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भेल के एक डीजीएम साहब का भोपाल मोह

भोपाल

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड भेल जैसी महारत्न कम्पनी ने भले ही प्रमोशन और ट्रांसफर पॉलिसी नई बना दी हो, लेकिन कुछ कर्मचारी और अधिकारियों को रास नहीं आ रही है। यहां तक की इस पॉलिसी से उनके परिजन भी परेशान हैं। मजबूरी जो भी हो लेकिन इसका पालन करने के लिए प्रमोशन के बाद तो अपनी यूनिट छोड़ना ही पड़ेगी। इसके चलते सिर्फ कर्मचारी ही नहीं बल्कि बड़े-बड़े अधिकारी भी परेशान दिखाई दे रहे हैं। कुछ ट्रांसफर रुकवाने, तो कुछ वापस आने के लिए अपने आकाओं की शरण में है। हाल ही में भोपाल यूनिट से एक डीजीएम स्तर के अधिकारी का तबादला भले ही पॉवर सेक्टर में कर दिया हो, लेकिन उनका भोपाल मोह अब भी नहीं छूट पा रहा है। परिजन को छोड़कर पॉवर सेक्टर गए यह डीजीएम जब भी भोपाल आते हैं, तो वह टाउनशिप में घूमकर हर सिविल आफिस के कामकाज की जानकारी लेते देखें गए हैं। बिना हेलमेट लगाए टू व्हीलर पर घूम-घूम कर वह यह जानने की कोशिश भी करते हैं कि फिलहाल टाउनशिप में कितन वर्क आर्डर हैं और कितने का बजट आया है। चर्चा है कि उन्हें आज भी यह भरोसा है कि 31 मार्च तक उत्पादन का काम निपटने के बाद उनकी भोपाल वापसी होगी।

भेल में बॉयोमेट्रिक सिस्टम बंद होने से बल्ले-बल्ले

जहां सारी दुनिया कोरोना वायरस से परेशान है, तो वहीं भेल के कुछ कर्मचारी इस वायरस के कारण उंगली लगाकर बॉयोमेट्रिक सिस्टम से हाजिरी लगाने वालों के बल्ले-बल्ले है। वैसे भी जब यह सिस्टम भेल कारखाने में लागू किया गया था, तो कर्मचारी नेताओं ने इस सिस्टम का जमकर विरोध किया था, लेकिन कॉरपोरेट ने किसी की एक नहीं सुनी और यह सिस्टम लागू कर दिया। इससे कारखाने में कर्मचारी ही नहीं बल्कि अधिकारियों की हाजिरी बढ़ गई और काम सुचारू रूप से चलने लगा। साथ ही कामचोरों को भी हाजिरी भरनी पड़ी, लेकिन जब से सरकार ने इस सिस्टम को कोरोना वायरस के चलते बंद कर दिया, तो समझो पंच कार्ड फिर से लागू हो गया। चर्चा है कि अब कामचोर कर्मचारी उत्पादन के आखिरी माह में भी अपने पंच कार्ड दूसरे कर्मचारियों को थमाकर बाहर घूमने से बाज नहीं आ रहे। इस पर कैसे लगाम लगाएं यह तो प्रबंधन ही नहीं समझ पा रहा है। एक ओर सरकारी फरमान, तो दूसरी ओर कामचोरों के बल्ले-बल्ले। दूसरी ओर अब लोग यह भी कहने लगे हैं कि भेल के पार्कों में हाथ मिलाकर और गले लगकर घूमने वालों पर भी ऐतियातन पाबंदी लगाएं, क्योंकि यहां मिलन समरोह के अलावा बच्चे भी घूमने आते हैं। असर तो यहां भी कोरोना का हो सकता है।

जब भेल का बे-दखली अमला खाली हाथ लौटा

गत दिवस भेल का बे-दखली अमला नगर प्रशासन विभाग के मुखिया के निर्देश पर लाव-लश्कर के साथ भेल टाउनशिप के बरखेड़ा स्थित एक मंदिर परिसर में बिना अनुमति के बन रहे कम्युनिटी हॉल के काम को रोकने जा पहुंचा। उसे क्या मालूम था कि यहां पहले से ही कुछ नेताओं के साथ समाज के लोग भी अमले को रोकने तैयार खड़े थे। जब इसे रोकने की कोशिश की तो बात काफी बढ़ गई। एक पूर्व पार्षद ने तो भेल के ईडी साहब ने निर्माण की हां कर दी है का हवाला देते हुए बे-दखली अमले को खरी-खोटी तक सुना दी, जबकि ईडी साहब ने इस तरह की बात ही नहीं की थी, लेकिन अमले ने बात बढ़ती हुई देख खाली हाथ वापस लौटने में ही अपना भला समझा। दरअसल भेल प्रशासन इस पूरे परिसर को अनाधिकृत मानता है, तो मंदिर के कर्ताधर्ता इसे वैद्य मानते हैं। यदि मामला अनाधिकृत है तो अब तक भेल प्रशासन ने संपदा न्यायालय को क्यों नहीं सौंपा, यह भी चर्चा का विषय है। दूसरी ओर भेल के एक पूर्व ईडी ने इस परिसर के निर्माण के लिए क्यों अनुमति दी, तब भेल प्रशासन सो रहा था। मजेदार बात तो यह है कि इस मंदिर समिति में भेल के अधिकारी-कर्मचारी भी पदाधिकारी हैं। अब तो लोग कहने लगे हैं कि यह मामला इसलिए आर-पार की लड़ाई बन गया है कि इसमें राजनैतिक दल के लोग भी हस्तक्षेप करने लगे हैं।

भेल सिविल विभाग की तुगलकशाही

एक तो सालों से भेल का सिविल अनुरक्षण विभाग बरखेड़ा डी-सेक्टर में संचालित हो रहा था, उस पर नगर प्रशासन विभाग के तुगलकी फरमान के चलते इस बरखेड़ा ई-सेक्टर में शिफ्ट कर दिया गया। मजेदार बात तो यह है कि भले ही सिविल आफिस ई-सेक्टर पहुंच गया हो, लेकिन इसका मेन स्टोर पुराने आफिस में ही रख दिया गया है। चर्चा है कि आए दिन स्टोर से सीमेंट, स्क्रैप, चौखट व अन्य सामान चोरी से बेचे जाने की खबर के बाद भेल प्रशासन की नजर में तो आ गया है, लेकिन आनन-फानन में अन्य के तबादले कर डाले। इस फेरबदल में भले ही हबीबगंज, पिपलानी और बरखेड़ा सिविल गेस्ट हाउस के कर्मचारियों को बदल डाला हो, लेकिन बरखेड़ा स्टोर कीपर को तो रहम बरसा ही दी है, और भी फेरबदल से प्रभावित किसी से कम नहीं हैं। इन पर भी कई आरोप लग चुके हैं। दरअसल यह टेक्निकल लोग कारखाने के अंदर तो काम आ सकते हैं, लेकिन बाहर यह वही करेंगे जो बरखेड़ा डी-सेक्टर सिविल के स्टोर इंचार्ज करते आ रहे हैं। जब नगर प्रशासन विभाग के बड़े साहब ही भेल टाउनशिप में हो रहे गलत कामों को नहीं पकड़ पा रहे हैं, तो टाउनशिप का ही भगवान मालिक है। कुर्सी पर बैठे-बैठे टाउनशिप को सुधारना मुश्किल काम दिखाई दे रहा है। इससे कर्मचारी नेता भी परेशान हैं।

भेल में कोरोना से बचाव के लिए क्रीम-साबुन की कमी

यूं तो भेल प्रशासन अधिकारी-कर्मचारियों के लिए हर माह क्रीम-साबुन जैसी कई सामग्री साफ-सफाई के मद्देनजर मुहैया कराता है। एक नेताजी की मानें तो जब से कोरोना वायरस का आगमन हुआ है तब से बॉयोमेट्रिक पंचिंग तो बंद कर दी, लेकिन क्रीम और साबुन की कमी ने सबको परेशान कर रखा है। जबकि कोरोना वायरस में हाथ धोना बहुत ही ज्यादा जरूरी है, ऐसे में अब कर्मचारी क्रीम और साबुन अपने घर से लाने का मन बना रहे हैं। चर्चा है कि यही एक रास्ता बचा है कोरोना वायरस से बचने का।

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