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कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए लेब को लैंड पर लाना होगा

आज का विज्ञान क्या इतना विकसित है जो कोराना से हार रहा है य और उसे विकसित होने के लिए भारतीय प्रयोग शाला के ज्ञान को आधार बनाना पड़ेगा।

लैब को लेण्ड पर लाना
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने एक नारा दिया था वह था लैब को लेण्ड पर लाना है तभी देश विश्व में अग्रणी रहेगा और देशवासी आनंद, शांति और खुशहाल जीवन व्यतीत कर जहां से आया वहीं वापस चला जाएगा और जीवन सफल होगा।

मानसिक जीवन के आरंभ से ही हर देश और काल में मानव इन्हीं समस्याओं से लड़ रहा है समय-समय पर समस्याओं के समाधान के लिए व्यक्ति समाज और राजा सभी ने समय-समय पर प्रयोग कर आनंद शांति और खुशहाली के साथ मोक्ष प्राप्त किया इसे ही हम लेब नाम से जाने तथा लेण्ड पर लाने के लिए उन्होंने समाज को सिखाया तथा राजा ने अपनाकर शांति स्थापित की अब सोचे आज के वैज्ञानिकों ने जो जो खोजें कि उनका कब कहां उपयोग होना है।  सर्वप्रथम हम खुद को समाज और देश को देखें उसमें मुख्यता चार ही विचारधाराएं हैं जो सुख शांति दे सकती है।

प्रथम वर्ग है अर्थाति अर्थात सभी समस्याओं का समाधान अर्थ से किया जा सकता है अर्थात आर्थिक विकास मूल मंत्र रहा और कहा ”सर्व सुख काञ्चनस्थि” और भारत ने इतनी खोजे करी और विकास लेब में किया जिसमें सोना बनाया राजा वली अपने वजन का सोना कढ़ाई में कूदकर बना लेते थे।

चाणक्य ने 17 प्रकार का स्वर्ण बनाया तथा देश में हीरा, पन्ना, पुखराज, नीलम विश्व का सबसे अच्छा खोजा और भारत को सोने की चिड़िया नाम विश्व ने दिया। उसी  लेब को लेण्ड  पर लाना है इस वृति के विश्व में •०२% ही है जो यह जानते हैं और विश्व का संचालन कर रहे हैं।

दूसरा ग्रुप या समुदाय आर्ती (अर्थात दुखी रोगी) असहाय वर्ग आता है जो ६०% है आज की वैज्ञानिक लेब ने इंसान के जीवन को बड़ा नहीं पाय परंतु भारतीय ज्ञान ने आयुर्वेद लेब में अमर कर बताया मुर्दे को जिंदा किया और अंग काट कर दूसरे जीव का अंग लगा कर जिंदा किया जिसमें गणपति, और बिना सर के केकड़ा सोचो आधुनिक युग में आयुर्वेद लैब से मुर्दे को जिंदा करने वाले ज्ञान को लेण्ड पर लाना है जो आयुर्वेद शिक्षा बिना संभव नहीं।

तीसरा ग्रुप या समुदाय जिज्ञासु का आता है जो २०% ही होंगे जो सब रहस्य और तरीका सीखना चाहते हैं जिनमें भारत ही एक देश है जहां संपूर्ण जिज्ञासाओं को शांत करने हेतु ४ वेद, १०८ उपनिषद, १८ पुराण, गीता, योग दर्शन आदि का लैब रिसर्च रूप में वर्णन है क्यों उसकी शिक्षा नहीं दी जाती इसी ज्ञान के कारण भारत विश्व गुरु से जाना जाता था।

चौथा और अंतिम ग्रुप और समुदाय ज्ञानी वर्ग का है उसमें मात्र गुरु को लैब रूप में मान शिष्यों ने शांति पाई आज गुरु नहीं गुरु खोजना पड़ता है राजा को कार्य सोंपना पड़ता है तब गुरु की महिमा होगी जो बताई है “गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु” और गुरु ही महेश्वर है क्या ऐसे गुरु है अगर है तो क्या कमी होगी भारत में चार प्रयोगशालाय थी हैं और रहेंगी इन्हें लेण्ड पर लाना है।

भारतीय प्रयोगशालाओं का निष्कर्ष जानिएतब आपको स्वयं पता चलेगा कि आज के आधुनिक विज्ञान से पुष्ट होता है या नहीं। सर्वप्रथम अर्थ को ले जिससे वर्तमान की विश्व समस्या हल होवेंगी।

भारतीयज्ञान-अर्थ :- अकुला एक से अनेक हुआ और आगे कहा जो विद अर्थात भासता है वही अर्थ पद से जाना जाता है। यही शरीर और ब्रह्मांड का निर्माण करता है इसी की आवश्यकता होती है उसका विनिमय कार्य द्रव्य से होता है कार्य द्रव का मानक स्वर्ण है अतः ब्रह्माण्डीय पदार्थों का विनिमय सोने से किया जा सकता है भारतीय प्रयोगशाला ने ब्रह्मा जी द्वारा ब्रम्हांड की रचना ही सोने के अण्डे से करी इससे पूर्ण कोई परिभाषा नहीं। मानव जीवन की उत्पत्ति स्थिति और मृत्यु का कारण स्वर्ण है आज विज्ञान भी संतान उत्पत्ति और संपूर्ण तंत्र तथा मानसिक क्रियाएं स्वर्ण आयनों से ही संभव बताया है अतः भारतीय प्रयोगशाला को लेण्ड पर लाना होगा।
दूसरा समुदाय दुखी और रोगियों का है जिनको चिकित्सा चाहिए चिकित्सा इतना व्यापक क्षेत्र है जिसमें आबादी के ६०% लोग ग्रसित हैं सभी को स्वस्थ रहना है और ३ अरब साल से मनुष्य जीने की इच्छा पूर्ण करता रहा है और निरोग रहता रहा है समय समय पर चिकित्सा में चमत्कारी प्रभाव दिखाएं हैं जो लैब तक आ गए थे जिसमें कर कर दिखाया है जैसे मियां मिर्च सारंगी वादक भगवान बुध और वशिष्ठ तथा विश्वामित्र का कायाकल्प हुआ यह सभी चिकित्सा प्रयोगशाला तक रही उदाहरण है इन्हें ही,
°परंपरागत चिकित्सा
°ग्रामीण चिकित्सा
°आयुर्वेद चिकित्सा
°प्राकृतिक चिकित्सा
आदि अनंत नामों से आदि से आज तक जानते हैं अतः इस समय पर चिकित्सा को लेण्ड पर लाना है।

तीसरा बौद्धिक स्तर आता है जिसमें मनुष्य कार्य करने के पूर्व निश्चय करता है कार्य भी किया जा चुका है जिसमें प्रश्न ही समाप्त हो जाते हैं जिनको लैब तक पहुंचाया गया है जिसमें वेद पुराण और भारतीय उपनिषद दर्शन गीता आदि आते हैं उन्हें ही उद्दमियों ने लैब को लेण्ड पर लाने में अलग अपने ढंग से पेश किया और ग्रुप बनाया इसमें कोई त्रुटि नहीं यह परंपरा है। समय आ गया है नई परंपरा और नए तरीके से जिज्ञासाओं को संतुष्ट करने का।

चौथा ज्ञानी या गुरुओं का आता है आदि से गुरुओं को महत्व दिया है और राम हो या कृष्ण या चंद्रगुप्त सभी के गुरुओं ने राज चलाने की वही ब्रह्मांड नीति को नए ढंग से कुछ जोड़ घटा कर शांति सुहृदयता और प्रकृति का आनंद लेने आने की इच्छा पूर्ण करने के तरीके बताए।

इस प्रकार चारों वर्ग जब संतुष्ट हो गए तो धरती स्वर्ग हो जाएगी परंतु माध्यम कौन होगा उसको आज के विकसित युग ने उद्दमी पद दिया जिसका तात्विक अर्थ है लैब को लेण्ड पर लाना जिसमें वही पुराना काम है नए परिवेश में नए ढंग से आकर्षक रूप रूप में प्रस्तुत करना है ठीक इसी प्रकार जैसे दांतों के लिए दतौंन मंजन से टूथपेस्ट आदि का निर्माण आता है। हमारे देश में उद्दमी जंगल गांव और शहरों में रहता है राजा सभी को सुखी देखना चाहता है अतः सोचें पहला उद्दमी को मालिक ने जंगल में ही उतारा सनातन धर्म में मनु और इस्लाम में आदम हब्बा जंगल ही में उतरे थे। सोचो क्यों आज आधुनिक युग में प्रत्येक व्यक्ति अपनी संपूर्ण आवश्यकताएं जंगल से ही पूरी करता है सर्वप्रथम आवश्यक आवश्यकता रोटी, कपड़ा, मकान इन तीनों का स्रोत जंगल है औषधि जंगल में मिलती है जिज्ञासा कर कर सीखे जंगल से पूर्ण होगी तथा गुरु का वास भी जंगल में ही होता है कभी सोचा आर्थिक रूप से विश्व का सबसे धनी आदमी जंगल से प्राप्त संपदा से ही होता है चाहे हीरा, सोना, मोती आदि हो या अन्य अतः सबसे अहम भूमिका Forest Base Economy होगी उसी के उद्दमी देश को सुखी करेंगे। उद्दमी को यह मालूम होना चाहिए कि जंगल से वनस्पति रूप में पेड़ नष्ट होते हैं पेड़ फल देते हैं पेड़ पतझड़ भी करते हैं अतः Forest produce base economy फिर Forest deteriorate base और Forest waste देश को मालामाल कर देगी।

इन तीनों के बाद agro based economy आती है। जंगल में जो होता है उसे कई गुना खेती से करें इसके बाद चिकित्सा पर आधारित अर्थव्यवस्था आती है।

हमारे देश में जंगल गांव और शहर में रहने वालों की अनुपातिक संख्या १:२४:१२ है। यह पूरी जनसंख्या लेण्ड है और उसकी आवश्यकता सुखी शांत जीवनखुशहाली स्वास्थ्य आनंद लेकर शांतिपूर्ण जहां से आया वहां चला जावे यह उसका अभीष्ट है।
भारत ने ३ अरब साल में सभी प्रकार की प्रयोगशालाएं निर्मित करी थी जिनकी खोजे हैं परंतु समय की आवश्यकता ने उन्हें बंद कर दिया परंतु ज्ञान विज्ञान के रूप में विद्यमान है आवश्यकता है आज की प्राथमिकता की उसके लिए उद्दमी तैयार कर विश्व शांति स्थापित की जा सकती है। इसके लिए शिक्षा में समूल परिवर्तन करना होगा जिसमें उद्दमी तैयार किए जावे जिसका सिद्धांत होगा “कर कर सीखे” दूसरा Education with free lodging and boarding अर्थात गुरुकुल पद्धति से होना चाहिए जिसका अभिप्राय उद्दमी बनाया हो।

आज के उद्दमी का पहला नारा
(१) Make money from waste
दूसरा नारा
(२) Input science and technology to convert low grade into high grade just coal into dimond यह प्रथ्वी लेब ही है जहां Aluminium oxide माणिक, पुखराज और नीलम बनता है। यह भी लैब ही है आज भी विज्ञान कि लैब यही कर रही है परंतु बहुत खर्चीला और कठिन है परंतु भारतीय लैब घर पर बना सकती है लैब जमीन में कोयला समय अंतराल में डायमंड बन रहा है उसे देख अमेरिका ने कोयले से हीरा बनाया है।

आयुर्वेद में रसायन और पारद संहिता में यह सब रहस्य हैं इनकी लैब और उद्दमी बनाना होगा। दूसरा उद्दमी आयुर्वेद का बनाना होगा जो अमृत बनावे तीसरा उद्दमी विद्यालयों की स्थापना का बनाना होगा जो वैदिक ज्ञान को मूर्त रूप दे चौथा उद्दमी गुरुओं की परंपरा पर बनाना होगा इसमें मुख्य भूमिका राज आश्रय की ही होगी क्योंकि सभी कार्य राजाश्रेय से चलते हैं अतः राजा को युधिष्ठिर राम विक्रमादित्य हरिश्चंद्र जैसे चाहिए होंगे तभी रावण और कंस जैसे समाप्त होंगे हमें यथा राजा तथा प्रजा के नारे को साकार होता देखना है।
आचार्य शनकुशल

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