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कस्तूरबा अस्पताल के हाल बेहाल

भोपाल

कहने को तो भोपाल शहर के कई अस्पताल कोरोना महामारी के कारण बेहतर परफारमेंस देने की कोशिश कर रहे है तो दूसरी ओर भेल का प्रतिष्ठित कस्तूरबा अस्पताल का हाल बेहाल है। कर्मचारी कहने लगे है कि भगवान ही मालिक है इस अस्पताल का। दरअसल कोरोना संक्रमण के चलते ना तो यहां के वरिष्ठ डाक्टर अपनी अहम भूमिका निभा पा रहे है और न ही स्टाफ इससे मरीज परेशानी का सामना कर रहे है। मजेदार बात तो यह है कि ठेकेदार के माध्यम से काम कर रहे 14 पैरामेडिकल स्टाफ में से महज 4 को ही पीपीई किट मिल पा रही है। वहीं आर्डनरी मास्क दिये जाने की चर्चाएं भी गर्म है। अब तो कर्मचारी नेता भी कहने लगे है कि इसके अलावा अस्पताल में उपयोग किये जाने वाला सेनेटाइजर असली है या नकली।

चर्चा तो यह भी है कि अब ज्यादातर कर्मचारी भेल टाउनशिप के डिस्पेंशनरियों के भरोसे है जहां 50 से 60 मरीजों को हो देखा जाता है वह भी दूर से। इधर यह भी कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमण की सही जांच की सुविधा न होने के कारण यह भी पता नहीं चल पाता कि कौन सा मरीज संक्रमित है। इसके चलते एक कोरोना संक्रमित रिटायर कर्मचारी का इलाज चलता रहा बाद में पता चला कि यह कर्मचारी कोरोना पाजिटिव है। तब कहीं जाकर आनन फानन में ईसीजी, एक्स रे, टेक्निशियन और कुछ नर्सिंग स्टाफ को कोरंटाईन करना पड़ा। इसकी खबर भी प्रबंधन छिपाने में लगा है।

टाउनशिप में बजट नहीं है भाई

लाक डाउन के चलते करीब पौने दो माह तक बंद रहा भेल नगर प्रशासन विभाग जैसे तैसे खुल तो गया है लेकिन टाउनशिप में काम के नाम पर अधिकारी बजट का रोना रो रहे है इसलिये टाउनशिप के आवास व अन्य मरम्मत के काम अधर में लटके है। चर्चा है कि जब कोई ट्रेड यूनियन नेता नगर प्रशासन के मुखिया के पास कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर बताने जाता है तो साहब कहने लगते है कि कारपोरेट ने टाउनशिप के काम के लिये बजट ही मुहैया नहीं कराया है इसलिये ऊपर तक मेरी शिकायत कर दें मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता हां वह यह भी कहने लगते है कि आवासों में छोटा मोटा काम हो तो आपके कहने से कर सकता हूं। हालात यह बन गये है कि भेल जैसी महारत्न कंपनी के कर्मचारी अपने ही काम के लिये परेशान है और टाउनशिप के मुखिया वरिष्ठ अधिकारियों पर बजट न होने के ठीकरा फोड़ रहे है।

टेंट हाउस बने जान का खतरा

भेल टाउनशिप में भेल प्रशासन ने टेंट व्यवसायियों को भले ही लायसेंंस फीस पर कोई छोटी मोटी दुकान आवंटित कर दी हो लेकिन इन व्यवसायियों ने दुकानों के आस पास करीब हजारों फीट खाली जगह को घेरकर अतिक्रमण कर लिया है। छोटे मोटे अतिक्रमण हटाने वाला बेदखली अमला इन अतिक्रमण की ओर आंखे बंद करने का नतीजा यह निकला की तीन दिन पहले एक टेंट व्यवसायी की दुकान व खाली पड़ी जमीन के सामान में बड़ी आग लग गई। भेल के फायर बिग्रेड ने भारी मशक्कत के बाद करीब ढ़ाई घंटे में इस आग पर काबू पाया वरना यह आग आवासीय क्षेत्र में फैल जाती तो भारी जन धन की हानि होने से इंकार नहीं किया जा सकता। मामला पिपलानी डी सेक्टर के एक बाजार से जुड़ा है। चर्चा इस बात कि है कि इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी व्यापारियों की मोहब्बत में जकड़ा भेल नगर प्रशासन विभाग कार्रवाही करने से कतरा रहा है।

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