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कोरोना वायरस से खुली अमेरिका के सिस्टम की पोल, ट्रंप पर उठे सवाल

कोरोना वायरस के खतरे ने दुनिया में सबसे विकसित और संपन्न देशों की भी पोल खोल कर रख दी है. एक महीने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया था कि अमेरिका में कोरोना वायरस पूरी तरह से कंट्रोल में है लेकिन अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया है कि पूरी दुनिया को ठप कर देने वाले कोरोना वायरस का अगला केंद्र अमेरिका हो सकता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस के संकट को लंबे समय से खारिज करते आए हैं. जब हेल्थ एक्सपर्ट्स दुनिया को पूरी तैयारी से रहने की सलाह दे रहे थे तो अमेरिका की सरकार ने कोरोना के खतरे को लगातार कम करके दिखाने की कोशिश की. ट्रंप ने एक बयान में ये भी कहा था कि ये एक जादू की तरह गायब हो जाएगा.

अमेरिका में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों ने सरकार की आधी-अधूरी तैयारी और अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में अव्यवस्था का पर्दाफाश कर दिया है. अमेरिका में अब तक 54,941 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं जबकि 784 लोगों की मौत हो चुकी है. सोमवार को सिर्फ एक दिन में ही यहां 100 लोगों की मौतें हो गईं. कोरोना के मामलों में ये तेजी हैरान करने वाली है क्योंकि दो सप्ताह पहले ही अमेरिका में कोरोना वायरस के 2000 से भी कम मामले थे. कोरोना की इसी तेजी को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी कर दी है कि अमेरिका कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट बने इटली जैसे देशों को भी पीछे छोड़ सकता है.विश्लेषकों को आशंका है कि अमेरिका में कम टेस्टिंग की वजह से कोरोना वायरस संक्रमण के तमाम मामले अभी तक सामने नहीं आ पा रहे हैं और कुछ वक्त में यह बड़ा संकट बनकर उभरेगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए कई हफ्तों से दुनिया के तमाम देशों को केवल दो ही सलाह दे रहा है- एक सोशल डिस्टैंसिंग और दूसरी कोरोना से संक्रमित हर एक शख्स की पहचान. लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर आपको कोरोना का शक है तो आप घर पर रुकिए. संक्रमण में आने के गंभीर खतरे का सामना कर रहे लोगों को भी टेस्ट कराने के लिए हतोत्साहित किया जा रहा है जब तक कि उन्हें सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत ना हो. अमेरिका में तमाम लैब होने के बावजूद सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने टेस्ट कराने में देरी की है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह कई देशों में सही साबित हुई है. उदाहरण के तौर पर, कोरोना वायरस पर काफी हद तक काबू पाने वाला दक्षिण कोरिया फरवरी से अब तक 274,000 लोगों का टेस्ट कर चुका है और उसने आक्रामक रवैया दिखाते हुए कम लक्षण या बिना लक्षणों वालों की भी जांच की है. जबकि अमेरिका ने अभी तक सिर्फ 82000 टेस्ट किए हैं और इनमें से भी अधिकतर टेस्ट पिछले कुछ सप्ताह में किए गए हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्यक्ष एडहैनम गेब्रियेसस टेड्रॉस के मुताबिक, कोरोना वायरस संक्रमण की चेन को पूरी तरह से तोड़ने के लिए संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए हर एक शख्स की जांच बेहद जरूरी है और जरूरत पड़ने पर उसे आइसोलेट भी किया जाना चाहिए. ऐसा किए बगैर सोशल डिस्टैंसिंग के नियमों में ढील देते ही कोरोना वायरस फिर से लौट आएगा. न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपने एक संपादकीय में लिखा है, अमेरिकी अधिकारी इससे सबक लेना नहीं चाह रहे हैं. कई शहरों में जहां वायरस तेजी से फैलने लगा है और कुछ दिन में ही केस दोगुने हो रहे हैं, वहां सोशल डिस्टैंसिंग के साथ-साथ WHO के दिशानिर्देश के अनुसार संक्रमण के संभावित खतरे वाले लोगों को ढूंढकर जरूरी टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं. कई जगहों पर तो कुछ डॉक्टर्स के भी कोरोना संक्रमित होने का शक है लेकिन उन्हें काम जारी रखने की सलाह दी जा रही है.

चीन में जब अधिकारियों ने महसूस किया कि कोरोना वायरस के 80 फीसदी केस ऐसे हैं जिनमें परिवार वालों को घर के ही सदस्य से संक्रमण फैला. इसके बाद चीन ने बड़े पैमाने पर आइसोलेशन यूनिट बनाए ताकि ऐसे लोगों को उनके करीबियों से अलग रखा जा सके. वहीं, दक्षिण कोरिया में जब एक चर्च में कोरोना वायरस का मामला सामने आया तो सभी स्वास्थ्यकर्मियों ने चर्च के 200,000 सदस्यों का कॉन्टैक्ट ट्रेस करना शुरू कर दिया. उसके बाद सभी लोगों को निगरानी में रखा गया और जिनमें लक्षण दिखाए दिए, उन्हें आइसोलेशन सेंटर भेजा गया. लेकिन अमेरिका में संक्रमित लोगों या इसके खतरे की जद में आए लोगों को क्वारंटीन में रखने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने की भी कोई कोशिश नहीं की जा रही है.

मेडिकल आपूर्ति की कमी की वजह से तमाम डॉक्टर्स और नर्स जरूरी उपकरण ऑनलाइन मंगाने को मजबूर हो गए हैं. ड्रेस बनाने वाले लोगों से हॉस्पिटल वर्करों के लिए मास्क बनाने के लिए कहा जा रहा है. एक हॉस्पिटल में जब आपूर्ति की कमी हुई तो एक एनेस्थिसियोलॉजिस्ट ने इलाज के दौरान सिर को प्लास्टिक बैग से ढका. इसके अलावा, सिक पे ना मिलने की वजह से तमाम बीमार लोग कोरोना वायरस के खतरे के बावजूद काम करने को मजबूर हैं.

न्यू यॉर्क सिटी कोरोना वायरस के मामलों की सुनामी का सामना कर रहा है. न्यू यॉर्क में 2600 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं जबकि 200 लोगों की मौतें हो चुकी हैं. देश के अन्य हिस्सों की तुलना में यहां वायरस का अटैक रेट पांच गुना ज्यादा है. न्यूयॉर्क प्रशासन दुनिया भर से वेंटिलेटर्स, मास्क और सूट मंगा रहा है क्योंकि आने वाले तीन हफ्तों में यहां कोरोना वायरस की वजह से हेल्थ इमरजेंसी की स्थिति बन सकती है. मैनहट्टन में कॉन्फ्रेंस के लिए बनाए गए द जैविट्स सेंटर को ही एक हॉस्पिटल में तब्दील कर 2000 बेड लगा दिए गए हैं.

न्यू यॉर्क के गवर्नर एंड्रू कुआमो ने ट्रंप प्रशासन की तीखी आलोचना की है. उन्होंने कहा, “आप 400 वेंटिलेटर्स भेजकर शाबाशी की उम्मीद कर रहे हैं? हम 400 वेंटिलेटर्स का क्या करेंगे जब हमें 30,000 वेंटिलेटर्स की जरूरत है. आप समस्या की गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं जबकि कोई भी समस्या अपनी गंभीरता से ही परिभाषित होती है.”

न्यूयॉर्क के कुआमो समेत तमाम नेता जहां मरीजों की बढ़ती संख्या से चिंतित हैं, वहीं ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने के लिए मौजूदा लॉकडाउन के खत्म होने पर नियमों में ढील देने के लिए तैयार है.ट्रंप ने सोमवार को कहा, “हमारा देश बंद होने के लिए नहीं बना है. ये ऐसा देश नहीं है जिसे इसके लिए बनाया गया. अमेरिका जल्द फिर से कारोबार के लिए खुल जाएगा. मैं महीनों तक इंतजार नहीं करूंगा.”

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