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भारतीय योग अनुसंधान केन्द्र भोपाल ने की कोरोना की दवा इजाद

कोरोना वायरस का इलाज गोल्ड वॉटर, योग और वैदिक पद्धति से संभव : आचार्य शनकुशल

भोपाल

चीन में फैले कोरोन वायरस को लेकर पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। ये वायरस मानव जाति के लिए न केवल खतरा बना हुआ है, बल्कि चिंता का विषय भी बना हुआ है। इस अंजान वायरस की चपेट में चीन के अलावा सारे दुनिया भी आ सकती है। विज्ञान ने इस अंजान वायरस को कोरोना नाम दिया है। वहीं वल्र्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे नोबल कोरोना वायरस का नाम देकर नवाजा है, लेकिन इस वायरस का इलाज भारतीय योग पद्धति और वेदों के हिसाब से इस अंजान वायरस का इलाज गोल्ड वॉटर, योग, वेद और जड़ीबूटियों से संभव होना बताया है। इसका खुलासा एक पत्रकार वार्ता में रायसेन रोड भोपाल स्थित भारतीय योग अनुसंधान केन्द्र के डायरेक्टर आचार्य हुकुमचंद शनकुशल ने किया है।

श्री शनकुशल का मानना है कि गोल्ड वॉटर फोर-वे से इसका ट्रीटमेंट किया जा सकता है। उनका मानना है कि यह गोल्ड वॉटर हमारी कोषा में पहुंचकर वायरल आरएनए, डीएनए और प्रोटीन को नष्ट कर रहा है। इसका इलाज सिर्फ गोल्ड वॉटर से ही किया जा सकता है। और यही इसे कोषा से बाहर निकाल सकता है। दूसरा वायरस इस बीमारी में मस्तिष्क को भ्रमित कर रहा है। इसे जागृत करने के लिए कामधेनु गाय का गौलोचन, केसर, अकुए का दूध और चावल का आटा मिलाकर सुंघाने से ही संभव है।

तीसरी तकलीफ मरीज को श्वास लेने में हो रही है। इसके लिए काला धतुरा, अकुए के फूल, भांग की पत्ती, सत्यानाशी के बीज और अपामार्ग की जड़ी का धुंआ (धुनि) से संभव है। चौथी खास बात यह है कि ये कोरोना वायरस गले की नलि में खराश पैदा कर लीवर को नुकसान पहुंचा रहा है। इसके लिए यह जरूरी है कि हीमोग्लोबिन बढ़ाने और लीवर के फंगशन को सही करने के लिए आंवला, बहेड़ा, पारीजात और गुड़हल का पुष्प का शरबत बनाकर पीड़ित मरीज को पिलाना होगा। इन सब उपाय के बाद वायरस का असर धीरे-धीरे कम होता जाएगा। मृत्यु की ओर अग्रसर मरीज जीवित अवस्था में वापस आ सकता है।

इसकी पुष्टि यजुर्वेद के तीन सूत्रों में की गई है। यजुर्वेद के मुताबिक जब दुनिया को यही नहीं मालूम है कि ये कौन सा वायरस है और इसकी दवा का इस्तेमाल किस तरह किया जाए, तो विज्ञान भी इस बात को कैसे समझ सकता है। इसलिए यजुर्वेद के तीन सूत्रों का पालन करते हुए इस संस्थान में काफी खोज के बाद अज्ञात वायरस जिसका नाम विज्ञान ने कोरोना वायरस दिया है उस दवा को सिर्फ खोजा ही नहीं है, बल्कि उसके इलाज के लिए दवा का निर्माण भी किया गया है, जो इस वायरस से पीड़ित को सही इलाज मिलने पर मुक्त कर सकता है।

यजुर्वेद के तीन सूत्र जिससे मरीज अज्ञात बीमारी कोरोना से मुक्ति पा सकता है

1. ॐ मुंचामी त्वा हविषा जीवनाए कमज्ञात यक्ष्मादुत राजयक्ष्मात् ग्राहिर्जाग्राह यदि वैतदेनम् तस्या इन्द्राग्नि च मुमुक्तमैनम्।

2. ॐ यदि क्षितायुर्यदि व परेतोयदि मृत्योरन्तिकम् गीत ऐव तमा हरामी निकतेतपस्थात अश्पार्शमेनम् शतशारदाय।

3. ॐ सहस्त्राक्षेण शतशारदेन शतायुशा हविशा हार्षमेनम् शतम् यथेमम् शरदोनयातीन्द्रो विश्वस्यदुरितस्य पारम्।

अर्थात्…
पहले सूत्र में यह बताया है कि वह सूक्ष्म जीव जिससे आप अंजान हैं वह कभी प्रभाव डालता है और मृत्युकारक बनता है जो आरएनए और डीएनए प्राणउर्जा को रोक रहा है

दूसरा सूत्र यदि इसे उम्र कम हो रही है और आयु वृद्धि करना है तो आप इंद्र (पानी) और अग्नि (आग) से इलाज संभव है

तीसरे सूत्र के मुताबिक इन दो सूत्रों का पालन किया गया तो न केवल आयु में वृद्धि होगी, बल्कि इस रोग से निजात मिल सकता है।

इन ऋचाओं से चिकित्सा संभव है। इसमें सर्वप्रथम औषधि को संस्कारित कर भावना देना होगी। जिससे मन चेतन होगा अर्थात औषधि जड़ से चेतन होगी। औषधि की दिशा और काल के ज्ञान से तीन कारक द्रव की कमी पूर्ण कर आत्मा को सुरक्षित किया जा सकता है। इन विषाणुओं को ब्रह्मांडीय तत्व जिससे इसे बताया जो सोना है इसकी उपस्थिति जैविक कोषा में पहुंचाकर इन विषाणुओं से हानि होने को रोका जा सकता है।

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