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US को 2 लाख मौतों का डर, बढ़ी गाइडलाइन्स

वॉशिंगटन

सुपरपावर अमेरिका इस वक्त कोरोना वायरस के सबसे बड़े हमले का सामना कर रहा है। दुनिया में सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव लोग अमेरिका में हैं और मरने वालों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी दो हफ्ते के अंदर यह अपने चरम पर पहुंचेगा। ऐसे में अब तक काफी ढीला रवैया अपनाती रही देश की डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने वायरस से बचाव के लिए करीब 15 दिन पहले जारी किए गाइडलाइन्स को 30 और दिनों के लिए बढ़ा दिया है। सरकार को डर है कि इस खतरनाक वायरस की चपेट में आने से देश में 1 से 2.4 लाख लोगों की मौत हो सकती है।

डरावना है संभावित मौतों का आंकड़ा
अभी तक इस त्रासदी से अमेरिका को महफूज साबित करने की कोशिश करते रहे ट्रंप ने साफ-साफ कहा है कि आने वाले दो हफ्तों में देश मुश्किल हालात से गुजरने वाला है। ट्रंप के बाद उनकी टास्क फोर्स के टॉप हेल्थ ऑफिसर डॉ. डेबोरा बर्क्स ने कहा कि गाइडलाइन्स का पालन करने के बाद भी 1,00,000-2,40,000 लोगों की मौत होने की आशंका बनी रहेगी।

हालांकि, इसे पहले से तय आंकड़ा नहीं माना गया है और फिलहाल न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी के ट्रेंड्स की वजह से ऐसा लग रहा है लेकिन बावजूद इसके स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है। अमेरिका में अब तक 188,578 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं जबकि 3,890 की मौत हो चुकी है।

30 दिनों के लिए बढ़ीं गाइडलाइन्स
एक ओर जहां भारत में 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान किया गया है, वहीं ट्रंप ने 16 मार्च को जारी की गईं गाइडलाइन्स को 30 और दिन तक बढ़ाने का फैसला किया। सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए वायरस को मात देने की मुहिम चलाई जा रही है। इसके तहत लोगों से कहा गया है-

  • अगर आप बीमार हैं तो काम पर न जाएं, बच्चों के बीमार होने पर उन्हें स्कूल भी न भेजें। अगर घर में कोई कोरोना पॉजिटिव पाया गया हो तो परिवार का कोई भी शख्स बाहर न जाए। इन तीनों ही केस में अपने मेडिकल प्रोवाइडर से जरूर बात करें।
  • बुजुर्गों से खासतौर से घर पर रहने और दूसरे लोगों से दूर रहने के लिए कहा गया है। ऐसे लोगों से भी घर में ही रहने के लिए कहा गया है जिन्हें इस वायरस का ज्यादा खतरा हो सकता है। ऐसे लोग जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई बीमारी है, जैसे फेफड़ों या दिल की समस्या या इम्यूनिटी से संबंधित कोई समस्या।
  • यह भी साफ किया गया है कि युवा और सेहतमंद लोग भी खतरे से बाहर नहीं हैं और उनकी वजह से दूसरों को भी खतरा हो सकता है। इसलिए वे अपनी ओर से भी वायरस को रोकने में मदद करें।
  • क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री, जैसे हेल्थकेयर और फार्मा, या फूड सप्लाई से जुड़े लोगों का काम पर जाना जरूरी है। ऐसे में कर्मचारी और ऑफिस दोनों को काम पर सेहत का ध्यान रखने के लिए जरूरी बचाव करना होगा।
  • 10 से ज्यादा लोग इकट्ठा होने से बचें। बार, रेस्तरां और फूड कोर्ट में खाने-पीने से बचें, ड्राइव-थ्रू, पिक-अप या डिलिवरी ऑप्शन्स का इस्तेमाल करें। जितना हो सके, ट्रैवल, शॉपिंग या सोशल विजिट्स करने से बचें।
  • नर्सिंग होम या रिटायरमेंट या लॉन्ग-टर्म केयर फसिलटी में बेहद जरूरी मदद के लिए जाना हो तो ही जाएं।
  • साफ-सफाई का ख्याल रखें। किसी चीज को छूने के बाद खासतौर से हाथ अच्छी तरह से धोएं और चेहरा छूने से बचें। खांसते-छींकते वक्त टिशू का इस्तेमाल करें या कोहनी के अंदर के हिस्से से ढकें। ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सामान को डिसइन्फेक्ट करें।

भारत में भी ‘सोशल डिस्टेंसिंग’
भारत में नैशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने भी घरों और वर्कप्लेस पर गाइडलाइन्स फॉलो करने के लिए कहा है। लोगों से घर में रहने, बाहर से किसी के घर में न आने, ढेर सारे फ्लूइड्स लेने और साबुन से हाथ धोने जैसी सावधानियां बरतने के लिए कहा गया है। साथ ही, बुखार, जुखाम या खांसी होने पर सरकारी फसिलटी में जाने को भी कहा गया है। वर्कप्लेस पर भी सावधानियां बरतने के लिए कहा गया है। मास्क की व्यवस्था सुनिश्चित करने और बेहद जरूरी ट्रैवल की स्थिति में, जिस जगह जाना है वहां कोरोना को लेकर सावधानियां बरतने के लिए भी कहा गया है।

नैशनल लॉकडाउन का बड़ा फैसला
अमेरिका से उलट भारत में नैशनल लॉकडाउन भी घोषित कर दिया गया है। इसके चलते गैर-जरूरी सर्विसेज या गुड्स इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों को काम पर जाने की इजाजत नहीं है। स्कूल, कॉलेज, इंस्टिट्यूट्स, मॉल, रेस्तरां, धार्मिक स्थल सब पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। सिर्फ बेहद जरूरी राशन, सब्जी या दवा जैसे स्टोर्स ही खुले हैं। इनसे जुड़े कर्मचारियों को काम पर जाने की इजाजत है। होटलों और होमस्टेज को ऐसे लोगों के लिए खोला गया है जो लॉकडाउन में फंस गए हैं। इस लॉकडाउन का सख्ती से पालन नहीं करने पर सजा का प्रावधान भी है।

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