी खाली हाथ बैठे हों। उत्पादन के आखिरी पीरियड में यह कर्मचारी डीजीएम साहब को कोसते नजर आते हैं। हाल ही में उन्होंने लैथ मशीन में रोटर बनाने का ठेका अपने चहेते को दे दिया। चर्चा है कि संबंधित ठेकेदार भी ऐवरेज काम एक-दो घंटे का ही कर रहे हैं। हद तो यह पार कर दी कि अब कर्मचारियों को ठेकेदार के अनट्रेन्ड आदमियों को काम सिखाने की धमकी तक दी जा रही है। ब्लॉक की बात करें तो पहले यहां 1400 मोटर के आसपास बनती थीं। अब 500-600 मोटर बनाने के आर्डर तक नहीं है। हालात यह बन गए हैं कि अगले वित्त वर्ष में इस ब्लॉक को काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी। चर्चा यह भी है कि उक्त डीजीएम का एक टेंडर के मामले में प्रमोशन तक रोक दिया था। यहां तक की इस विभाग से तबादला भी कर दिया था, लेकिन यह साहब जुगाड़-तुगाड़ कर वापस आईएमएम में ही आ गए।

सीआईएम में सीवीसी गाइडलाइन का मजाक

भेल भोपाल यूनिट में फीडर्स ग्रुप के सीआईएम विभाग में सेंट्रल विजीलेंस कमीशन (सीवीसी) की गाइडलाइन का खुलकर मजाक उड़ाना आम बात हो गई है। कहने को तो यहां ई-1 से लेकर अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी सालों से जमे हैं, लेकिन उन्हें हटाने की जरूरत स्थानीय प्रबंधन या कॉरपोरेट ने जरूरत ही नहीं समझी। इसको लेकर विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म है। इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि कुछ माह पूर्व एक अपर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी का तबादला दूसरे विभाग में कर तो दिया, लेकिन वह आज भी अपने मूल विभाग में ही काम कर रहे हैं। यही नहीं उसे एक मशीन की मॉनिटरिंग के लिए विदेश (यूएसए) भेज दिया। विभाग के लोगों ने यह चर्चा थी कि उनके विदेश से लौटने के बाद शायद उनका तबादला दूसरे विभाग में कर दिया जाएगा, लेकिन इसके विपरीत यह अपर महाप्रबंधक अपना दबदबा बनाए हुए मूल विभाग में ही जमे हुए हैं। चर्चा है कि अब लोग उनके दबदबे से डरने लगे हैं। वह अब वेन्डर से लेकर एमएम विभाग तक यानि कहीं भी दख्लअंदाजी करने पहुंच जाते हैं। इससे अपने चहेते वेन्डरों को काफी फायदा पहुंचाने में सफल भी हुए हैं। इस विभाग में सीवीसी गाइडलाइन का पालन न होना यानि मजाक उड़ाना किसी के गले नहीं उतर रहा है।

बेचारा भेल का सीनियर इंजीनियर फिर रहा है मारा-मारा

बेचारे भेल भोपाल के टूल एंड गेज विभाग के एक सीनियर इंजीनियर की किस्मत ही खराब है। एक तो भेल के ही एक आर्टीजन ने उसकी फोर व्हीलर को टक्कर मार दी। टक्कर भी इतनी जबरदस्त थी कि वह बाल-बाल बचा। चूंकि दोनों ही भेल कारखाने में काम करते थे, इसलिए यह समझौता हो गया कि गाड़ी के मेंटेनेंस का खर्च आर्टीजन ही उठाएगा। बेचारे सीनियर इंजीनियर ने गाड़ी की मरम्मत करा ली और जब उसने आर्टीजन से मरम्मत गाड़ी को उठाने के लिए रकम मांगी, तो उसने रकम देने से ही इंकार कर दिया। सब मिलाकर जब सीनियर इंजीनियर इसकी रिपोर्ट संबंधित थाना गोविंदपुरा में दर्ज कराने पहुंचे तो पुलिस ने एफआईआर तो नहीं लिखी, एक सादा आवेदन लेकर उस पर एनसीआर कर उसे चलता कर दिया। अब पुलिस की आर्टीजन से क्या सांठगांठ हुई यह अलग बात है, लेकिन बेचारा सीनियर इंजीनियर को एफआईआर न लिखने के कारण दर-दर की ठोकरें खाने पड़ रही हैं। कहा यह भी जा रहा है कि एक सीएसपी ने तो उसे भरोसा तक दिलाया था कि तुम्हारी एफआईआर लिखी जाएगी, लेकिन सीनियर इंजीनियर की किस्मत ही खराब थी कि सीएसपी साहब का तबादला होगा और आर्टीजन के मजे हो गए।

सवा करोड़ की पुताई साहब के बंगलों पर

भेल टाउनशिप के क्वाटर और बंगलों की पुताई का आज से सवा साल पहले सवा करोड़ का ठेका पूर्व महाप्रबंधक मानव संसाधन के कार्यकाल में एक बाहर की कम्पनी को दिया गया था। मजेदार बात यह है कि सवा साल पूरे होने के बाद भी टाउनशिप के गोविंदपुरा, पिपलानी, हबीबगंज और बरखेड़ा में रह रहे कर्मचारियों के कुछ क्वाटर को छोड़ दें तो बाकी क्वाटरों में पुताई का काम अधूरा पड़ा हुआ है। ठेकेदार वाह-वाही लूटने के लिए अफसरों के बंगलों पर तो बेहतरीन पताई तर रहे हैं, लेकिन कर्मचारी आज भी पुताई के इंतजार कर रहे हैं। चर्चा तो यह है कि कुछ कर्मचारियों ने लंबे इंतजार के बाद अपने क्वाटरों में पीले रंग की पुताई कर ली है और इसी कलर की पुताई ठेकेदार भी कर रहा है। खबर तो यह भी है कि जिन कर्मचारियों ने अपने-अपने क्वाटरों में खुद पुताई कर ली है उनके बिल भी ठेकेदार ने काम होना बताकर लगा दिए हैं। गुणवत्ता विहीन और अधूरी पुताई को लेकर पूर्व जीएम एचआर ने सिविल अधिकारी और ठेकेदार को जमकर फटकार भी लगाई थी, लेकिन उनका तबादला होने के बाद सिविल अफसर और ठेकेदार फिर मनमानी पर उतर आए। अब कर्मचारियों को नए जीएम एचआर से अधूरी पुताई को पूरा करने और इसकी जांच कराने का इंतजार है।

विजिलेंस ने पकड़ा नेताओं ने छुड़ाया

भेल कारखाने में भी अनुशासनहीनता पार करते जा रहे है कुछ कर्मचारी नेता वह कार्यकर्ताओं पर प्रबंधन काफी मेहरबान है। उन पर कार्रवाई करने के बजाए नेताओं के डर से उन्हें बचाने का काम भी करने लगे हैं। हाल ही में ट्रांसफार्मर ब्लॉक के एक यूनियन कार्यकर्ता को भेल की विजिलेंस ने ऐसी हरकत करते हुए पकड़ा जिसका मामला थाने तक पहुंचना था। इसको लेकर एक यूनियन के नेताओं ने विभाग के ही चंद अधिकारियों के सामने प्रदर्शन करते हुए मामला रफा-दफा करने दबाव बना दिया। चर्चा है कि प्रबंधन ने आनन-फानन में भेल की विजिलेंस पर दबाव बनाते हुए मामला ही रफा-दफा कर दिया। इस खबर से ईमानदार कर्मचारियों में काफी रोष है, तो दूसरी यूनियन के नेता इस मामले को कॉरपोरेट की संज्ञान में लाने की कोशिश कर रहे हैं। यूं तो ऐसे एक नहीं कई मामले हैं, जो यूनियनों के दबाव के चलते दबा दिए जाते हैं।

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