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कूड़ा बीनने वाले की मौत, रिश्तेदारों ने झोपड़ी में ही दफना दिया

भागलपुर

बिहार के भागलपुर में एक कूड़ा बीनन वाले युवक की मौत (Death) के बाद उसके रिश्तेदारों ने उसका शव झोपड़ी के आंगन में ही दफना दिया। घटना इशाकचक थाना क्षेत्र के सर्वमंगला काली स्थान मन्दिर के पास की है। घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकाला और आगे की जांच के लिए विसरा सुरक्षित रखने के बाद अंतिम संस्कार करा दिया। हालांकि, पुलिस ने परिवार के इस दावे को खारिज कर दिया है कि गरीबी की वजह से उन्होंने झोपड़ी में ही शव को दफनाया था।

इशाकचक पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार सुधांशु ने बताया, “गुड्डू मंडल को मिर्गी के दौरे पड़ते थे और उसे नशे की भी लत थी। शनिवार को सुबह झोपड़ी में उसे मृत पाया गया।” उन्होंने बताया कि मंडल झोपड़ी में अकेला रहता था और शादी के 10 साल बाद पत्नी उसे छोड़कर, कुछ रिश्तेदारों के साथ अलग रहती थी।

रिश्तेदारों ने झोपड़ी में कब्र खोदकर दफना दिया शव
सुधांशु ने बताया, “स्थानीय लोगों के मुताबिक शुक्रवार को मंडल को मिर्गी का दौरा पड़ा था और उसने कुछ नशीला पदार्थ भी लिया था। लोगों ने दिन में उसके मुंह से झाग निकलते हुए देखा था। हालांकि, रिश्तेदारों का दावा है कि रात में उसकी तबीयत में सुधार देखा गया था।” उन्होंने बताया कि रिश्तेदारों को जैसे ही मंडल की मौत का पता चला, उन्होंने झोपड़ी में ही कब्र खोदकर उसे दफना दिया। सुधांशु ने बताया कि एक पड़ोसी ने घटना के कुछ घंटे बाद ही इसकी जानकारी पुलिस को दी। हम तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे और शव को कब्र से निकालकर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान भूमि लेकर गए।

मामला अभी नहीं किया गया दर्ज, रिपोर्ट आने का इंतजार
निरीक्षक ने बताया कि कुछ पड़ोसियों को रिश्तेदारों पर हत्या करने और सबूत मिटाने के लिए शव दफनाने का शक है। उन्होंने कहा कि हमने अभी तक हत्या का मामला दर्ज नहीं किया है लेकिन विसरा को सुरक्षित रख लिया है और रिपोर्ट आने के बाद उसी के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। सुधांशु ने कहा, “कुछ रिश्तेदारों ने दावा किया कि गरीबी की वजह से वे अंतिम संस्कार का खर्च वहन नहीं कर सकते थे इसलिए उनसे जो बन पड़ा उन्होंने किया। लेकिन उनका दावा विश्वसनीय नहीं लगता।”

उन्होंने कहा कि कूड़ा बीनने वाले शख्स की मौत के बाद उसके रिश्तेदारों ने न तो पड़ोसियों से मदद मांगी और न ही प्रशासन को इसकी जानकारी दी। जबकि ऐसे मामलों में बिना कोई राशि लिए मदद की जाती है। आश्चर्यजनक रूप से रिश्तेदारों ने कोई मदद नहीं मांगी। मामले की जांच की जा रही है।

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